
नईदुनिया प्रतिनिधि, धार। मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित भोजशाला के विवाद की कानूनी लड़ाई अब ऐसे मुकाम पर पहुंच गई है, जहां अगली सुनवाई इस मामले की आगे की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण साबित हो सकेगी।
सुप्रीम कोर्ट के गत 14 जुलाई के अंतरिम आदेश के अनुपालन में जिला प्रशासन ने प्रत्येक शुक्रवार की नमाज के लिए भोजशाला परिसर के निकट एक वैकल्पिक खुले स्थान का चयन कर दिया है, लेकिन मस्जिद पक्ष इस व्यवस्था से सहमत नहीं है और उसने इसे अदालत की मंशा के अनुरूप नहीं बताया है। ऐसे में अब पांच अगस्त को होने वाली सुनवाई पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।
आगामी सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट यह देखेगा कि प्रशासन ने उसके अंतरिम आदेश की भावना और शब्दों के अनुरूप अनुपालन किया है या नहीं। मस्जिद पक्ष की आपत्ति पर यह देखा जाएगा कि नमाज के लिए चिह्नित स्थान वास्तव में भोजशाला परिसर के ‘निकट’ और ‘पृथक खुले स्थान’ की शर्तों को पूरा करता है या नहीं। विधि विशेषज्ञ मनीष यादव का कहना है कि अंतिम निर्णय पूरी तरह न्यायालय के समक्ष उपलब्ध तथ्यों और कानूनी पहलुओं पर निर्भर करेगा।
उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने अंतरिम आदेश में भोजशाला के निकट किसी स्थान का चयन कर अगले आदेश तक के लिए प्रत्येक शुक्रवार को नमाज की वैकल्पिक व्यवस्था कराने के आदेश दिए थे। इसके अनुपालन में करीब 800 मीटर दूर ऐसा स्थल प्रशासन ने चयनित किया, जिसे दूर बताते हुए मुस्लिम पक्ष ने अस्वीकार कर दिया।
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मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) की सर्वे रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों पर विचार करते हुए भोजशाला को वाग्देवी का मंदिर माना है। हाई कोर्ट के आदेश के बाद से यहां नियमित पूजा की व्यवस्था जारी है। हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए मस्जिद पक्ष सुप्रीम कोर्ट पहुंचा और नमाज की व्यवस्था बहाल करने की मांग की थी। सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश पर तत्काल रोक लगाने से इन्कार कर दिया, लेकिन यह भी माना कि नमाज से जुड़े मुद्दे पर अंतरिम व्यवस्था आवश्यक है।