
नईदुनिया प्रतिनिधि, देवास। जिले में बुजुर्गों के साथ पारिवारिक प्रताड़ना के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। हालात यह हैं कि अपने ही बेटों और बहुओं से परेशान होकर कई बुजुर्ग प्रशासन और जनसुनवाई की शरण लेने को मजबूर हैं। पिछले कुछ दिनों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिन्होंने समाज में बदलते पारिवारिक रिश्तों को लेकर चिंता बढ़ा दी है। आमतौर पर प्रत्येक सप्ताह मंगलवार को जनसुनवाई में बुजुर्ग अपने बेटों, बहुओं से प्रताड़ित होकर या घर से निकाले जाने के चलते कलेक्टर के पास पहुंचते हैं।
अधिकांश मामलों में पैतृक संपति का हिस्सा, कब्जा या बेचने की जिद और मकानों से बाहर कर देने के चलते खुले में रहने की मजबूरी होती है। हाल ही में टोंकखुर्द के बुजुर्ग देवास पहुंचे और अपने बेटों व बहू की शिकायत की। उनके अनुसार बहू ने घर पर ताला लगाकर उन्हें बाहर कर दिया, जिससे उनके सामने रहने-खाने का संकट पैदा हो गया। इस मामले में एडीएम ने तुरंत संबंधित एसडीएम व थाना प्रभारी को कार्रवाई के लिए निर्देशित किया।
एक अन्य मामले में त्रिलोक नगर इटावा निवासी 83 वर्षीय जयराम पटेल को प्रशासन की पहल पर वृद्धाश्रम बसेरा में आश्रय दिलाया गया। जानकारी के अनुसार वे अपने पुत्र द्वारा लंबे समय से प्रताड़ित किए जा रहे थे। वृद्धाश्रम प्रबंधन के मुताबिक उनका पुत्र उनके साथ मारपीट करता था और कई बार उनके द्वारा बनाया गया भोजन भी फेंक देता था। मामले की जानकारी मिलने पर प्रशासन ने हस्तक्षेप करते हुए उन्हें वृद्धाश्रम में प्रवेश दिलाया।
इसी प्रकार ग्राम पीपलदा निवासी देवीलाल भी अपने बेटे की शिकायत लेकर हाल ही में जनसुनवाई में पहुंचे। वहीं कुछ दिन पूर्व हाटपिपल्या क्षेत्र के एक बुजुर्ग दंपति ने भी बेटों से परेशान होकर प्रशासन से मदद मांगी थी। वृद्धाश्रम प्रबंधक दिनेश चौधरी ने बताया कि एक बुजुर्ग का बेटा डॉक्टर है और उसने अपने पिता को इतना प्रताड़ित किया कि उन्हें वृद्धाश्रम आना पड़ा। यहां सभी बुजुर्गों का स्वागत-सत्कार कर सम्मान के साथ रखा जा रहा है।
जिला अस्पताल के मनोरोग प्रमुख मनोचिकित्सक डा. धर्मेंद्र प्रजापति ने बताया कि लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों से स्पष्ट है कि बुजुर्गों के साथ उपेक्षा और प्रताड़ना की घटनाएं बढ़ रही हैं। सामाजिक कार्यकर्ताओं का भी मानना है कि बदलती जीवनशैली, पारिवारिक विवाद और संपत्ति संबंधी कारण कई बार ऐसे विवादों की वजह बनते हैं। प्रशासन भी ऐसे मामलों में हस्तक्षेप कर बुजुर्गों को राहत दिलाने का प्रयास कर रहा है। माता-पिता और बच्चों के बीच के संवाद कम होने और बच्चों को समय न दे पाने के कारण उनके मन में आदर की भावना पीछे छूट रही है। बच्चों को माता-पिता व उनके निर्णयों का सम्मान करना चाहिए, जिससे कि परिवार में टकराव न हो।