
नईदुनिया प्रतिनिधि, धार। भोजशाला विवाद में बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तावित सुनवाई नहीं हो सकी, लेकिन धार में दिनभर दो अलग-अलग घटनाक्रम चर्चा में रहे। एक ओर मंदिर पक्ष ने लंदन स्थित ब्रिटिश म्यूजियम से मां वाग्देवी की मूर्ति भारत लाने की दिशा में केंद्र सरकार के प्रयासों का स्वागत करते हुए भोजशाला परिसर के बाहर आतिशबाजी कर मिठाइयां बांटी, वहीं दूसरी ओर जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर एक बार फिर मांग की कि भोजशाला के संरक्षित क्षेत्र से बाहर ही नमाज की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
भोज उत्सव समिति और महाराज भोज सेवा संस्थान समिति के कार्यकर्ताओं ने बुधवार शाम भोजशाला परिसर के बाहर एकत्र होकर उत्सव मनाया। यह उत्साह उस बयान के बाद देखने को मिला, जिसमें भोपाल में केंद्रीय संस्कृति सचिव विवेक अग्रवाल ने बताया था कि भारत सरकार ने ब्रिटेन सरकार और ब्रिटिश म्यूजियम को प्रतिमा की वापसी के लिए औपचारिक पत्र लिखा है। निर्धारित प्रक्रिया के तहत पिछले लगभग एक वर्ष से प्रयास जारी हैं। उन्होंने यह भी बताया कि वर्ष 2014 के बाद भारत विदेश से 650 से अधिक प्राचीन धरोहरें वापस ला चुका है।
उधर, महाराज भोज सेवा संस्थान समिति ने अनुभागीय अधिकारी (राजस्व) के माध्यम से जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर मांग की कि भोजशाला परिसर के संरक्षित क्षेत्र के बाहर ही नमाज की व्यवस्था की जाए। समिति ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के नियमों का हवाला देते हुए कहा कि किसी संरक्षित स्मारक के चारों ओर 300 मीटर संरक्षित क्षेत्र निर्धारित होता है। बता दें, सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश के तहत बीते शुक्रवार को भोजशाला से ठीक पीछे खसरा नंबर 612 में नमाज पढ़वाई गई थी।
भोजशाला विवाद में मस्जिद पक्ष की अंतरिम याचिका पर छह अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हो सकती है। इस दिन यह मामला सूचीबद्ध है। कोर्ट के अगले निर्देश पर ही यह स्पष्ट होगा कि सात अगस्त (शुक्रवार) को नमाज की व्यवस्था वर्तमान स्वरूप में रहेगी या उसमें कोई बदलाव होगा।
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