धार (नईदुनिया प्रतिनिधि)। कोरोना महामारी के बीच हमारे स्वास्थ्य विभाग के कोरोना योद्धा लगातार बिना रुके बिना थके काम कर रहे हैं। तपती गर्मी के बीच पीपीई किट पहन कर काम करना बड़ा ही कठिन होता है। परंतु कोरोना योद्घा पांच से छह घंटे किट पहन कर काम कर रहे हैं। पिछले एक साल से लगातार डाक्टर भाईलाल विंद व उनकी टीम कोरोना मरीजों के सीधे संपर्क में रहते हैं। क्योंकि पाजिटिव की सबसे पहली कड़ी सैंपलिंग ही होती है। डाक्टर विंद लगातार जिला अस्पताल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
डॉ विंद कहना है कि पहले शुरू में जरूर उन्हें डर लगता था। परंतु उन्होंने यह सोचा कि अगर हम डाक्टर होकर ही पीछे हट जाएंगे तो कैसे काम होगा। उनका यह मानना है कि जितनी ज्यादा सैंपलिंग होगी। उतनी जल्दी हम संक्रमण पर काबू कर पाएंगे। हम रोज एक नया सवेरा देखते हैं और कोशिश करते हैं कि हम जल्द ही इस जंग से जीतें।
छह घंटे लगातार बिना पानी के किट में
अप्रैल में सबसे ज्यादा सैंपलिंग भी हुई है। सुबह 10 बजे डा. विंद पीपीई किट पहनने के बाद दोपहर 2 से 2ः30 बजे किट उतारते थे। इस बीच वह पानी भी नहीं पीते थे। जब वह किट उतारते हैं तो पसीने से उनके कपड़े पूरी तरह गीले हो जाते हैं। इस बीच वह 150 से 200 सैंपल एक बार में लेते हैं। मरीज की भीड़ न बढ़े और कोई भी मरीज परेशान नहीं हो इसलिए वह ज्यादा देर तक किट पहनकर काम करते हैं। डा. विंद व उनकी टीम लगातार रात में 10 बजे तक काम करती रहती है। समय-समय पर उनकी टीम को मार्गदर्शन भी मिलता रहता है।
तीन फेस में सैंपलिंग, कई बार मरीज भड़कते
जिला अस्पताल में सैंपलिंग तीन फेस में होती है। इसमें पहले फेस में एंट्री होती है। दूसरे फेस में किट तैयार होती है। इसमें किसी तरह की कोई गलती नहीं हो उसका विशेष ध्यान रखा जाता है। तीसरे फेस में सैंपलिंग होती है। इसमें भी विशेष ध्यान रखा जाता है कि किसी और का सैंपल किसी और की किट में न चले जाए। इसका विशेष ध्यान रखा जाता है। इस वजह से थोड़ा सा समय जरूर लगता है। उस समय कई बार मरीज वहां पर उनसे विवाद की स्थिति भी बना लेते हैं। उस टाइम डा. विंद उन्हें समझाइश देकर समझाते हैं। उन्हें कहते हैं कि यह बड़ा कठिन काम है। हमारी कोशिश होती है कि हम जल्द से जल्द सैंपलिंग करें। आप सभी धैर्य रखें और वह स्थिति को संभाल लेते हैं।
मदद के लिए रहते तैयार
कई बार ऐसे मरीज सामने आ जाते हैं जो सैंपलिंग के नाम से ही घबराते हैं। उस समय डाक्टर विंद व उनकी टीम मरीजों का हौसला बढ़ाती है। कहते हैं कि आप घबराएं नहीं हमारी टीम आपके साथ है। सैंपलिंग तो ठीक है अगर आप पाजिटिव आ जाते हो तो हमारे डाक्टर आपका ध्यान रखेंगे। कई बार तो मरीज को आइसोलेशन में भर्ती भी करवाने जाते है। इनसे अलावा जब कोई उन्हें परेशान होता हुआ दिखाई देता है तो वह सैंपलिंग के बाद हमेशा उसकी मदद के लिए तैयार रहते हैं। कई बार तो आइसीयू में जाकर मरीजों को भी समझाइश देते हैं।
टीम के योद्धा हुए पाजिटिव, शिद्दत से कर रहे काम
डा. विंद की टीम में 10 डाक्टर, स्टाफ नर्स, आपरेटर है। डा. विंद खुद जनवरी में पाजिटिव हो चुके हैं। उसके बाद निगेटिव होकर फिर से मैदान में उतर गए। साथ ही अभी हाल ही में डाक्टर प्रियंका पाजिटिव हो चुकी हैं। परिवार में उनके मम्मी-पापा, भाई-बहन भी पाजिटिव हुए हैं। पर उनका हौसला कमजोर नहीं हुआ उनका कहना है निगेटिव होकर एक बार फिर सैंपलिंग में काम करने आएंगी। अभी पांच दिन पूर्व ही नर्सिंग स्टाफ से अंकिता गिरवाल निगेटिव होकर लौटी हैं।