देवास (नईदुनिया प्रतिनिधि)।
देवास नर्मदा उद्वहन सिंचाई परियोजना को सरकार ने ठंडे बस्ते में डाल दिया है। यह बात पं. रितेश त्रिपाठी मित्र मंडल द्वारा देवास नर्मदा उद्वहन सिंचाई योजना की मांग की मंजूरी और उससे संबंधित बातों को लेकर आयोजित पत्रकार वार्ता कही गई। इसमें बताया गया कि नर्मदा जल विवाद न्यायाधिकरण द्वारा पारित अवार्ड अनुसार नर्मदा जल के कुल 28 (मिलियन एकड़ फीट)एमएएफ उपयोगी जल में से मध्यप्रदेश को 18.25 एमएएफ जल आवंटित है, इसमें से 14.5 एमएएफ की निविदा लगी हैं या कुछ परियोजनाएं पूर्ण हो चुकी हैं, अब मध्यप्रदेश के हिस्से में 3.75 एमएएफ जल शेष है, जिसे 2023 तक उपयोग में ले सकेंगे। अन्यथा यह जल गुजरात के हिस्से में चला जाएगा। नर्मदा कालीसिंध लिंक परियोजना के फेस 1 व 2, फेस 3 व 4 में दो निविदाएं लगकर कार्य प्रगति पर है। परंतु देवास शहर को पेयजल व देवास विधानसभा के 72 गांवों को इस योजना से पानी नहीं मिल पाया है। अब नर्मदा कालीसिंध लिंक परियोजना के चारों फेस से शेष बचा पानी भी वर्तमान में शाजापुर विधानसभा के समस्त गांवों को मिलेगा। इसलिए देवास नर्मदा उद्वहन सिंचाई योजना ही एक मात्र विकल्प है जिसकी डीपीआर(डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट)पूर्व कांग्रेस सरकार के समय में बन चुकी है। परंतु सरकार बदलने के बाद उक्त योजना को वर्तमान सरकार द्वारा कोई रूचि न दिखाकर ठंडे बस्ते में डाल दिया है। वर्तमान में देवास को शिप्रा जल आवर्धन योजना से पानी मिल रहा है। बांध पूरा भरने के बाद भी शिप्रा की जमीनी सतह इस प्रकार की है कि दिसंबर, जनवरी माह तक पानी सूख जाता है। 2016 सिंहस्थ के पूर्व से जो नर्मदा का जल उज्जैन शिप्रा नदी में धार्मिक त्योहारों पर स्नान के लिए जल छोड़ा जाता है उसी जल से हमें गर्मी में पर्याप्त पानी पेयजल के लिए मिलता रहा है। स्थायी पेयजल समाधान के लिए नर्मदा उद्वहन सिंचाई योजना की मंजूरी जरूरी है। जिससे पेयजल के साथ ही देवास विधानसभा के 72 गांवों को सिंचाई हेतु जल मिल सके। पूर्व में भी पूर्व मंत्री चंद्रप्रभाष शेखर द्वारा लोदरी नदी परियोजना को मंजूर कराया गया था। अगर उस समय जनप्रतिनिधि, प्रबुद्धजन इसमें रुचि दिखाते तो पानी के अभाव में देवास शहर के तमाम उद्योग जो बंद हुए हैं। वे बंद नहीं होते और देवास शहर का स्वरूप भी औद्योगिक क्षेत्र पीथमपुर और नोएडा की भांति होता। अतः देवास नर्मदा उद्वहन सिंचाई योजना को जन प्रतिनिधि जल्द मंजूरी दिलवाई जाए। आभार हिम्मतसिंह चावड़ा ने माना। इस अवसर पर शिवा चौधरी, प्रदीप चौधरी, चंद्रपालसिंह सोलंकी, दीपेश कानूनगो, दिग्विजयसिंह झाला, दीपक चौधरी, जितेन्द्रसिंह गौड़, नईम एहमद, शेषन कल्याणे, गोकुल पटेल, विशाल भाटिया, रोमित घाडगे, अजय जायसवाल, संजय दरबार आदि उपस्थित थे।