
नईदुनिया प्रतिनिधि, धार। भोजशाला विवाद में सुप्रीम कोर्ट द्वारा मस्जिद पक्ष के लिए अंतरिम रूप से अलग स्थान पर नमाज की व्यवस्था करने के निर्देश के बाद अब सबसे बड़ी चर्चा वैकल्पिक स्थान को लेकर शुरू हो गई है। जिला प्रशासन ने अभी स्थान चयन की प्रक्रिया शुरू नहीं की है, लेकिन मंदिर पक्ष ने अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा है कि भोजशाला के 300 मीटर के संरक्षित दायरे के भीतर नमाज की व्यवस्था स्वीकार नहीं होगी। इस सीमा के बाहर उपयुक्त भूमि या स्थान उपलब्ध कराए जाने पर कोई आपत्ति नहीं है।
उधर, जिला प्रशासन का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश की प्रमाणित प्रति मिलने और उसके अध्ययन के बाद ही आगे की कार्रवाई शुरू की जाएगी। बता दें, सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को अंतरिम आदेश में मस्जिद को परिसर के पास शुक्रवार की नमाज के लिए वैकल्पिक खुली जगह देने को कहा था।
भोजशाला मुक्ति यज्ञ के संयोजक गोपाल शर्मा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के निर्णय पर रोक नहीं लगाई है। भोजशाला का 300 मीटर का संरक्षित क्षेत्र है और यदि इस सीमा के बाहर मुस्लिम समाज को भूमि उपलब्ध कराई जाती है तो मंदिर पक्ष को कोई आपत्ति नहीं होगी। गोपाल शर्मा ने सुझाव देते हुए बताया कि वर्ष 1938 में तत्कालीन शासक ने नमाज के लिए वैकल्पिक भूमि उपलब्ध कराई थी, जिस पर बाद में रहमत मस्जिद का निर्माण हुआ इसलिए आज भी भूमि का अभाव नहीं है।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, आदेश की प्रति मिलने के बाद राजस्व, पुलिस और अन्य विभागों की संयुक्त टीम भोजशाला और आसपास के क्षेत्र का निरीक्षण करेगी। इसके बाद ही यह तय होगा कि कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप नमाज के लिए कौन-सा स्थान उपयुक्त रहेगा। किसी भी अधिकारी ने इस संबंध में आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है।
आदेश के अध्ययन के बाद बनेगी रणनीति: मुस्लिम पक्ष शहर काजी वकार सादिक ने कहा कि आदेश की प्रमाणित प्रति मिलने के बाद मस्जिद कमेटी, वरिष्ठ समाजजन और शुक्रवार की नमाज अदा करने वाले लोगों की बैठक होगी। आदेश का अध्ययन करने के बाद प्रशासन से चर्चा कर रणनीति तय की जाएगी।
राजस्व अभिलेखों के अनुसार, भोजशाला के आसपास लगभग 13 बीघा भूमि मस्जिद पक्ष की संस्थाओं के नाम दर्ज बताई जा रही है। दावा है कि इनमें उर्स कमेटी और बाबा कमाल मौला से संबंधित भूमि भी शामिल है। ऐसे में यह चर्चा भी शुरू हो गई है कि क्या प्रशासन इसी भूमि को संभावित विकल्प के रूप में देखेगा या किसी अन्य जमीन की तलाश करेगा।
नौ नवंबर, 2019 को सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या विवाद में अंतिम फैसला सुनाते हुए मंदिर निर्माण के साथ सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को मस्जिद के लिए पांच एकड़ वैकल्पिक भूमि देने का निर्देश दिया था। इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने धन्नीपुर गांव में पांच एकड़ भूमि आवंटित की। भोजशाला मामला अलग है। यहां सुप्रीम कोर्ट ने अंतिम फैसला नहीं दिया है। मामला अभी विचाराधीन है।
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हम सुप्रीम कोर्ट के निर्णय से संतुष्ट हैं। हमारी ओर से अधिवक्ताओं ने कोर्ट में मजबूत और प्रभावी पक्ष रखा। आदेश अनुसार हमें नमाज के लिए स्थान उपलब्ध कराया जाना चाहिए। - अब्दुल समद, सदर, कमाल मौला वेलफेयर सोसाइटी, धार