नईदुनिया प्रतिनिधि, देवास। अंचल के खातेगांव थाना क्षेत्र में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां दो लोगों के नाम व पिता के नाम, गांव एक जैसे होने व दोनों पर ही अपराध दर्ज होने से पुलिस को गफलत हुई और ऐसे व्यक्ति को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया जिसने वो अपराध किया ही नहीं था। मामला कई साल पुराना मारपीट का है जिसमें स्थायी वारंट जारी किया गया था। जिसे जेल भेजा गया था वो जमानत पर बाहर आ चुका है और मानवाधिकार आयोग से शिकायत कर कार्रवाई की मांग की गई है।
जानकारी के अनुसार दो मार्च 2018 को रायसिंह पुत्र ईश्वर सिंह राठौर निवासी ग्राम भटासा के द्वारा खातेगांव थाने पर भटासा के ही निवासी मनफूल पुत्र हरि के विरुद्ध मारपीट का प्रकरण दर्ज कराया गया था। खातेगांव पुलिस ने उक्त आरोपित को वर्ष 2018 में गिरफ्तार कर न्यायालय में प्रस्तुत किया था जहां से उसे जमानत दे दी गई थी। जमानत के बाद लगातार पांच वर्षों तक आरोपित फरार रहा और न्यायालय नहीं पहुंचा। इसके बाद न्यायालय ने गिरफ्तारी वारंट जारी करते हुए पुलिस को निर्देश दिया कि आरोपित को गिरफ्तार करके लाया जाए।
तमाम प्रयासों के बाद पुलिस को आरोपी नहीं मिल पाया। करीब 15 दिन पूर्व पुलिस ने मनफूल पुत्र हरि नाम के दूसरे व्यक्ति को गिरफ्तार कर न्यायालय में प्रस्तुत कर दिया और वहां से उसे जेल भेज दिया गया। 15 दिनों बाद बाद वो जमानत पर बाहर आ पाया। अब इस पूरे मामले में पीड़ित मनफूल ने मानव अधिकार आयोग में शिकायत की है। इसके साथ ही अनुसूचित जाति जनजाति आयोग एवं पुलिस महानिदेशक को भी शिकायत की गई है, न्यायालय की शरण लेने की भी तैयारी हो रही है। मामले को लेकर कन्नौद एसडीओपी आदित्य तिवारी ने कहा दोनों व्यक्तियों के नाम, पिता के नाम, गांव एक समान होने के कारण ऐसा हुआ है, इस संबंध में वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराया गया है।
बताया जा रहा है कि स्थायी वारंट तामिल कराने पुलिस टीम ग्राम भटासा पहुंची थी। वहां आरोपित का नाम, पिता का नाम आदि लोगों व कोटवार से पूछा गया। इसके बाद मनफूल को पकड़ा गया, उससे पूछा गया कोई अपराध किया है तो उसने हां कहा। इसके बाद पुलिस गिरफ्तार करके ले गई। बाद में मनफूल के स्वजनों ने फरियादी राय सिंह से संपर्क किया किया कि क्यों गिरफ्तार करवाया तो उसने कहा जिसने मारपीट की वो तो दूसरा मनफूल था। इसके बाद स्वजनों ने न्यायालय के समक्ष आवेदन लगाया फिर जमानत मिली।
देवास अभिभाषक दीपक नाइक ने कहा कि संबंधित प्रकरण में पीड़ित व्यक्ति पुलिस के विरुद्ध कार्रवाई व क्षतिपूर्ति राशि के लिए न्यायालय की शरण ले सकता है। उसे 15 दिनों तक ऐसे अपराध में जेल में रहना पड़ा जो उसने किया ही नहीं था। वहीं देवास एसपी पुनीत गेहलोद का कहना है कि आरोपित व उसके पिता का नाम, गांव एक ही होने व अपराध भी दोनों पर दर्ज होने से ऐसा हुआ है। प्रकरण संज्ञान में आया है, जांच की जाएगी कि कैसे क्या चूक हुई है।