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धार में सात साल तक दबाए रखी खात्मा रिपोर्ट, कोर्ट ने पुलिस विवेचना पर उठाए सवाल

वर्ष 2017 के लूट और डकैती के गंभीर मामले में धरमपुरी न्यायालय ने पुलिस की विवेचना पर गंभीर सवाल उठाते हुए खात्मा प्रतिवेदन खारिज कर दिया है। न्यायिक म...और पढ़ें

By PremVijay PatilEdited By: Ramnath Mutkule
Publish Date: Sat, 10 Oct 2026 11:04:13 AM (IST)Updated Date: Sat, 10 Oct 2026 11:04:13 AM (IST)
धार में सात साल तक दबाए रखी खात्मा रिपोर्ट, कोर्ट ने पुलिस विवेचना पर उठाए सवाल
कोर्ट ने लगाई फटकार। -प्रतीकात्मक तस्वीर

HighLights

  1. लूट-डकैती के मामले में खात्मा प्रतिवेदन खारिज
  2. तत्कालीन टीआई और विवेचक पर कार्रवाई के निर्देश
  3. 15 दिन में नई विवेचना, एक माह में कार्रवाई के निर्देश

नईदुनिया प्रतिनिधि, धरमपुरी (धार)। वर्ष 2017 के लूट और डकैती के गंभीर मामले में धरमपुरी न्यायालय ने पुलिस की विवेचना पर गंभीर सवाल उठाते हुए खात्मा प्रतिवेदन खारिज कर दिया है।

न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी विवेक जैन की अदालत ने तत्कालीन थाना प्रभारी निरीक्षक कुशल सिंह रावत और विवेचक सहायक उपनिरीक्षक प्रकाश सरोदे की भूमिका पर सख्त टिप्पणी की। न्यायालय ने दोनों के विरुद्ध विभागीय एवं वैधानिक कार्रवाई के लिए पुलिस अधीक्षक धार को निर्देश दिए हैं।

मामला ग्राम टवलई निवासी शंकरलाल जायसवाल के घर में हुई लूट का है। 16 दिसंबर 2017 की रात 10 से 12 अज्ञात बदमाशों ने घर में घुसकर मारपीट की थी। बदमाश अलमारी तोड़कर नकदी, सोने-चांदी के आभूषण और मोबाइल लूट ले गए थे। इसके बावजूद पुलिस ने प्राथमिकी में लूट या डकैती की धाराएं लगाने के बजाय केवल गृहभेदन से संबंधित धारा 459 के तहत प्रकरण दर्ज किया। पुलिस ने तीन महीने के भीतर 31 मार्च 2018 को खात्मा प्रतिवेदन तैयार कर लिया, लेकिन इसे न्यायालय में पेश करने में करीब सात वर्ष लगा दिए। यह प्रतिवेदन 26 अप्रैल 2025 को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया।


महत्वपूर्ण साक्ष्यों की अनदेखी पर सवाल

22 सितंबर 2026 को पारित आदेश में न्यायालय ने प्रकरण की विवेचना को गंभीर रूप से त्रुटिपूर्ण बताते हुए इसे पुलिस विभाग के लिए 'कलंक कथा' के समान बताया। न्यायालय में पूछताछ के दौरान तत्कालीन टीआई और विवेचक ने स्वीकार किया कि पीड़ित की पत्नी के बयान दर्ज नहीं किए गए। डॉक्टरों की सलाह के बावजूद एक्स-रे नहीं कराए गए और लूटे गए मोबाइल फोन को ट्रेस करने के लिए कोई लिखित पत्राचार भी नहीं किया गया।

न्यायालय ने विवेचना में इन कमियों को गंभीर मानते हुए आशंका जताई कि आरोपितों को बचाने और साक्ष्यों को नष्ट करने की नीयत से अपराध की धाराओं को कम किया गया।

15 दिन में नई विवेचना, एक माह में कार्रवाई के निर्देश

न्यायालय ने खात्मा प्रतिवेदन अस्वीकार करते हुए वर्तमान थाना प्रभारी को 15 दिनों के भीतर नया विवेचक नियुक्त कर अग्रिम विवेचना शुरू कराने के निर्देश दिए हैं। साथ ही प्रत्येक 30 दिनों में प्रगति रिपोर्ट न्यायालय में प्रस्तुत करने को कहा है। पुलिस अधीक्षक धार को भी निर्देशित किया गया है कि संबंधित पुलिस अधिकारियों के विरुद्ध एक माह के भीतर कार्रवाई कर न्यायालय को अवगत कराएं।

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