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देवास पटाखा फैक्ट्री धमाका: जिला अस्पताल में मची चीख-पुकार, 90 प्रतिशत तक झुलसे श्रमिक, 12 घंटे की ड्यूटी और 15 हजार वेतन

टोंककला में पटाखा फैक्ट्री में धमाकों के बाद मची चीख-पुकार के दर्दनाक मंजर का सामना करने के बाद जब कम घायल श्रमिक एम्बुलेंस और डायल 112 की मदद से जिला...और पढ़ें

By satyendra singh rathoreEdited By: ADITYA KUMAR
Publish Date: Thu, 14 May 2026 10:12:33 PM (IST)Updated Date: Thu, 14 May 2026 10:12:33 PM (IST)
देवास पटाखा फैक्ट्री धमाका: जिला अस्पताल में मची चीख-पुकार, 90 प्रतिशत तक झुलसे श्रमिक, 12 घंटे की ड्यूटी और 15 हजार वेतन
आग में झुलसे व्यक्ति को जिला अस्पताल लाया गया।

नईदुनिया प्रतिनिधि, देवास। टोंककला में पटाखा फैक्ट्री में धमाकों के बाद मची चीख-पुकार के दर्दनाक मंजर का सामना करने के बाद जब कम घायल श्रमिक एम्बुलेंस और डायल 112 की मदद से जिला अस्पताल पहुंचे तो अधिकांश बदहवास हालत में थे। इनके साथ एंबुलेंस, डायल-112 वाहनों में अधिक गंभीर घायल, शव भी थे। जैसे ही डॉक्टरों ने जांच करके तीन के मृत होने की पुष्टि की तो उनके साथी फफक पड़े।

एक-दूसरे को संभालते हुए ये कुछ दूर जाकर बैठ गए, स्वास्थ्य कर्मियों को पता चला तो इनके पास पहुंचकर ढांढस बंधाया और जो घायल हैं, उनकी देखभाल की बात कही। बिहार के अररिया जिले के निवासी अंजेश कुमार ने बताया वो एक महीने पहले ही पटाखा फैक्ट्री में काम करने आए हैं। उनके कुछ दोस्त यहां पहले से काम करते थे, उनके माध्यम से यहां पहुंचे थे। एक माह में ही यह हादसा हो गया।


आधे घंटे तक रहा अफरा-तफरी का माहौल

जिला अस्पताल में पहला घायल सुबह 11.25 बजे पहुंचा। इसके पूरे शरीर पर बारूद चिपकी थी हालांकि उसे गंभीर चोट नहीं थी। इसके बाद 11.31 बजे पुलिस वाहन से छह घायल एक साथ लाए गए थे फिर दो-दो मिनट के अंतराल में दो वाहनों से चार घायल लाए गए। 11.41 बजे पहला शव जिला अस्पताल पहुंचा, इसके चार मिनट बाद दूसरा शव लाया गया। 11.52 बजे बड़ी एंबुलेंस से चार घायल व तीसरा शव आया। श्रमिक निक्कू कुमार ने बताया वो पास में ही मशीन पर काम कर रहे थे, अचानक धमाका हो गया, पता ही नहीं चला कैसे क्या हुआ।

मजदूरों की दास्तां... 12 घंटे की ड्यूटी और ठेकेदार का माध्यम

श्रमिक विपिन कुमार ने बताया वो अररिया जिले के पिठौरा निवासी छोटू के माध्यम से फैक्ट्री में काम करने आए थे। यहां 12 घंटे की ड्यूटी करते थे और 15 हजार वेतन मिलता था। जिस समय हादसा हुआ उस समय श्रमिक ही काम कर रहे थे, कंपनी प्रबंधन का कोई भी जिम्मेदार मौजूद नहीं था। धमाके के बाद काफी देर तक एंबुलेंस मौके पर नहीं पहुंची थी।

राहत कार्य में जुटे 110 से ज्यादा स्वास्थ्य व पुलिसकर्मी

हादसे के बाद मौके पर व घायलों को जिला अस्पताल तक लाने में पुलिस के 50 से अधिक अधिकारी व कर्मचारी लगे रहे। आरएमओ डॉ. अजय पटेल ने बताया जिला अस्पताल में 17 डॉक्टरों सहित 60 से अधिक नर्सिंग ऑफिसर, वार्ड बॉय व अन्य सहायकों ने जिम्मेदारी संभाली। सभी घायलों को त्वरित उपचार दिया गया, जिनकी हालत गंभीर थी उनको रेफर करवाया गया।

कई श्रमिक 90 प्रतिशत से ज्यादा झुलसे

उपचार करने वाले डॉक्टरों ने बताया जिन गंभीर मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद रेफर किया गया है, उनमें से कई 90 प्रतिशत से अधिक झुलस चुके थे। कई घायलों की ऊपरी त्वचा पूरी तरह जल गई थी। रेफर हो रहे कुछ मरीजों से अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक जयवीर सिंह भदौरिया ने चर्चा की और उनको ढांढस बंधाया।

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