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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 24, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

ख्यात शास्त्रीय गायिका सुधा रघुरामन को मिला राष्ट्रीय कुमार गंधर्व अलंकरण, दी गायन की प्रस्तुति

देवास के मल्हार स्मृति मंदिर सभागार में यादगार संगीत समारोह हुआ। समारोह की शुरुआत से पहले सुधा रघुरामन को वर्ष 20 .य.ययका राष्ट्रीय कुमार गंधर्व अलंकर...और पढ़ें

By Navodit SaktawatEdited By: Navodit Saktawat
Publish Date: Sat, 24 Aug 2024 11:52:12 PM (IST)Updated Date: Sun, 25 Aug 2024 12:03:07 AM (IST)
ख्यात शास्त्रीय गायिका सुधा रघुरामन को मिला राष्ट्रीय कुमार गंधर्व अलंकरण, दी गायन की प्रस्तुति
सम्‍मान ग्रहण करती गायिका सुधा रघुरामन। फोटो- नईदुनिया

HighLights

  1. गायन के सौंदर्य के बाद बिखरा वादन का माधुर्य
  2. भादौ की फुहार में सुरों की बौछार ने बांधा समां
  3. मुंबई के तेजस-मिताली विंचुरकर ने मोहा मन

नईदुनिया प्रतिनिधि, देवास। सुरों की असंख्य सभाओं का साक्षी रहा मल्हार स्मृति मंदिर सभागार शनिवार को सांगीतिक विविधतों को समेटे हुआ था। रागों में लिपटकर आई इस सांझ की खुमारी ऐसी थी कि बादलों ने भी हाजिरी लगाई। सुरीले आलापों से हुआ भगवती का सुमिरन और बंदिशों के प्रवाह में बहता चला गया जन-मन। कर्नाटक शैली के संगीत में साज की सुंदरता की झलक दिखी तो लयबद्ध तालों का स्पर्श पाकर बांसुरी के स्वर मुखरित हुए। मेघों ने दस्तक दी और सांगीतिक फुहारों से मौसम सुहाना हुआ।

सुरमयी सांझ का यह नजारा था मल्हार स्मृति मंदिर सभागार का, जहां शनिवार से पं. कुमार गंधर्व संगीत समारोह की शुरुआत हुई। पहले दिन नई दिल्ली की सुधा रघुरामन का शास्त्रीय गायन हुआ। अगली सभा में तेजस-मिताली विंचुरकर ने बांसुरी-तबले की जुगलबंदी की।


साथ ही उस्ताद अलाउद्दीन खां संगीत एवं कला अकादमी के निदेशक जयंत भिसे, कलेक्टर ऋषव गुप्ता, कुमारजी की पुत्री ख्यात शास्त्रीय गायिका कलापिनी कोमकली, गायक भुवनेश कोमकली सहित संगीत प्रेमी उपस्थित रहे। मंत्री लोधी ने कहा कि पं. कुमार गंधर्व का स्‍थान संगीत की दुनिया में इतना ऊंचा है कि उसे छू पाना बड़ा कठिन है।

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तालों की संगत से निखरा बंदिशों का सौंदर्य

  • सम्मान समारोह के बाद शुरुआत हुई संगीत सभा, जिसके लिए संगीत प्रेमी प्रतीक्षारत थे। सुधा रघुरामन ने शासत्रीय संगीत की कर्नाटक शैली को बंदिशों से बयां किया।
  • भगवती के सुमिरन से आरंभ कर रागों की विविधता दिखाई। तालों की संगत में बंदिशों ने सभागार को सांगीतिक सुंदरता में डुबोया।
  • लवंगी राग में आदि ताल के साथ आगाज कर देवी के मनोहारी स्वरूप का वर्णन किया।
  • ओमकारा कारिणी...बोलों से सजी इस बंदिश ने ऐसा वातावरण बनाया कि समूचा सभागार देवी का स्तुतिगान करता नजर आया।
  • बांसुरी के मद्धम सुरों के बीच मृदंग की थाप और तबले की तालों ने इस वंदना को अभिनंदनीय बनाया।
  • इसके बाद राग चारूकेशी में संत त्यागराज स्वामी की रचना आढ़ मुढ़ गल...की प्रस्तुति दी।
  • इस बंदिश ने कर्नाटक की उस अनुपम संगीत शैली से रूबरू करवाया, जो देवास में कम ही सुनने को मिलती है।
  • इसके बाद राग यमन कल्याण में भावयामि गोपाल बालम...सुनाकर संगीत को भक्ति की धारा की ओर बढ़ाया।
  • अब पड़ाव था अभंग का जिसमें विट्ठल प्रभु के स्वरूप को सुरों से सजाया। आखिर में रूपक ताल में निबद्ध पूर्वी कल्याण राग में तिला सुनाया।
  • गायन शैली की इस अनुपम प्रस्तुति ने श्रोताओं को बांधकर रखा।
  • मृदंग पर एमवी चंद्रशेखर, बांसुरी पर जी रघुरामन, तबले पर पवन सेम और हारमोनियम पर दीपक ने संगत की।

मधुर तान के साथ बिखरे बांसुरी के स्वर

गायन के बाद तेजस-मिताली विंचुरकर ने अपनी संगीत साधना की अमिट छाप छोड़ी। राग चंद्रकौंस से आगाज हुआ। ओठों के स्पर्श से बांसुरी के स्वर मधुरता के साथ सभागार में बिखरे, जिन्हें मिताली ने तबले की तालों से साधा और सुर-ताल का एक युगल सफर सुरीली राहों की ओर बढ़ता गया।

समारोह का यह मध्यांतर था और मेघों ने गर्जना कर अपनी हाजिरी लगाई। शुरुआत में जहां गर्मी और उमस ने सताया तो मध्यांतरण में फुहारों ने मिठासभरी महफिल में ठंडक घोली।

बांसुरी से निकली तान और तबले की तालों ने एक तिलिस्म रचा, जिसने वातावरण को सुरीला बनाया। इधर स्वरों की मिठास बढ़ी उधर वर्षा की फुहारें गिरीं। सुरों की अभिवादन करने पहुंची फुहारों में संगीतप्रेमी भीगते गए और देह को छूकर सुर रूह में उतरते गए।

आंखें मूंदकर हर कोई इन लम्हों को दिलों में संजोता रहा। राग चंद्रकौंस की गंभीरता धीरे-धीरे विलंबित से होकर द्रुत लय तक पहुंची और गत के रूप में एक अनूठी तान विस्तारित हुई।

तबले की तिहाइयों और तिरकिट के सामंजस्य से सुरों से सजी सभा सुरीली होती गई। संगीत मनीषी कुमारजी के नाम से हो रहे संगीत समारोह में उन्हें प्रणाम करते हुए उन्हीं की बंदिश को बांसुरी से श्रोताओं तक पहुंचाया। तीन ताल में निबद्ध इस बंदिश ने कुमारजी की गायकी की झलक भी दिखाई।

सभागार की दहलीज पर दस्तक देते बादलों की पुकार सुन तेजस-मिताली ने अपनी संगीत साधना से सोज की खूबसूरती को मेघों तक पहुंचाया। पहाड़ी धुन सुनाकर सबको बांसुरी-तबले की जुगलबंदी से सभी का मन मोहा।