
नईदुनिया प्रतिनिधि, धार : इंदौर से धार तक रेलगाड़ी पहुंचने की राह में सबसे बड़ी तकनीकी बाधाओं में शामिल टीही टनल का काम पूरा होने के बाद अब रेल संचालन की तैयारियां निर्णायक दौर में पहुंच गई हैं। सोमवार को इंदौर-दाहोद रेल परियोजना के तहत टीही से पीथमपुर की ओर करीब तीन किलोमीटर के हिस्से में ट्रॉयल वैगन का परीक्षण पूरा किया गया।
इसे परियोजना की प्रगति में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। इस परीक्षण के साथ ही धार को इंदौर से रेल मार्ग के जरिए जोड़ने की दिशा में एक और अहम कड़ी आगे बढ़ी है। अब सबकी नजर 29 अक्टूबर को प्रस्तावित रेल सुरक्षा आयुक्त (सीआरएस) के निरीक्षण पर है। हालांकि निरीक्षण की अंतिम तारीख और कार्यक्रम की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।
इंदौर-दाहोद नई रेल लाइन परियोजना में टीही और पीथमपुर के बीच बनी लगभग 2,957 मीटर लंबी सुरंग सबसे महत्वपूर्ण हिस्सों में से एक है। सुरंग के भीतर गिट्टी रहित (बैलास्टलेस) ट्रैक बिछाने का काम पूरा किया जा चुका है। इसके बाद विद्युतीकरण, प्रकाश व्यवस्था और अन्य तकनीकी कार्यों को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया चल रही है।
सोमवार को ट्रायल वैगन के परीक्षण से इस हिस्से में रेल संचालन की तैयारियों को आगे बढ़ाने में मदद मिली है। दरअसल, इंदौर से टीही तक का करीब 21 किलोमीटर रेलखंड पहले ही चालू किया जा चुका है। अब टीही से धार तक लगभग 46 से 47 किलोमीटर के रेलखंड को तैयार करने पर रेलवे का जोर है। इस हिस्से में सुरंग के अलावा पटरी, पुल-पुलिया, विद्युतीकरण, संकेत व्यवस्था और स्टेशनों से जुड़े कार्य पूरे किए जा रहे हैं।
रेल सुरक्षा आयुक्त का निरीक्षण रेलखंड पर यात्री गाड़ियों के संचालन की दिशा में महत्वपूर्ण चरण होता है। इसमें निर्धारित सुरक्षा मानकों और रेल परिचालन से जुड़ी व्यवस्थाओं की जांच की जाती है। टीही से धार तक के रेलखंड के लिए 29 अक्टूबर को निरीक्षण की संभावना जताई जा रही है। यदि निरीक्षण निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार होता है, तो यह धार तक रेल सेवा शुरू करने की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण पड़ाव होगा।
हालांकि यात्री गाड़ियों का नियमित संचालन निरीक्षण, आवश्यक सुरक्षा स्वीकृति और रेलवे की आगे की औपचारिकताओं पर निर्भर करेगा। इंदौर-दाहोद रेल परियोजना का उद्देश्य मध्य प्रदेश को गुजरात से रेल मार्ग के जरिए जोड़ना है। ऐसे में टीही टनल का पूरा होना और ट्रायल वैगन का परीक्षण केवल निर्माण कार्य की प्रगति नहीं, बल्कि धार की रेल कनेक्टिविटी के लंबे इंतजार को आगे बढ़ाने वाला घटनाक्रम है। अब चुनौती शेष तकनीकी कार्यों को पूरा कर सुरक्षा निरीक्षण की प्रक्रिया को सफलतापूर्वक आगे बढ़ाने की है।
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