दतिया: पीतांबरा पीठ में बन रहा वैदिक तंत्र साधना शोध केंद्र, 2027 तक 2 करोड़ की लागत से होगा तैयार
करीब दो करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इस केंद्र का उद्देश्य पीठ से जुड़ी ज्ञान परंपरा, तंत्र-मंत्र, साधना और वैदिक साहित्य के अध्ययन एवं शोध को व्य...और पढ़ें
Publish Date: Sat, 26 Sep 2026 07:29:30 PM (IST)Updated Date: Sat, 26 Sep 2026 07:30:28 PM (IST)
दतिया में पीठ स्थित परिसर में निर्माणाधीन रिसर्च सेंटर। नईदुनियाHighLights
- 33 हजार वर्गफीट में आकार ले रहा हाईटेक शोध केंद्र
- दुर्लभ पांडुलिपियां और धार्मिक साहित्य होंगे डिजिटलाइज्ड
- देश-विदेश के शोधार्थियों के लिए बनेगी ठहरने की व्यवस्था
नईदुनिया प्रतिनिधि, दतिया। प्रसिद्ध पीतांबरा पीठ आध्यात्मिक साधना केंद्र के साथ अब देश विदेश के शोधार्थी साधकों के लिए वैदिक तंत्र साधना में अध्ययन एवं शोध के भी मार्ग खोल रहा है। इसके लिए पीठ परिसर में 33 हजार वर्गफीट में दो मंजिला आधुनिक केंद्र बनाया जा रहा है। इसके वर्ष 2027 में नवंबर माह तक पूरा हो जाने की संभावना है। पूरी तरह हाईटेक होने वाले इस केंद्र में तंत्र-मंत्र और साधना पर शोध के लिए देश-विदेश के शोधार्थियों को सुविधा मिलेगी।
2 करोड़ में बनेगा केंद्र
करीब दो करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इस केंद्र का उद्देश्य पीठ से जुड़ी ज्ञान परंपरा, तंत्र-मंत्र, साधना और वैदिक साहित्य के अध्ययन एवं शोध को व्यवस्थित मंच उपलब्ध कराना होगा। आधुनिक सुविधाओं से युक्त इस केंद्र में शोधार्थियों के अध्ययन के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं विकसित की जा रही हैं। पीतांबरा पीठ पर उपलब्ध दुर्लभ पांडुलिपियों, पुस्तकों और तंत्र-साधना से संबंधित साहित्य को यहां डिजिटल रूप में भी उपलब्ध कराया जाएगा।
केंद्र में बन रहे हैं सभागार और वाचन कक्ष भी
यह केंद्र केवल अध्ययन स्थल नहीं होगा, बल्कि शोध के लिए आने वाले लोगों को लंबे समय तक रुककर काम करने की सुविधा भी यहां मिल सकेगी। इसके लिए यहां ठहरने के लिए भी कक्ष बनेंगे। केंद्र में सभागार और वाचन कक्ष भी बन रहे हैं। इससे पुरानी ज्ञान सामग्री की संरक्षित रूप में पहुंच शोधार्थियों तक आसान होगी।
वैदिक साहित्य, तंत्र-मंत्र और साधना से जुड़े विषयों पर शोध करने वाले विद्यार्थियों, अध्येताओं और साधकों को एक ही स्थान पर अध्ययन सामग्री और शोध के लिए अनुकूल वातावरण उपलब्ध हो सकेगा। यहां शोध सामग्री अधिकांश डिजिटल रूप में रखने के योजना है।
शोध से संबंधी जानकारी का संकलन भी उनके लिए आसान हो सकेगा। यहां वैदिक साहित्य, तंत्र-मंत्र और साधना से जुड़े विषयों पर व्यवस्थित तरीके से शोध के लिए रखा जाएगा। निर्माण कार्य पूरा होने के बाद देश-विदेश से आने वाले शोधार्थियों के लिए यह केंद्र महत्वपूर्ण अध्ययन स्थल के रूप में विकसित होगा।
इसलिए भी अनूठा होगा यह केंद्र
- यह शोध केंद्र इसलिए भी अनूठा है, क्योंकि इसमें साधक व शोधार्थियों के लिए स्वामी जी महाराज के हाथों से लिखी गई पांडुलिपियों ज्ञानवर्धन के लिए उपलब्ध रहेंगी।
- इसके साथ ही स्वामी जी महाराज को विभिन्न संत और शंकराचार्यों द्वारा भेंट की गई पुरातन धार्मिक पुस्तकें व अन्य अध्यात्म की सामग्री भी यहां रखी जाएंगी, ताकि उनका लाभ साधक व श्रद्धालुओं को मिल सके।
- पीठ से जुड़े साधक मुंबई निवासी सुरेश सरिया द्वारा रिसर्च सेंटर भवन निर्माण के लिए वित्तीय सहयोग किया जा रहा।
- इस कार्य में उनके सहयोगी पुणे के भक्त प्रमोद वर्मा भी अकादमिक सहयोग कर रहे हैं। पीठ के व्यवस्थापक चंद्रमोहन मिश्रा का कहना है कि यह शोध केंद्र शोधार्थियों व साधकों के लिए काफी सहायक होगा।