
उनाव। गांव ललऊआ के बटनपुर डेरे में जान लेवा बुखार के प्रकोप से एक की मौत हो चुकी है, जबकि 8 लोग अभी भी अस्पतालों में अपना इलाज करवा रहे हैं। बताया जा रहा है कि गांव पिछले कई दिनों से बुखार की चपेट में हैं। लेकिन स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों ने एक व्यक्ति की मौत होने के बाद गांव में दस्तक दी।
मालूम हो कि ललऊआ में लगातार दो वर्षों से अक्टूबर माह में जानलेवा बुखार फैल रहा है। लेकिन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं देते। पिछले बार भी बुखार की वजह से मौतें हुई थी। बावजूद इस बार समय से पहले बुखार की रोकथाम के प्रबंध नहीं किए गए। न तो कीटनाशक दवाओं का छिड़काव किया गया और न ही आसपास साफ-सफाई कराई गई। नतीजा इस बार बुखार से रामपाल आदिवासी की मौत हो गई। रामपाल की मौत की सूचना मिलने पर स्वास्थ्य विभाग हरकत में आया और स्वास्थ्य विभाग की ग्रामीणों का स्वास्थ्य परीक्षण किया। गांव में अभी भी 8 लोग बुखार से पीड़ित हैं, जिनका इलाज अस्पतालों में चल रहा है।
यह लोग भर्ती
ललऊआ ग्राम के बटनपुर डेरे में हर घर में लोग बुखार से ग्रसित हैं। इनमें से 14 वर्षीय सपना आदिवासी पुत्र कंपू, 5 वर्षीय यशोदा पुत्री नारायण, 30 वर्षीय प्रेम किशोर पुत्र उमराव आदिवासी, 5 वर्षीय सतीश पुत्र अशोक आदिवासी अस्पताल में भर्ती होकर इलाज करा रहे हैं।
इनका कहना है
ग्राम में बुखार की वजह से रामपाल आदिवासी की मौत हो गई थी। इसके बावजूद डॉक्टर नहीं आए। अब हालत और बिगड़ गई है।
-राममिलन आदिवासी, स्थानीय निवासी
मुझे जैसे ही जानकारी मिली की बटनपुर में बुखार फैला है। टीम बनाकर वहां भेज दी थी। शुक्रवार एवं शनिवार को टीम ने स्वास्थ्य परीक्षण किया है।
-डॉ. पीडी करगैया, बीएमओ उनाव।