
नईदुनिया प्रतिनिधि, सुसारी/तलवाड़ा। सरकारी स्कूलों में बेहतर शिक्षा और सुविधाओं के दावों के बीच निसरपुर ब्लॉक के लोहारी शिक्षा संकुल के अंतर्गत आने वाले प्राथमिक विद्यालय टाणा की तस्वीर पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही है। यहां स्कूल का भवन जर्जर होने की वजह से करीब दो साल से बंद पड़ा है।
नया अतिरिक्त कक्ष समय पर नहीं बन सका, जिसके चलते कक्षा पहली से पांचवीं तक के 22 बच्चे मंदिर के महज 8 बाय 8 फीट के बरामदे में बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं। बारिश हो या तेज धूप, बच्चों की पढ़ाई इसी छोटे से स्थान पर चल रही है।
इसी परेशानी से बचाने के लिए बच्चों को चार माह पहले बने शौचालय में बैठाकर पढ़ाने का मामला सामने आया था। यहां तक कि शौचालय में ही स्कूल का कार्यालय भी बना दिया गया था। इस घटना का वीडियो और फोटो वायरल होने के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया और अधिकारी शुक्रवार को मौके पर पहुंचे।
शुक्रवार सुबह 10.30 बजे नईदुनिया की टीम ग्राम चिपराटा स्थित प्राथमिक विद्यालय टाणा पहुंची। वायरल वीडियो में जिस शौचालय में बच्चों को पढ़ाते हुए दिखाया गया था, उसमें ताला लगा हुआ था। पास में ही भीलट मंदिर के 8 बाय 8 फीट के बरामदे में 22 बच्चे पढ़ाई करते हुए मिले। इनमें 11 बालक और 11 बालिकाएं शामिल थीं। छोटे से बरामदे में इतने बच्चों का बैठना बेहद मुश्किल भरा था।
कुछ देर बाद बीईओ निसरपुर और लोहारी संकुल प्रभारी हीरालाल निगवाल और बीआरसी विजय कुमार शुक्ला भी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने शौचालय का ताला खुलवाया तो अंदर का नजारा चौंकाने वाला था। अंदर टेबल-कुर्सियां, पढ़ाई की सामग्री और खेलकूद का सामान रखा हुआ था। यहां तक कि टॉयलेट सीट पर भी किताबें और अन्य सामग्री रखी हुई थी। इससे यह साफ हो गया कि शौचालय का उपयोग स्कूल की गतिविधियों और कार्यालय के रूप में किया जा रहा था।
मौके पर पहुंचे अधिकारियों ने बच्चों के लिए एक निजी मकान में स्कूल संचालित करने की व्यवस्था देखने की कोशिश की, लेकिन ग्रामीणों के विरोध के कारण यह बात आगे नहीं बढ़ सकी। इसके बाद बच्चों को आंगनवाड़ी केंद्र में भेज दिया गया। यहां पहले से ही आंगनवाड़ी के 23 बच्चे मौजूद थे। स्कूल के 22 बच्चों के आने के बाद एक ही कक्ष में कुल 45 बच्चे हो गए। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि इतने छोटे कक्ष में 45 बच्चों की पढ़ाई कितनी प्रभावी हो पाएगी।
विद्यालय के अतिरिक्त कक्ष के निर्माण के लिए आदर्श ग्राम योजना के तहत वर्ष 2023-24 में 7 लाख 93 हजार रुपये स्वीकृत हुए थे। इसकी पहली किस्त भी जारी कर दी गई थी, लेकिन निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया और राशि लैप्स हो गई। अब करीब दो साल बाद ग्राम पंचायत ने 15 अगस्त के बाद निर्माण कार्य शुरू कराया है। पंचायत का कहना है कि नया कक्ष एक से दो माह में तैयार कर दिया जाएगा।
स्कूल परिसर में वर्ष 2023-24 में ही 12 लाख रुपये की लागत से बाउंड्रीवाल भी स्वीकृत की गई थी। पंचायत ने इसका करीब 95 प्रतिशत काम पूरा भी कर दिया है। ऐसे में ग्रामीणों का सवाल है कि जब बच्चों के बैठने के लिए कमरा ही नहीं था, तो प्राथमिकता बाउंड्रीवाल को क्यों दी गई। यदि पहले कक्ष बन जाता तो बच्चों को दो साल तक मंदिर के बरामदे में बैठकर पढ़ाई नहीं करनी पड़ती।
ग्रामीण राधेश्याम मुजाल्दा ने कहा कि पुराना भवन जर्जर होने के कारण दो साल से उपयोग में नहीं है। नया भवन और अतिरिक्त कक्ष समय पर बन जाता तो बच्चों को यह परेशानी नहीं उठानी पड़ती। बारिश और धूप से बच्चों को बचाने के लिए शिक्षक के पास भी कोई दूसरा विकल्प नहीं था। उन्होंने सवाल उठाया कि एक दिन बच्चों को शौचालय में बैठाने पर अधिकारी पहुंच गए, लेकिन दो साल से बच्चे बरामदे में बैठ रहे थे, तब जिम्मेदार कहां थे।
ग्रामीण रणसिंह मुजाल्दा ने कहा कि शासकीय स्कूल में ज्यादातर गरीब परिवारों के बच्चे पढ़ते हैं। लंबे समय से भवन की समस्या के बावजूद निर्माण में देरी हुई। यदि समय पर काम पूरा होता तो आज बच्चों को इस तरह पढ़ने की नौबत नहीं आती।
बीईओ हीरालाल निगवाल ने कहा कि स्कूल भवन जर्जर होने के कारण मंदिर के बरामदे में संचालन किया जा रहा था। बच्चों को शौचालय में केवल एक दिन बैठाया गया था। शौचालय का नियमित उपयोग अभी शुरू नहीं हुआ है और वहां स्कूल का कार्यालय संचालित हो रहा था। मामले में लापरवाही को लेकर शिक्षक को शो-कॉज नोटिस जारी किया जा रहा है। बच्चों की पढ़ाई के लिए वैकल्पिक व्यवस्था भी देखी जा रही है।
बीआरसी विजय कुमार शुक्ला ने बताया कि अतिरिक्त कक्ष का निर्माण शुरू हो चुका है। ग्राम पंचायत ने इसे दो माह में पूरा करने की बात कही है। फिलहाल बच्चों के लिए गांव में वैकल्पिक व्यवस्था की जा रही है और जल्द ही स्कूल संचालन की उचित व्यवस्था कर दी जाएगी।