मध्याह्न भोजन की हकीकत: बच्चों की थाली में ‘पतली सब्जी’, अफसरों के लिए ‘इडली-सांभर’-प्रतियोगिता पर उठे सवाल
प्रतियोगिता के दौरान अधिकारियों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले समूहों को पुरस्कृत भी किया गया। प्रथम पुरस्कार 5000 रुपये, द्वितीय पुरस्कार 3000 रुपये ...और पढ़ें
Publish Date: Thu, 25 Jun 2026 02:14:24 PM (IST)Updated Date: Thu, 25 Jun 2026 02:25:25 PM (IST)
एआई से बना चित्र।HighLights
- दतिया जिले के सेवढ़ा का मामला
- मेन्यू से गायब व्यंजन परोसकर बटोही वाहवाही
- बाजार से खरीदे भोजन पर बंटे इनाम, ग्रामीण नाराज
नईदुनिया न्यूज, सेवढ़ा। पीएम पोषण शक्ति निर्माण योजना के तहत बुधवार को उत्कृष्ट विद्यालय सेवढ़ा में रसोइया सह-सहायक (कुक-कम-हेल्पर) प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता का उद्देश्य रसोइयों को प्रोत्साहित करना तथा विद्यालयों में बच्चों को मिलने वाले मध्याह्न भोजन की गुणवत्ता में सुधार लाना बताया गया। कार्यक्रम में विभिन्न स्व-सहायता समूहों और रसोइयों ने कई प्रकार के व्यंजन प्रस्तुत किए। लेकिन उनमें से अधिकांश ऐसे थे जो मध्यांह भोजन में बनाए ही नहीं जाते। ऐसे में इस प्रतियोगिता के उद्देश्य पर ही सवाल खड़े हो गए।
प्रतियोगिता के दौरान अधिकारियों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले समूहों को पुरस्कृत भी किया गया। प्रथम पुरस्कार 5000 रुपये, द्वितीय पुरस्कार 3000 रुपये तथा तृतीय पुरस्कार 2000 रुपये प्रदान किए गए, जबकि अन्य प्रतिभागियों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में मध्याह्न भोजन जिला समन्वयक मनीष गुप्ता, विकासखंड शिक्षा विभाग के अधिकारी प्रीति जाटव, जनशिक्षक तथा विद्यालय प्रबंधन से जुड़े प्रतिनिधि उपस्थित रहे। अधिकारियों ने इसे भोजन की गुणवत्ता सुधारने की दिशा में एक सकारात्मक पहल बताया। हालांकि प्रतियोगिता के बाद आयोजन को लेकर कई सवाल भी उठे।
स्थानीय लोगों और शिक्षकों का कहना था कि प्रतियोगिता में प्रदर्शित कई व्यंजन और खाद्य सामग्री बाजार से खरीदकर लाई गई थीं। उनका तर्क है कि जिस स्तर का भोजन प्रतियोगिता में प्रदर्शित किया गया, वैसा भोजन सामान्य दिनों में विद्यालयों में बच्चों को नहीं मिलता और ना ही वह उनके मेन्यू में है। ग्रामीणों और अभिभावकों का सवाल है कि यदि प्रतियोगिता के लिए विशेष व्यवस्थाएं कर आकर्षक और पौष्टिक भोजन प्रस्तुत किया जा सकता है, तो क्या संबंधित अधिकारी बच्चों को प्रतिदिन भी उसी स्तर का भोजन उपलब्ध कराएंगे।
क्योंकि प्रतियोगिता में इडली सांभर जैसे आइटम प्रदर्शित किए गए थे। जबकि स्कूलों के मध्यांह भोजन कर अगर संबंधित अधिकारी स्वयं निरीक्षण कर लें तो वहां पतली सब्जी में आलू तक देखने को नहीं मिलेंगे। यदि प्रतियोगिता का उद्देश्य वास्तविक स्थिति का आंकलन करना था, तो भोजन उन्हीं संसाधनों और सामग्री से तैयार कराया जाना चाहिए था जो स्कूलों में नियमित रूप से उपलब्ध रहती हैं। इस प्रतियोगिता का आयोजन और मनमाने तरीके से पुरस्कार वितरण विवादों में आ गया है।