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एमपी में 'मुन्नाभाई एमबीबीएस...' संजीवनी क्लीनिक में नौकरी कर रहे तीन फर्जी डॉक्टर गिरफ्तार

देश में नीट पेपर लीक कांड के बीच मध्य प्रदेश में फर्जी एमबीबीएस डॉक्टर पकड़े गए हैं। अभी जबलपुर और दमोह जिलों में संजीवनी क्लीनिक में कार्यरत तीन डॉक्...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: ADITYA KUMAR
Publish Date: Mon, 18 May 2026 10:31:56 PM (IST)Updated Date: Mon, 18 May 2026 10:31:56 PM (IST)
एमपी में 'मुन्नाभाई एमबीबीएस...' संजीवनी क्लीनिक में नौकरी कर रहे तीन फर्जी डॉक्टर गिरफ्तार
संजीवनी क्लीनिक में नौकरी कर रहे तीन फर्जी डॉक्टर गिरफ्तार

नईदुनिया प्रतिनिधि, दमोह। देश में नीट पेपर लीक कांड के बीच मध्य प्रदेश में फर्जी एमबीबीएस डॉक्टर पकड़े गए हैं। अभी जबलपुर और दमोह जिलों में संजीवनी क्लीनिक में कार्यरत तीन डॉक्टरों को फर्जी डिग्री के बाद गिरफ्तार कर लिया गया है। जांच में इनकी एमबीबीएस की डिग्री और मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया का पंजीयन फर्जी पाया गया है। ये तीनों राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम) से एमबीबीएस डॉक्टर के तौर पर हर माह 70-80 हजार रुपये वेतन ले रहे थे। इसके साथ ही रोज करीब 30-40 मरीजों को देखते थे। इस तरह से प्रदेश में कई और फर्जी डॉक्टरों के होने की संभावना से स्वास्थ्य विभाग ने जांच प्रारंभ कर दी है।

फर्जी दस्तावेजों के आधार पर मिली नौकरी, कोतवाली में केस दर्ज

दमोह के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) कार्यालय ने ग्वालियर निवासी डॉ. कुमार सचिन यादव और सीहोर निवासी डॉ. राजपाल गौर की डिग्री फर्जी होने की रिपोर्ट कार्रवाई के लिए पुलिस को भेजी थी। दोनों ने दमोह की सुभाष कॉलोनी में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत संचालित संजीवनी क्लीनिक में नौकरी के लिए करीब एक वर्ष पहले एमबीबीएस की फर्जी डिग्री प्रस्तुत की थी।


इसके अलावा, मेडिकल काउंसिल में रजिस्ट्रेशन प्रमाण-पत्र और अन्य शैक्षणिक व पंजीयन दस्तावेज प्रस्तुत किए, वे फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बने पाए गए। दोनों के विरुद्ध दमोह कोतवाली में फर्जीवाड़ा का केस दर्ज कराया गया है। दोनों से पूछताछ में पुलिस को एक अन्य फर्जी डॉक्टर मुरैना निवासी अजय मौर्य के बारे में पता चला, जिसे जबलपुर से गिरफ्तार कर लिया गया। वह जबलपुर की संजीवनी अस्पताल में ढाई वर्ष से कार्यरत है।

दो से सात लाख तक में फर्जी डिग्री, भोपाल और ग्वालियर से जुड़े हैं तार

पकड़े गए एक फर्जी डॉक्टर ने पुलिस को जानकारी दी है कि भोपाल में जिस व्यक्ति ने उसकी फर्जी डिग्री बनवाई, उसकी स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से साठगांठ है। इस रैकेट के सरगना ग्वालियर क्षेत्र का होने की जानकारी मिल रही है। फर्जी डिग्री के लिए दो लाख से लेकर सात लाख रुपये तक की वसूली की जाती है। कोतवाली थाना प्रभारी मनीष कुमार ने बताया कि इस गिरोह के और भी कितने सदस्य हैं या कितने लोगों को इस प्रकार से फर्जी डिग्री उपलब्ध कराई गई है, इस मामले में भी जानकारी और प्रमाण एकत्रित किए जा रहे हैं।

सवाल: नौकरी के लिए कैसे सत्यापित हो गए फर्जी प्रमाण पत्र?

गिरफ्तार तीनों के फर्जी दस्तावेज के आधार पर उन्हें राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के अधिकारियों ने नौकरी कैसे दे दी यह बड़ा सवाल है। असल में, एनएचएम में प्रमाणपत्रों के सत्यापन के बाद संविदा नियुक्ति का प्रावधान है। ऐसे में, पूरी नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो रहे हैं। इससे नियुक्ति में भी मिलीभगत के संकेत मिले हैं। दमोह के एसपी आनंद कलादगी का कहना है कि ये प्रकरण बेहद गंभीर है इसलिए हर पहलू से जांच की जा रही है।

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