दतिया विधायक राजेंद्र भारती को धोखाधड़ी मामले में दिल्ली कोर्ट ने पाया दोषी
दरअसल, दतिया से कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की थी, जिसमें एमपी बीजेपी के नेता और पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा...और पढ़ें
Publish Date: Wed, 01 Apr 2026 04:38:18 PM (IST)Updated Date: Wed, 01 Apr 2026 04:52:09 PM (IST)
दतिया विधायक राजेद्र भारती को कोर्ट ने पाया दोषी।HighLights
- जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के एक कर्मचारी ने कोर्ट में परिवारवाद दायर किया था।
- मामला धोखाधड़ी का बना था, जिसकी सुनवाई एमपी-एमएलए कोर्ट में चल रही थी।
- राजेंद्र भारती ने अपने ऊपर लगे आरोपों को राजनीतिक षड्यंत्र का मामला बताया था।
नईदुनिया प्रतिनिधि,दतिया। मध्य प्रदेश के दतिया विधायक राजेंद्र भारती को दिल्ली एमपी एमएलए कोर्ट ने भूमि विकास बैंक से जुड़े मामले में बुधवार को दोषी करार दिया है। न्यायालय ने उन्हें भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी) के तहत दोषी ठहराया है।
राजेंद्र भारती ने ही ग्वालियर से दिल्ली शिफ्ट कराया था मामला
दतिया से कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती के धोखाधड़ी के पुराने मामले में उन्हीं की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने ग्वालियर की एमपी-एमएलए कोर्ट से दिल्ली कोर्ट में ट्रांसफर करने का आदेश दिया था। उन्होंने केस को ट्रांसफर करने की याचिका लगाई थी, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करते हुए मामले को ट्रांसफर करने का आदेश दिया था।
नरोत्तम मिश्रा पर लगाया था दबाव का आरोप
दरअसल, दतिया से कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की थी, जिसमें एमपी बीजेपी के नेता और पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा और उनके परिवार के लोगों के पर उन्होंने गंभीर आरोप लगाए थे, जिसमें राजेंद्र भारती का कहना था कि उनका केस राजनीतिक दवाब के चलते प्रभावित करने की कोशिश हो रही है. कांग्रेस विधायक का आरोप था कि अभियोजन अधिकारी भी पूर्व मंत्री के दबाव में काम कर रहे हैं, इसलिए इस मामले की सुनवाई ग्वालियर की जगह किसी और जगह से की जानी चाहिए।
जिला सहकारी केंद्रीय बैंक से जुड़ा था मामला
- यह मामला जिला सहकारी केंद्रीय बैंक से जुड़ा बताया जा रहा है. जहां राजेंद्र भारती की मां के नाम से बैंक में 10.50 लाख की एफडी थी।
- इसकी सीमा तीन साल के लिए जमा हुई थी, इस पर 13.50 प्रतिशत का ब्याज दिया जा रहा था, लेकिन आरोप लगाया गया था कि समय सीमा में काट-छांट करके उसे 15 साल कर दिया और फायदा उठाया।
- इसी को लेकर बैंक के एक कर्मचारी ने कोर्ट में परिवारवाद दायर किया था, जिसके बाद मामला धोखाधड़ी का बना था, जिसकी सुनवाई एमपी-एमएलए कोर्ट में चल रही थी।
- राजेंद्र भारती ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को राजनीतिक षड्यंत्र का मामला बताया था, उन्होंने कहा कि जो परिवाद दायर किया गया है, उसमें कई साक्ष्यों को छुपाया गया है।
- क्योंकि उनके मुताबिक एफडी की समय सीमा बढ़ाया जा सकता था, जिसका जिक्र एफडी में किया था।
- विधायक के आरोपों पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई, जिसमें मामले को दिल्ली शिफ्ट कर दिया था।