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धार-छोटा उदयपुर रेल परियोजना : 18 साल पहले 608 करोड़ थी लागत, अब सिर्फ 45.71 किमी पर ही लगेंगे 3100 करोड़

Railway : सरकारी परियोजनाओं में देरी केवल समय नहीं खाती, वह परियोजना की आर्थिक तस्वीर भी बदल देती है। छोटा उदयपुर–धार और इंदौर–दाहोद रेल परियोजनाएं इस...और पढ़ें

By PremVijay PatilEdited By: Ramnath Mutkule
Publish Date: Thu, 24 Sep 2026 06:03:58 PM (IST)Updated Date: Thu, 24 Sep 2026 06:04:22 PM (IST)
धार-छोटा उदयपुर रेल परियोजना : 18 साल पहले 608 करोड़ थी लागत, अब सिर्फ 45.71 किमी पर ही लगेंगे 3100 करोड़
धार जिले के टांडा रोड रेलवे स्टेशन से रेल का संचालन हो रहा है। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. 2008 में छोटा उदयपुर–धार की लागत 608 करोड़ थी
  2. इंदौर–दाहोद 678.56 करोड़ रुपये थी लागत
  3. अब टांडा रोड से तिरला तक की 3100 करोड़ लागत

प्रेमविजय पाटिल, नईदुनिया, धार : सरकारी परियोजनाओं में देरी केवल समय नहीं खाती, वह परियोजना की आर्थिक तस्वीर भी बदल देती है। छोटा उदयपुर–धार और इंदौर–दाहोद रेल परियोजनाएं इसका एक बड़ा उदाहरण बनकर सामने हैं।

8 फरवरी 2008 को जिन दो रेल परियोजनाओं का शिलान्यास हुआ था, उनकी शुरुआती लागत क्रमशः करीब 608.25 करोड़ और 678.5 करोड़ रुपये थी। यानी दोनों परियोजनाओं की संयुक्त प्रारंभिक लागत करीब 1286.75 करोड़ रुपये थी। उस समय इनसे क्रमशः 157 और करीब 200 किलोमीटर रेल संपर्क विकसित करने की योजना थी।

करीब 18 वर्ष आठ माह बाद तस्वीर यह है कि छोटा उदयपुर–धार परियोजना के धार की दिशा वाले हिस्से में टांडा रोड से आगे 45.71 किलोमीटर के दो निर्माण पैकेज के लिए ही पश्चिम रेलवे ने करीब 3100 करोड़ रुपये के टेंडर आमंत्रित किए हैं।


टांडा रोड–जामनिया 24.63 किमी पैकेज की अनुमानित लागत 1829.95 करोड़ रुपये है, जबकि जामनिया–तिरला 21.08 किमी पैकेज की लागत 1267.65 करोड़ रुपये है। दोनों टेंडर 31 अगस्त 2026 को जारी किए गए और निविदा जमा करने की अंतिम तारीख 9 अक्टूबर 2026 है। यानी 2008 में दोनों परियोजनाओं की पूरी घोषित लागत जितनी थी, उससे करीब ढाई गुना राशि अब केवल छोटा उदयपुर–धार के 45.71 किलोमीटर के इस चरण के टेंडर में सामने आ रही है।

45.71 किमी के लिए 3097.60 करोड़

  • टांडा रोड से जामनिया तक 24.63 किलोमीटर में फार्मेशन, वायाडक्ट, बड़े और छोटे पुल, आरयूबी, सबवे, स्टेशन भवन, स्टाफ क्वार्टर, प्लेटफार्म, यात्री सुविधाएं, ट्रैक लिंकिंग और पी-वे कार्य के साथ 25 केवी एसी ओएचई तथा दूरसंचार व्यवस्था विकसित की जाएगी। अकेले इस पैकेज की अनुमानित लागत 1829.95 करोड़ रुपये है।

  • इसके आगे जामनिया से तिरला तक 21.08 किलोमीटर के लिए 1267.65 करोड़ रुपये का पैकेज है। इसमें भी रेल लाइन निर्माण के साथ पुल, वायाडक्ट, आरयूबी, सबवे, स्टेशन संबंधी कार्य, प्लेटफार्म, यात्री सुविधाएं, ट्रैक तथा विद्युतीकरण और संचार से जुड़े कार्य शामिल हैं।
  • दोनों पैकेज मिलाकर औसतन लगभग 67.8 करोड़ रुपये प्रति किलोमीटर का अनुमान बैठता है। इसके विपरीत 2008 में छोटा उदयपुर–धार और इंदौर–दाहोद की संयुक्त प्रारंभिक लागत तथा घोषित लंबाई के आधार पर औसत लागत लगभग 3.6 करोड़ रुपये प्रति किलोमीटर के आसपास बैठती थी।
  • सवाल सिर्फ रेल लाइन का नहीं, 18 साल के अवसर का है

    रेल परियोजना समय पर पूरी होती तो उसका लाभ केवल रेल सेवा शुरू होने तक सीमित नहीं रहता। नई रेल लाइन के साथ स्टेशन, बाजार, परिवहन, कृषि उपज की आवाजाही, औद्योगिक निवेश, रोजगार, पर्यटन और आदिवासी क्षेत्रों की कनेक्टिविटी जैसे अनेक आर्थिक अवसर पैदा होते हैं। परियोजना जितनी लंबी अवधि तक अधूरी रहती है, उतनी ही अवधि तक इन संभावित लाभों का इंतजार भी बढ़ता है।

    अब चुनौती सिर्फ टेंडर की नहीं, समय पर निर्माण की है

    अब जब 45.71 किलोमीटर के लिए 3100 करोड़ रुपये के काम निविदा प्रक्रिया में हैं, सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस बार निर्माण कितनी तेजी से जमीन पर उतरता है और तय समयसीमा में पूरा होता है या नहीं। क्योंकि 2008 से 2026 तक का अनुभव यही बताता है कि सरकारी परियोजना में समय की कीमत भी रुपये में चुकानी पड़ती है।

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