देवास में डोल ग्यारस पर तीनों बार तैरी भगवान नृसिंह की साढ़े सात किलो की पाषाण मूर्ति, साल सुखद रहने का अनुमान
जिला मुख्यालय से 45 किमी दूर हाटपीपल्या में डाेल ग्यारस पर मंगलवार शाम को भगवान नृसिंह की साढ़े सात किलो वजनी पाषाण मूर्ति को नदी में पूजन-अर्चन के बा...और पढ़ें
Publish Date: Tue, 22 Sep 2026 07:11:11 PM (IST)Updated Date: Tue, 22 Sep 2026 07:29:49 PM (IST)
नदी में भगवान नृसिंह की मूर्ति तैराते पुजारी और घाट पर उपस्थित श्रद्धालुओं का हुजुम। (नईदुनिया)HighLights
- हाटपीपल्या मेंं डोल ग्यारस पर हुआ आयोजन
- आयोजन में 30 हजार से अधिक श्रद्धालु हुए शामिल
- मान्यता के अनुसार आने वाला साल सुखद रहेगा
नईदुनिया प्रतिनिधि, देवास : जिला मुख्यालय से 45 किमी दूर हाटपीपल्या में डाेल ग्यारस पर मंगलवार शाम को भगवान नृसिंह की साढ़े सात किलो वजनी पाषाण मूर्ति को भमोरी नदी में पूजन-अर्चन के बाद हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थित में तीन बार तैराया गया। मूर्ति तीनों बार तैरी, उत्साहित भक्तों ने भगवान नृसिंह के जयकारे लगाए।
इस तरह तैरी भगवान नृसिंह की मूर्ति। -नईदुनिया
व्यायामशाला के कलाकारों ने चल समारोह में करतब दिखाए
मान्यता के अनुसार आने वाला साल सुखद रहेगा। दोपहर में नृसिंह मंदिर परिसर में नगर के सभी मंदिरों के डोल एकत्रित हुए और होकर भगवान नृसिंह के डाेल के साथ गाजे-बाजे के साथ चल समारोह शुरू किया गया। विभिन्न व्यायामशाला के कलाकारों ने चल समारोह में करतब दिखाए। कई घंटे तक नगर भ्रमण के बाद चल समारोह नृसिंह घाट भमोरी नदी पर शाम करीब साढ़े पांच बजे पहुंचा।
अपने-अपने मंदिरों के डोल को भमोरी नदी में तैराया गया
यहां नगर के सभी मंदिरों के पुजारियों एवं सेवादारों द्वारा अपने-अपने मंदिरों के डोल को भमोरी नदी में तैराया गया। सभी डोलों के बाद में भगवान नृसिंह के ढोल को भमोरी नदी में झुलाने के बाद भगवान नृसिंह की आरती व पूजन पुजारी द्वारा किया गया। भगवान नृसिंह को पुष्पमाला पहनाई गई। इसके बाद मूर्ति को तैराया गया।
भमोरी नदी का घाट खचाखच भरा रहा
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नदी किनारे घाट पर बड़ी संख्या में बैठे श्रद्धालु। -नईदुनिया
घाट पर मौजूद श्रद्धालुओं के लिए बैठने की व्यवस्था नगर परिषद द्वारा की गई थी। पुलिस-प्रशासन, वन विभाग, बिजली कंपनी के अधिकारियों द्वारा नजर रखी गई। आयोजन में 30 हजार से अधिक भक्तों की सहभागिता रही और भमोरी नदी का घाट खचाखच भरा रहा। व्यवस्था संभालने के लिए हाटपीपल्या के अलावा बागली अनुभाग के कई पुलिस थानों का बल तैनात रहा।
पहली बार 22 वर्षीय पुजारी ने तैराई मूर्ति
नगरवासियों के अनुसार डोल ग्यारस पर भगवान नृसिंह की मूर्ति तैराने की परंपरा 125 साल से भी अधिक पुरानी है। मान्यता है कि तीन बार मूर्ति तैरने पर साल सुखद रहता है, दो बार तैरने पर साल के आठ माह अच्छे रहते हैं और एक बार तैरने पर साल में प्राकृतिक आपदाएं, विपत्तियां आदि आने की आशंका रहती है। मूर्ति तैराने का काम पुजारी वैष्णव परिवार कई पीढ़ी से कर रहा है, इस बार उनके परिवार के 22 वर्षीय अविनय वैष्णव ने मूर्ति तैराई।
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