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देवास में नौ माह की दूधमुंही मासूम को बिलखता छोड़ माता-पिता ने पेड़ पर फांसी लगाकर दे दी जान

भौंरासा थाना क्षेत्र के ग्राम भलाईखुर्द में एक हृदयविदारक घटना सामने आई है। यहां झाबुआ जिले से मजदूरी करने आए एक दंपती ने अज्ञात कारणों के चलते खेत मे...और पढ़ें

By satyendra singh rathoreEdited By: Ramnath Mutkule
Publish Date: Sat, 03 Oct 2026 08:02:47 PM (IST)Updated Date: Sat, 03 Oct 2026 08:02:47 PM (IST)
देवास में नौ माह की दूधमुंही मासूम को बिलखता छोड़ माता-पिता ने पेड़ पर फांसी लगाकर दे दी जान
दंपती ने दे दी जान। (एआई इमेज)

HighLights

  1. बच्ची की सुपुर्दगी लेने के लिए दादा ने जताई सहमति
  2. झाबुआ जिले से मजदूरी करने यहां आए थे
  3. कृषक ने बच्ची को रोते देखा तो स्वजन को सूचना दी

नईदुनिया न्यूज, सोनकच्छ (देवास) : भौंरासा थाना क्षेत्र के ग्राम भलाईखुर्द में एक हृदयविदारक घटना सामने आई है। यहां झाबुआ जिले से मजदूरी करने आए एक दंपती ने अज्ञात कारणों के चलते खेत में लगे नीम के पेड़ पर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।

दोनों अपनी नौ माह की दूधमुंही बच्ची को रोता-बिलखता छोड़ गए। मृतक 25 वर्षीय जवानसिंह पिता धूमा भावर व उसकी पत्नी 23 वर्षीय संगीता दोनों ग्राम धामंदा जिला झाबुआ के निवासी थे। दोनों परिवार के सदस्यों के साथ भलाईखुर्द में थ्रेसर मशीन पर मजदूरी का काम करने आए थे।


खेत के कृषक ने बच्ची को अकेले रोते देखा तो स्वजन को सूचना दी

स्वजन के अनुसार पति-पत्नी दोनों में बेहद प्रेम था। दोनों साथ सोते-उठते, एक ही थाली में खाना खाते और हमेशा हर काम में साथ रहते थे। ऐसे में उन्होंने यह कदम क्यों उठाया यह बड़ा सवाल है। खेत के कृषक ने बच्ची को अकेले रोते देखा तो स्वजन को सूचना दी।

काफी देर तक दंपती नहीं मिले तो तलाश शुरू की गई

स्वजन बच्ची को संभालने पहुंचे तब तक उन्हें माता-पिता के बारे में कुछ पता नहीं था। जब काफी देर तक दंपती नहीं मिले तो तलाश शुरू की गई, दोनों के शव नीम के पेड़ पर लटके मिले। सूचना पर भौंरासा पुलिस मौके पर पहुंची और शवों को सोनकच्छ सिविल अस्पताल भिजवाया। मामले में मर्ग कायम कर पुलिस जांच कर रही है।

बच्ची को रखने के लिए कोई राजी नहीं हो रहा था

स्वजन शाम को चार बजे सिविल अस्पताल सोनकच्छ पहुंचे। समाचार लिखे जाने तक तहसीलदार भौंरासा जागृति जाट उनसे चर्चा कर रही थीं। अस्पताल से प्राप्त जानकारी के अनुसार बच्ची को रखने के लिए कोई राजी नहीं हो रहा था, इस संबंध में समझाइश तहसीलदार द्वारा दी जा रही है।

घर में दादी भी नहीं है

हालांकि इस मामले में तहसीलदार का कहना है कि अंत समय में समझाइश के बाद उसके दादा ने उसको रखने के लिए सहमति प्रदान की है लेकिन घर में दादी नहीं होने के कारण इस विषय में संबंधित विभाग की टीम द्वारा दादा की काउंसलिंग की जाएगी उसके बाद ही निर्णय होगा कि बच्ची को सुपुर्द किया जाए या नहीं।

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