
-दो बार आ चुकी है पूर, लेकिन अमोदिया से बागली जटाशंकर मार्ग के रणजीत बांध तक दो किमी तक सूखी पड़ी है नदी
बागली। नईदुनिया न्यूज
रुक-रुककर हो रही बारिश फसलों के लिए बहुत ही लाभदायक साबित हो रही है। साथ ही गर्मी में बंद हो चुके जलस्रोत फिर से रिचार्ज हो गए हैं। लेकिन अभी भी नगर की कालीसिंध नदी में पानी का बहाव शुरु नहीं हुआ है। जबकि दो बार तेज बारिश से नदी में पूर भी आ चुकी है। इसके बावजूद कालीसिंध नदी के उद्गम स्थल अमोदिया से लेकर बागली जटाशंकर मार्ग के रणजीत बांध तक दो किमी में नदी अभी भी सूखी पड़ी है। कुछ-कुछ जगह गड्ढों में पानी जरुर भर गया है।
बुजुर्ग किसान छितरमल यादव ने बताया कि कालीसिंध नदी जिले की महत्वपूर्ण नदी है। इससे कई नगर और गांवों की पेयजल व्यवस्था और खेती में सिंचाई होती आ रही है। पुराने जमाने में बड़पाला के पास भीषण गर्मी में नदी में हाथी डुब पानी रहता था। इसके आगे रणजीत बांध पर पटिए लगाकर पानी को रोका जाता था। लेकिन पिछले कई सालों से अल्पवर्षा के कारण जनवरी-फरवरी तक बहने वाली नदी का बहाव केवल बारिश में ही रहने लगा है। कालीसिंध नदी एक बरसाती नाला बनकर रह गई है। इसके कारण इस नदी पर निर्भर गांवों में पेयजल जलसंकट और सिंचाई का संकट आ गया है। किसान भारतसिंह सोलंकी, ओमप्रकाश शर्मा, विजय यादव, सुरेश जायसवाल, भीमसिंह राणा, महेंद्र पाटीदार, कैलाश टेलर आदि ने बताया कि कालीसिंध नदी के उद्गम स्थल को नर्मदा नदी से मिलाकर फिर से कालीसिंध नदी पुनर्जीवित की जा सकती है। इससे बहुत लाभ होगा। उल्लेखनीय है कि कालीसिंध्रनदी के उद्गम स्थल से नर्मदा नदी को जोड़ने के लिए कई बार सर्वे भी हो चुके हैं। यहां तक की इसकी अनाधिकृत घोषणा भी्रहोकर खुशियां भी मनाई जा चुकी है। लेकिन फिर योजना के स्वरुप को बदला जा रहा है। अब कालीसिंध उद्गम्रमें नर्मदा सीधे न जोड़कर देवगढ़ गांव से केवल पीने के पानी के लिए पाइप द्वारा और नदी में जगह-जगह स्टॉपडेम बनाकर माइक्रो एरिगशन की योजना बनाई जा रही है। इससे स्थानीय लोगों में असमंजस पैदा हो रहा है। आम लोगों ने योजना पर पुनर्विचार कर कालीसिंध नदी के उद्गम स्थल से ही नर्मदा को जोड़ने की मांग की है।