
नईदुनिया प्रतिनिधि, धार। धार भोजशाला मामले में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ में चल रही सुनवाई अब ऐसे दौर में पहुंचती दिखाई दे रही है, जहां से किसी महत्वपूर्ण दिशा की उम्मीद जताई जा रही है। मंदिर पक्ष द्वारा भोजशाला में 24 घंटे पूजा-अर्चना की अनुमति देने की मांग रखे जाने के बाद शहर सहित आसपास के क्षेत्रों में हिंदू समाज के बीच उत्साह का माहौल बन गया है।
भोज उत्सव समिति और विभिन्न हिंदू संगठनों से जुड़े लोग इसे धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक पहचान से जुड़े लंबे संघर्ष के अहम पड़ाव के रूप में देख रहे हैं। मंदिर पक्ष की ओर से हाई कोर्ट में कहा गया है कि भोजशाला मूल रूप से मां वाग्देवी का मंदिर है और हिंदू समाज को यहां पूरे समय पूजा-अर्चना का अधिकार मिलना चाहिए।
कई लोग मान रहे हैं कि वर्तमान सुनवाई निर्णायक मोड़ की ओर बढ़ रही है। भोज उत्सव समिति के संरक्षक अशोक जैन ने कहा कि वर्षों से हिंदू समाज भोजशाला को मां वाग्देवी की तपोभूमि और मंदिर के रूप में मानता आया है। उनका कहना है कि हाई कोर्ट में मंदिर पक्ष द्वारा रखे गए ऐतिहासिक, धार्मिक और पुरातात्विक तथ्यों ने लोगों की उम्मीदों को और मजबूत किया है।
सामाजिक कार्यकर्ता विश्वास पांडे ने कहा कि भोजशाला केवल धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और परंपरा का प्रतीक भी है। वहीं याचिकाकर्ता आशीष गोयल ने कहा कि यदि अदालत मंदिर पक्ष की मांग स्वीकार करती है तो यह हिंदू समाज के लिए बड़ी उपलब्धि होगी। स्थानीय लोगों के अनुसार, सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की ओर से रखे जा रहे तर्कों के कारण सभी की निगाहें हाई कोर्ट की आगामी सुनवाई पर टिकी हुई हैं।