
लोगों की सहायता के लिए बनाए थे केंद्र, नहीं दिखते पुलिसकर्मी
-कुछ ही जगहों पर हो पा रहा उपयोग, अधिकांश जगह नहीं खुलते, अफसर भी नहीं दे रहे ध्यान
देवास। नइदुनिया प्रतिनिधि
लोगों को पुलिस की मदद लेने के लिए थाने तक नहीं जाना पड़े व कानून व्यवस्था बनी रहे इसलिए शहर में पुलिस सहायता केंद्र शुरु किए गए थे। लेकिन अब इन्हें बनाने का असल मकसद पूरा नहीं हो पा रहा। शहर के कई सहायता केंद्र सूने पड़े हैं और यहां से पुलिस गायब है। मदद की आस में आने वाले लोग पुलिस को ढूंढ़ रहे हैं और मजबूरन उन्हें थाने या अधीक्षक कार्यालय तक जाना पड़ रहा है। नईदुनिया ने कुछ सहायता केंद्र जांचें तो सामने आया कि अधिकतर पुलिस सहायता केंद्रों पर पुलिस नहीं है। इससे जुड़े सवालों पर जिम्मेदार जल्द ही व्यवस्था करने का आश्वासन दे रहे हैं।
अधिकतर केंद्रों पर कोई नहीं
पुलिस के बीट सिस्टम और ट्रैफिक पुलिस के ड्यूटी रोस्टर के हिसाब से पुलिसकर्मियों को फील्ड पर रहना जरुरी है लेकिन यहां ऐसा नहीं हो रहा। एबी रोड से लेकर अन्य मुख्यमागों तक अधिकतर सहायता केंद्रों पर कोई नहीं रहता। गुरुवार शाम चार बजे इंदिरा गांधी चौराहा स्थित सहायता केंद्र खाली था। यहीं से पुलिस मुख्यालय के अधिकारी और ट्रैफिक पुलिस की कमान संभालने वाले अधिकारी गुजरते हैं लेकिन सहायता केंद्र पर मौजूदगी न के बराबर होती है। यहां आसपास जिला बल के जवान मौजूद रहते हैं लेकिन सहायता केंद्र में कोई नहीं होता। इस तरह चार बजकर 10 मिनट पर कैलादेवी चौराहा स्थित सहायता केंद्र भी खाली था। पुलिस अधिकारी भी मान रहे हैं कि औद्योगिक थाना क्षेत्र का यह केंद्र अधिकतर सूना रहता है।
काम नहीं आया तो यहां पटका, फैल रही गंदगी
शहर के प्रमुख चौराहों पर रखे सहायता केंद्र पर मदद देने में अधिकारियों की रुचि नहीं होने के कारण इनका उपयोग भी नहीं हो रहा। इसलिए एक केंद्र को मोती बंगला क्षेत्र स्थित सेलटैक्स ऑफिस के समीप रख दिया गया है। इसके कारण परिसर और यहां बने उद्यान की हालत खराब हो रही है। अनुपयोगी केंद्र को यहां रख देने के कारण यहां सफाई भी नहीं हो रही। आलम यह है कि यहां कंडे थेपे जा रहे हैं।
व्यस्त क्षेत्रों में ज्यादा जरुरत
शहरी क्षेत्र में व्यस्त मागों और अन्य क्षेत्रों में सहायता केंद्र इसलिए बनाए जाते हैं क्योंकि यहां घनी बसाहट और व्यापारिक क्षेत्र के कारण अपराधों, विवादों और दुर्घटनाओं की संभावना ज्यादा होती है। यहां से थाने अपेक्षाकृत ज्यादा दूरी पर है और लोगों को मदद की जरुरत होती है। कई बार यहां वाहनचालक आपस में झगड़ते हैं तो कभी यात्री वाहन वालों में विवाद होते हैं। मामूली विवाद झगड़े और मारपीट तक पहुंच जाती है और इसका खामियाजा अन्य वाहनचालकों को भुगतना पड़ता है। इस बात को ध्यान में रखकर यहां सहायता केंद्र बना तो दिए गए लेकिन पुलिस के मौजूद नहीं होने के कारण जनता को मदद नहीं मिल पा रही।
जनता के हित में लेंगे निर्णय
जो सहायता केंद्र उपयोग में नहीं आ रहे हैं उनका निरीक्षण किया जाएगा। व्यवस्थाएं देखने के बाद जनता के हित में जो बेहतर होगा वो निर्णय लिया जाएगा। -अनिलसिंह राठौर, सीएसपी