Digthan Wali Mata: दिग्ठान (धार)। मालवा की वैष्णोदेवी दिग्ठान वाली माता के नाम से प्रसिद्ध हैं। माता मंदिर में एक विशाल पाषण पर महाकाली, महालक्ष्मी व महासरस्वती की मूर्तियां शेषनाग पर विराजित हैं। मूर्तियां दिन में तीन रूप बदलती हैं, जो अद्वितीय हैं। सुबह के समय माता का रूप बाल्यावस्था में, दोपहर में युवावस्था तथा शाम को वृद्धावस्था के रूप में प्रतीत होती हैं। इसके अलावा मंदिर में गणेश, भोलेनाथ, नंदीगण, शीतला माता, लाल भैरव, काल भैरव, बटुक भैरव, त्रिशूल भी स्थापित हैं।
मंदिर निर्माण कार्य प्रगति पर
मंदिर निर्माण समिति के सक्रिय सदस्य विनीत मंडलोई ने बताया कि भव्य मंदिर का निर्माण कार्य प्रगति पर है। शिखर का कार्य पूर्ण हो चुका है। सभा मंडप का कार्य जारी है। मंदिर का निर्माण कार्य लगभग 70 फीसद पूर्ण हो चुका है। माता का रोजाना आकर्षक श्रृंगार किया जाता है। मंदिर निर्माण समिति आयोजन संबंधित सारी व्यवस्था देखती है। नवरात्र में यहां सप्तशती पाठ होता है।
इतिहास
माता के दर्शनार्थ भक्त दूर-दूर से आते हैं। नवरात्र में माता भक्तों की भीड़ उमड़ती हैं। मंदिर के इतिहास के बारे में बताया जाता है कि दिग्ठान के समीप स्थित दांगुल नदी पर धोबी कपड़े धोया करते थे। एक दिन माता ने एक धोबी को स्वप्न में दर्शन देकर बताया कि मैं किनारे पर पड़ी शिला पर विराजित हूं। धोबी ने यह बात गांव के जागीरदार को बताई। जागीरदार ने लोगों के साथ शिला को निकाला, तो तीनों देवियां एक साथ शिला पर विराजित थीं। माता को वहां से नगर ले जाने लगे, लेकिन एक स्थान पर आकर माता आगे नहीं गईं। इस पर सभी ने तय किया कि यहीं पर माता की स्थापना कर मंदिर बना दिया जाए। तब से लेकर अब तक माता वहीं विराजमान हैं। मंदिर के पुजारी जितेंद्र जोशी हैं।