
अक्सर तालों में कैद रहते हैं सरकारी स्कूलों के भवन
औपचारिक तरीके से निपटाया गया स्कूलों में प्रवेशोत्सव
छतरपुर। नया शिक्षण सत्र शुरू हो गया है, स्कूल चलें हम..जैसे नारों के साथ शिक्षा जागरूकता रैलियां भी निकाली जा चुकी है ताकि अभिभावक जागरूक हों और वह अपने बच्चों को स्कूल भेजें। हरी झंडियां दिखाकर ऐसी रैलियों के माध्यम से जागरूकता लाने के कर्तव्यों की इतिश्री तो कर दी गई लेकिन सरकारी स्कूलों का आलम यह है कि सरकारी विद्या भवन तालों में कैद हैं। जब शिक्षक ही स्कूल नहीं पहुंच रहे हैं तो बच्चे कैसे स्कूल पहुंच सकते हैं।
शिक्षा की गुणवत्ता के लिए भले ही तमाम प्रयास किए जा रहे हों लेकिन मैदानी अमले अर्थात सरकारी स्कूलों में पदस्थ शिक्षक जब तक अपना दायित्व बखूबी नहीं निभाएंगे तब तक ऐसे प्रयासों को अमलीजामा नहीं पहनाया जा सकता है। फलस्वरूप वर्तमान में सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था चौपट पड़ी हुई है। 15 जून से जिले भर के तमाम हिस्सों में रैलियां निकालकर शिक्षा जागरूकता का संदेश आमजन तक पहुंचाया गया है लेकिन सरकारी स्कूलों के ताले में बंद रहने के कारण बच्चों का तनिक भी रूझान स्कूलों में पढ़ाई के प्रति दिखाई नहीं दे रहा है। जिला और ब्लाक मुख्यालयों को छोड़ दें तो गांवों में अभी भी शिक्षक स्कूल नहीं पहुंच रहे हैं। महाराजपुर, नौगांव, गौरिहार, चंदला, लवकुशनगर, राजनगर, बिजावर, बड़ामलहरा, घुवारा, बकस्वाहा तहसील क्षेत्रों के दूरस्थ गांवों में संचालित प्राथमिक एवं माध्यमिक शालाओं में शिक्षक नहीं पहुंच रहे हैं। यदि शिक्षक पहुंचते भी हैं तो शालाओं में कुछ समय बिताकर दोपहर की गर्मी चढ़ने के पूर्व ही घर लौट आते हैं।
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देर से पहुंचते और जल्दी लौट जाते शिक्षक
महाराजपुर प्रतिनिधि के अनुसार जनपद क्षेत्र नौगॉव के अधिकारियों द्वारा निरीक्षण करने के बावजूद भी इस क्षेत्र की शिक्षण व्यवस्था में सुधार संभव नहीं हो पाया है। शिक्षक मनमानी पर आमादा है जिस कारण शिक्षण व्यवस्था राम भरोसे चल रही है। ग्राम सिंहपुर, दिवान जू का पुरवा, खिरी, मलका, मटोंधाबेसन, बुडरख, ढिगपुरा, गुरसारी, करोला, गोरारी, गणेशपुरा इत्यादि ग्रामों में संचालित प्राथमिक एवं माध्यमिक शाला के शिक्षक समय से स्कूल नही पहुंचते है। देर से आने के बाद शिक्षक जल्द ही घर की रवानगी भी ले लेते हैं। एक ओर शिक्षकों की मनमानी जारी है तो वहीं प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों में खाना बनाने बाले समूह संचालकों ने मध्यान्ह भोजन को व्यापार की तरह चलाना शुरू कर दिया है। उन्हें मीनू से कोई सरोकार नहीं है, जो बना दिया वह बच्चों को वितरित कर दिया जाता है। विद्यालयों के शिक्षक भी समूह संचालकों का भरपूर सहयोग कर रहे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि यदि वे शिकायत करते हैं तो अधिकारी समूह संचालकों का सहयोग कर उसकी शिकायत को झूठा साबित करने में कोई कसर नही छोड़ते हैं। इस कारण समूह संचालको के हौंसले बुलंद है। ग्रामीण क्षेत्र में सांझा चूल्हा योजना के तहत आगनबाड़ी केंद्रों के बच्चों को नाश्ता एवं खाना की जिम्मेदारी भी समूह संचालको के पास है। जो खाना बचता है वह आंगनबाड़ी केंद्रों में बांट दिया जाता है। अभी हाल में विद्यालयों में प्रवेश उत्सव का कार्यक्रम मनाया गया था जिसमे बच्चों को पुस्तकें मिलना थी लेकिन अभी तक पुस्तकों का वितरण नहीं किया गया है।
ग्राम बैदार की माध्यमिक शाला के छात्रछात्राओं ने जानकारी में बताया कि दो वर्ष से वह अन्य गांवों से शिक्षा ग्रहण करने इस शाला में आते हैं, लेकिन उन्हें साइकिल आज तक नही मिली। जिला सचिव शिवसेना शैलेन्द्र पुरोहित ने कहा है कि शिक्षकों की मनमानी कतई नहीं चलने दी जाएगी। यदि अव्यवस्थाओं में सुधार नहीं किया जाता है तो शिवसेना आंदोलन के लिए मजबूर होगी।
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हैंडओवर नहीं हुई नई बिल्डिंग, पुराने भवन में चल रहा स्कूल
गौरिहार तहसील क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम पंचायत प्रकाश बम्हौरी में हाईस्कूल के विद्यार्थियों की सुविधा के लिए नए भवन का निर्माण तो करा दिया गया है लेकिन लगभग दो वर्ष से नए भवन का हस्तांतरण न किए जाने के कारण पुराने भवन में ही हाईस्कूल का संचालन किया जा रहा है। प्रकाश बम्हौरी के ग्रामीणों ने जनसुनवाई में शिकायत करते हुए बताया कि 24 अगस्त 2011 को हाईस्कूल प्रकाश बम्हौरी का उन्नयन किया गया था। इसी सत्र में हाईस्कूल के नए भवन को मंजूरी भी मिल गई थी। शासन से राशि स्वीकृत हो जाने के बाद बिल्डिंग का ठेका एक ठेकेदार की पत्नि के नाम दिया गया। जिसकी उचित देखरेख न होने के कारण हाईस्कूल भवन का निर्माण मनमाने तरीके से किया गया। हस्तांतरण के पूर्व ही बिल्डिंग जर्जर स्थिति में पहुंचने लगी है। कक्षों के अंदर लगी टाईल्स आदि टूट रही हैं तो दीवारों में दरार आ चुकी है। दरक रहीं दीवारें ठेकेदार की मनमानी और घटिया सामग्री की कहानी बयां कर रही है। बिल्डिंग का निर्माण घटिया तरीके से कराए जाने के बाद भी नए भवन को हैंडओवर न किए जाने के कारण इस वर्ष भी हाईस्कूल के विद्यार्थी पुराने भवन में ही बैठकर पढ़ाई करेंगे। हैंडओवर की प्रक्रिया को लेकर न तो प्राचार्य गंभीर दिखाई दे रहे हैं और न ही शिक्षा विभाग के अन्य अधिकारियों द्वारा कोई रूचि दिखाई जा रही है। ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि कहीं ऐसा न हो कि नई बिल्डिंग हैंडओवर के पहले ही जर्जर अवस्था में पहुंच जाए। ग्रामीणों ने बताया कि नई बिल्डिंग में अभी कुछ कार्य शेष पड़ा है जिसे जल्द पूराकर हस्तांतरित की कार्यवाही शीघ्र कराई जाए ताकि इस सत्र से बच्चों को नए भवन में पढ़ाई का मौका मिल सके।
नोट समाचार के साथ फोटो 03, 04, 05 एवं 06 का केप्सन है
महाराजपुर। ताले में बंद शासकीय शाला गौरारी। 03
महाराजपुर। ढ़िगपुरा स्कूल में पड़े ताले। 04
महाराजपुर। सूनी पड़ी पड़वाहा गांव की माध्यमिक शाला। 05
छतरपुर। हैंडओवर के इंतजार में प्रकाश बम्हौरी हाईस्कूल की नई बिल्डिंग। 06