पीतांबरा पीठ की दुर्लभ धरोहर होगी डिजिटल: 7,500 पुस्तकों और पांडुलिपियों के 16 लाख पन्नों को सहेजने की तैयारी
दतिया न्यूज: पीतांबरा पीठ के अधिष्ठाता स्वामी जी महाराज की साहित्य साधना को पीठ से जुड़े साधक आध्यात्मिक चिंतन और धार्मिक परंपराओं के अध्ययन की दृष्टि...और पढ़ें
Publish Date: Sat, 19 Sep 2026 10:35:38 PM (IST)Updated Date: Sat, 19 Sep 2026 10:41:19 PM (IST)
पींतांबरा पीठ स्थित पुस्तकालय में मौजूद पुस्तकों का होगा डिजिटलीकरण। नईदुनिया।HighLights
- संस्कृति मंत्रालय और दिल्ली की एजेंसी के सहयोग से होगा डिजिटलीकरण
- स्वामी जी महाराज के हस्तलिखित नोट्स और तंत्र साधना साहित्य होंगे सुरक्षित
- नवरात्र के बाद शुरू होगा प्रोजेक्ट, 30 लाख रुपये का आएगा खर्च
कुलदीप सक्सेना, नईदुनिया, दतिया। प्रसिद्ध शक्ति स्थल पीतांबरा पीठ में वर्षों से सुरक्षित दुर्लभ आध्यात्मिक और साहित्यिक धरोहर को संरक्षित करने की दिशा में प्रयास शुरू हो गए हैं। पीठ के पुस्तकालय में रखी साढ़े सात हजार पुस्तकों, पांडुलिपियों और महत्वपूर्ण दस्तावेजों के करीब 16 लाख पृष्ठों का डिजिटलीकरण करने की योजना है। इससे देश-विदेश के साधकों और शोधकर्ताओं को भी इस दुर्लभ साहित्य तक पहुंच मिल सकेगी।
पीठ की साधना परंपरा और आध्यात्मिक गतिविधियों से जुड़ी सामग्री सुरक्षित
पीतांबरा पीठ के अधिष्ठाता स्वामी जी महाराज की साहित्य साधना को पीठ से जुड़े साधक आध्यात्मिक चिंतन और धार्मिक परंपराओं के अध्ययन की दृष्टि से महत्वपूर्ण मानते हैं। इन दस्तावेजों में पीठ की साधना परंपरा और आध्यात्मिक गतिविधियों से जुड़ी सामग्री सुरक्षित है।
पुराने पांडुलिपियों को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए इन्हें डिजिटल स्वरूप में संरक्षित करने की योजना पर काम किया जा रहा है, ताकि मूल सामग्री को बार-बार निकालने और संभालने की आवश्यकता कम हो।
इनमें स्वामी जी की तंत्र साधना महत्वपूर्ण पौराणिक अनुष्ठान से जुड़ी पुस्तकें, पांडुलिपियां और उनके हाथ से लिखे नोट, दुर्लभ दस्तावेज और पत्राचार, तस्वीरें आदि भी शामिल हैं।
संस्कृति मंत्रालय की ली जा रही है मदद
इस प्रोजेक्ट में भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय की मदद भी ली जा रही है। हाल ही में मंत्रालय के निदेशक अनिल कुमार ने पीतांबरा पीठ पहुंचकर पुस्तकालय का निरीक्षण भी किया। डिजिटलीकरण का पूरा कार्य दिल्ली की एक एजेंसी के माध्यम से कराया जाएगा।
इस प्रोजेक्ट पर लगभग 30 लाख रुपये खर्च होने की संभावना है। इस पूरे प्रोजेक्ट में पीठ से जुड़े साधक मुंबई निवासी टेक्सटाइल कारोबारी सुरेश सरिया वित्तीय सहयोग और उनके सहयोगी पुणे निवासी प्रमोद वर्मा अकादमिक सहयोग कर रहे हैं।
सुरेश सरिया के पिता शिवभगवान सरिया स्वामी जी महाराज के शिष्य रहे हैं
बता दें कि सुरेश सरिया के पिता शिवभगवान सरिया स्वामी जी महाराज के शिष्य रहे हैं। उनके साथ बचपन से ही सुरेश सरिया पीठ पर आते रहे। इस कारण उनका पीठ से लंबे अर्से से जुड़ाव है, वह इस कार्य में पूरा सहयोग दे रहे हैं। वहीं इस प्रोजेक्ट के लिए पीतांबरा पीठ ट्रस्ट की ओर से जल्द ही सहमति मिलने की उम्मीद है।
सहमति मिलने के बाद प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। प्रोजेक्ट की शुरुआत नवरात्र के बाद होने की संभावना है। यह कार्य करीब दो माह में पूरा किए जाने की योजना है।