
नईदुनिया प्रतिनिधि, धार। मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित भोजशाला विवाद में सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद जिला प्रशासन ने शुक्रवार की नमाज के लिए परिसर से लगभग 800 मीटर दूर मालीवाड़ा स्थित चालीस पीर के पास की शासकीय भूमि को वैकल्पिक स्थान के रूप में चिह्नित किया है। प्रशासन का मानना है कि यह स्थान कानून-व्यवस्था, सुरक्षा और आवागमन की दृष्टि से सबसे उपयुक्त है, जबकि मस्जिद पक्ष ने इसे अस्वीकार करते हुए यहां न सिर्फ नमाज पढ़ने से इनकार किया है, बल्कि इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दोबारा जाने की बात कही है।
दरअसल, मस्जिद पक्ष का कहना है कि मालीवाड़ा का यह स्थल भोजशाला से दो किलोमीटर दूर है, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने निकट ही स्थल चयन का आदेश दिया था। ऐसे में, सुप्रीम कोर्ट से अंतिम निर्णय से पहले भोजशाला का विवाद फिलहाल मालीवाड़ा की जमीन पर आकर ठहर गया है। 24 जुलाई को जुमे की नमाज इस स्थान पर हो पाएगी या नहीं, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।
मालीवाड़ा में मौके पर पहुंचने पर स्पष्ट होता है कि चालीस पीर के समीप स्थित यह शासकीय भूखंड एक एकड़ से अधिक क्षेत्र में फैला हुआ है। प्रशासन के आकलन के अनुसार, यहां 1000-1500 लोग एक साथ व्यवस्थित ढंग से नमाज अदा कर सकते हैं। भूमि को समतल बनाने के लिए ऊबड़-खाबड़ हिस्सों पर ईंट और मिट्टी के चूरे का भराव कराया गया है। पूरे परिसर के तीनों ओर बैरिकेडिंग की गई है तथा छोटे पेड़-पौधों की छंटाई के साथ बड़े पेड़ों की सूखी टहनियां हटाई गई हैं।
इस स्थान तक पहुंचने के लिए तीन अलग-अलग मार्ग हैं। एक रास्ता गंजीखाना क्षेत्र से आता है, दूसरा भोजशाला के पीछे बनी सीमेंट सड़क से सीधे जुड़ता है, जबकि तीसरा मार्ग दशहरा मैदान की ओर से चालीस पीर तक पहुंचता है। हालांकि दशहरा मैदान वाला मार्ग अपेक्षाकृत संकरा है, जिसको प्रशासन व्यवस्थित करा रहा है।
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जिला प्रशासन ने पहले मगजपुरा और नौगांव बुजुर्ग क्षेत्र के संभावित स्थलों का भी निरीक्षण किया था, लेकिन यहां पर्याप्त खुला क्षेत्र उपलब्ध नहीं था और आसपास घनी आबादी होने के कारण उन्हें उपयुक्त नहीं माना गया। इसके बाद मालीवाड़ा स्थित चालीस पीर के पास की शासकीय भूमि का चयन किया गया। प्रशासन का तर्क है कि यहां पर्याप्त खुला स्थान है, पास में मुस्लिम समाज का धार्मिक स्थल भी मौजूद है और सुरक्षा की दृष्टि से भी ये अपेक्षाकृत बेहतर विकल्प है।