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धार: नर्मदा किनारे इंसानों का दखल बढ़ा, तो वन्य जीवों ने भी बदल लिया अपना रास्ता

नर्मदा पट्टी क्षेत्र में फिर तेंदुए की आहट ने किसानों और ग्रामीणों में दहशत का माहौल बना दिया है। कृषि कार्य कर रहे किसान के ट्रैक्टर के सामने अचानक त...और पढ़ें

By Rais MohammadEdited By: Ramnath Mutkule
Publish Date: Sun, 10 May 2026 11:32:38 AM (IST)Updated Date: Sun, 10 May 2026 11:32:38 AM (IST)
धार: नर्मदा किनारे इंसानों का दखल बढ़ा, तो वन्य जीवों ने भी बदल लिया अपना रास्ता
निसरपुर क्षेत्र में लगातार चल रहा है तेंदुए का मूवमेंट। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. खेत पर दिखे तेंदुए के पगमार्क, वन विभाग ने शुरू की सर्चिंग; बैकवाटर को माना जा रहा बड़ी वजह
  2. जंगल-गुफाएं बैकवाटर में जलमग्न, बस्तियों का रुख कर रहे जंगली जानवर
  3. इसे बदलते पर्यावरणीय संतुलन के लिए बड़ी चेतावनी मानी जा रही है

नईदुनिया न्यूज, निसरपुर (धार)। नर्मदा किनारे इंसानों की दखल बढ़ी, तो वन्य जीवों ने भी बदल लिया रास्ता। जिन जंगलों, गुफाओं और कंदराओं में कभी तेंदुओं का सुरक्षित बसेरा हुआ करता था, वहां अब सरदार सरोवर बांध के बैकवाटर का स्थायी भराव होने लगा है। ऐसे में अपने प्राकृतिक आश्रय स्थल डूबने के बाद वन्य जीव अब गांवों, खेतों और मानव बस्तियों की ओर रुख कर रहे हैं। निसरपुर क्षेत्र के ग्राम करौंदिया में किसान के ट्रैक्टर के सामने तेंदुए के आने की घटना इसी बदलते पर्यावरणीय संतुलन की बड़ी चेतावनी मानी जा रही है।

नर्मदा पट्टी क्षेत्र में एक बार फिर तेंदुए की आहट ने किसानों और ग्रामीणों में दहशत का माहौल बना दिया है। गुरुवार रात ग्राम करौंदिया में खेत पर कृषि कार्य कर रहे किसान के ट्रैक्टर के सामने अचानक तेंदुआ दिखाई दिया। किसान ने इसका वीडियो भी बनाया, जो क्षेत्र में तेजी से चर्चा का विषय बना हुआ है।


घटना के बाद नईदुनिया में प्रसारित समाचार के बाद वन विभाग सक्रिय हुआ। कुक्षी वन परिक्षेत्र के वनरक्षक राकेश तवर और वन्य जीव प्रेमी कपिल गोस्वामी ने शनिवार को मौके पर पहुंचकर खेत और आसपास के क्षेत्र में तेंदुए के पगमार्क तलाशे। खेत के आसपास पगमार्क मिलने के बाद वन विभाग ने क्षेत्र में सर्चिंग अभियान शुरू किया है।

नर्मदा पट्टी में बढ़ रही तेंदुओं की मूवमेंट

वन विभाग के अनुसार सरदार सरोवर बांध का बैकवाटर इस समय लगभग 130 मीटर के उच्च स्तर पर बना हुआ है। यह सामान्य वर्षों की तुलना में करीब छह से आठ मीटर अधिक बताया जा रहा है। हर वर्ष अक्टूबर से मार्च तक ही नर्मदा किनारे तेंदुओं की हलचल दिखाई देती थी, लेकिन इस बार मई तक उनकी मौजूदगी बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि बैकवाटर कम नहीं होने से नर्मदा किनारे स्थित गुफाएं, कंदराएं और वन क्षेत्र लगातार जलमग्न हैं। यही कारण है कि तेंदुए अब सुरक्षित ठिकानों की तलाश में खेतों और गांवों के आसपास दिखाई देने लगे हैं।

10 साल में पांच तेंदुए और तीन शावक पकड़े गए

कुक्षी वन विभाग परिक्षेत्र में बीते 10 वर्षों के दौरान पांच तेंदुओं को पिंजरे में पकड़ने की कार्रवाई की जा चुकी है। इनमें से चार तेंदुए नर्मदा पट्टी क्षेत्र से पकड़े गए थे। इसके अलावा तीन शावकों का भी रेस्क्यू किया गया, जिनमें दो नर्मदा पट्टी क्षेत्र में मिले थे। वन विभाग के रिकार्ड के अनुसार कड़माल गांव के समीप एक मादा तेंदुए की हाईटेंशन लाइन की चपेट में आने से मौत भी हो चुकी है। वहीं अब तक नर्मदा पट्टी क्षेत्र में तेंदुओं ने मुख्य रूप से मवेशियों और बकरियों को ही शिकार बनाया है। हालांकि कड़माल क्षेत्र में एक दंपती पर हमले की घटना भी सामने आ चुकी है।

सोनगांव में लगाया पिंजरा, अब नर्मदा पट्टी में भी तैयारी

वन विभाग ने फिलहाल लोहारी के पास सोनगांव क्षेत्र में तेंदुए की निगरानी के लिए एक पिंजरा लगाया हुआ है। अधिकारियों का कहना है कि तेंदुए की बढ़ती मूवमेंट को देखते हुए जल्द ही नर्मदा पट्टी क्षेत्र में भी दूसरा पिंजरा लगाया जाएगा, ताकि किसी अप्रिय घटना को रोका जा सके। वन विभाग ग्रामीणों से सतर्क रहने की अपील कर रहा है। खेतों में रात के समय अकेले नहीं जाने, बच्चों और पशुओं को सुरक्षित रखने तथा किसी भी वन्य जीव की गतिविधि दिखाई देने पर तुरंत सूचना देने को कहा गया है।

विकास और वन्य जीवन के बीच संतुलन की जरूरत

नर्मदा पट्टी क्षेत्र में लगातार बढ़ती तेंदुओं की मौजूदगी केवल वन विभाग के लिए चुनौती नहीं, बल्कि मानव और प्रकृति के बीच बिगड़ते संतुलन की भी कहानी कह रही है। जिस तरह बांध परियोजनाओं और जलभराव ने वन्य जीवों के प्राकृतिक आवासों को प्रभावित किया है, उसका असर अब सीधे ग्रामीण क्षेत्रों में दिखाई देने लगा है। विशेषज्ञ और वन्य जीव प्रेमियों का कहना है कि यदि वन्य जीवों के सुरक्षित कारिडोर और प्राकृतिक आवासों को संरक्षित नहीं किया गया, तो आगामी समय में मानव और वन्य जीवों के बीच संघर्ष की घटनाएं और बढ़ सकती हैं।

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