छिंदवाड़ा। मक्का की खेती करने के मामले में जिले का नाम देश और प्रदेश के अग्रणी जिलों के तौर पर लिया जाता है, लेकिन जिले के प्रभारी मंत्री ने स्पष्ट कर दिया है कि मक्का को एमएसपी में शामिल नहीं किया गया है, जिसके कारण व्यापारी इसका फायदा उठा रहे हैं। बिछुआ, चौरई ब्लाक में तो 11 सौ रुपये प्रति क्विंटल तक मक्का बिकने की जानकारी सामने आ रही है। वहीं कृषि और प्रभारी मंत्री कमल पटेल की मानें तो शासन का काम अनाज खरीदना नहीं होता है। किसानों को राहत देने के लिए समर्थन मूल्य पर खरीदी की जाती है, लेकिन इस साल मक्का की एमएसपी घोषित नहीं की गई है। इसे लेकर कांग्रेस ने आपत्ति जाहिर की है। कांग्रेस जिला अध्यक्ष विश्वनाथ ओक्टे ने बताया कि पिछले साल मक्का की एमएसपी घोषित नहीं करने के बाद शासन की मंशा स्पष्ट हो गई है कि वो जिले के किसानों के साथ भेदभाव कर ही है, अगर एमएसपी पर मक्का नहीं लिया गया तो आंदोलन किया जाएगा। गौरतलब है कि बीते साल मक्का 22 सौ से 25 रुपये प्रति क्विंटल बिका, जिसके कारण किसानों ने बड़े उत्साह के साथ मक्का की फसल लगाई। वहीं दूसरी 2018 में मक्का का भावांतर भी दिया गया था, जिसके चलते किसानों को खासा मुनाफा हुआ था, लेकिन इस साल मक्का का समर्थन मूल्य घोषित नहीं होने के कारण इस साल ये स्थिति बनी है।
मक्का की है कम मांगः दरअसल इस साल बाजार में भी मक्का की कम मांग है, जिसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है। मक्का का इस्तेमाल पोल्ट्री फार्म में होता है, साथ ही आंध्र प्रदेश से बड़े पैमाने पर मक्का की मांग आती है, लेकिन इस साल मक्का किसानों को खासा नुकसान झेलना पड़ रहा है। इसे लेकर लगातार सियासत भी गरमाते रही है। वहीं प्रभारी मंत्री कमल पटेल की मानें तो मक्का से एथेनॉल बनाने को लेकर फैक्ट्री बनाने के लिए कुछ कंपनियों से बात हो रही है।
वर्जन
शासन का काम अनाज खरीदना नहीं है, किसानों को राहत देने के लिए अनाज खरीदी की जाती है। जहां तक मक्का की बात है, उसको एमएसपी पर नहीं रखा गया है।
कमल पटेल, प्रभारी मंत्री और कृषि मंत्री
छिंदवाड़ा जिले में बड़े पैमाने पर किसानों ने मक्का की फसल लगाई है। शासन द्वारा एमएसपी घोषित नहीं करने के कारण मक्का किसानों के सामने गंभीर संकट खड़ा हो गया है। व्यापारी मनमर्जी के दामों में खरीदी कर रहे हैं।
विश्वनाथ ओक्टे, जिला अध्यक्ष