
प्रेमविजय पाटिल, नईदुनिया, धार : धार तक ट्रेन पहुंचने की तैयारी अब उस पड़ाव पर आ गई है, जहां हर छोटी तकनीकी कमी को दूर करना जरूरी है। सोमवार को पश्चिम रेलवे के मुख्य अभियंता (निर्माण) धीरज कुमार ने टीही से धार तक करीब चार घंटे ट्रॉली से रेल लाइन का निरीक्षण किया। सुबह 11:30 बजे शुरु हुआ निरीक्षण शाम 3:30 बजे तक चला।
इस दौरान ट्रैक से लेकर पुल-पुलिया, स्टेशन, सिग्नलिंग और विद्युतीकरण सहित पूरी व्यवस्था को मौके पर परखा गया। अब रेलवे का ध्यान बचे हुए काम तेजी से पूरा करने पर है। सबसे बड़ी बात ये है कि 29 और 30 अक्टूबर को धार-इंदौर रेलखंड की सीआरएस प्रक्रिया कराने की तैयारी है।
सीआरएस यानी कमिश्नर आफ रेलवे सेफ्टी की जांच में रेल संचालन से जुड़े सुरक्षा मानकों को परखा जाएगा। सब कुछ तय मानकों के अनुरुप मिला और स्वीकृति मिल गई तो धार से इंदौर के बीच यात्री ट्रेन चलने की दिशा में बड़ा कदम आगे बढ़ जाएगा।
प्रस्तावित कार्यक्रम के तहत वरिष्ठ रेलवे अधिकारियों को पूरे रेलखंड का निरीक्षण करना था। प्रमुख अधिकारी के अचानक बाहर जाने के कारण मुख्य अभियंता धीरज कुमार सहित अन्य अधिकारियों ने निरीक्षण पूरा किया। अधिकारियों ने जगह-जगह रुककर ट्रैक, पुल-पुलियों और स्टेशन से जुड़े काम देखे। सिग्नलिंग, विद्युतीकरण और अन्य तकनीकी व्यवस्थाओं की भी जानकारी ली गई। जहां अंतिम स्तर के काम बाकी मिले, वहां उन्हें जल्द पूरा करने के निर्देश दिए गए। मौके पर निर्माण एजेंसियों के ठेकेदारों और मैदानी अधिकारियों से भी चर्चा हुई।
धार तक रेल लाइन पहुंचने के बाद इसका परीक्षण भी हो चुका है। मार्च 2026 में पीथमपुर-धार के करीब 38.26 किमी हिस्से पर टावर वैगन से ट्रैक की जांच की गई थी। करीब 50 किमी प्रति घंटा की गति तक ट्रायल कर ट्रैक, घुमाव, संरचनात्मक मजबूती और सिग्नलिंग व्यवस्था देखी गई थी। अब अगली और अहम सीढ़ी सीआरएस है। इसलिए सोमवार का निरीक्षण सामान्य जांच से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण माना जा रहा है। रेलवे यह सुनिश्चित करना चाहता है कि सुरक्षा जांच के समय कोई बड़ा काम अधूरा न रहे।
धार स्टेशन पर भवन, प्लेटफार्म और यात्री सुविधाओं से जुड़े काम तेजी से पूरे किए जा रहे हैं। पीथमपुर, सागौर और गुणावद स्टेशन पर भी अलग-अलग काम चल रहे हैं। रेलवे का जोर अब बड़े निर्माण के बजाय उन कामों को पूरा करने पर है, जो ट्रेन संचालन शुरु करने से पहले जरुरी हैं।
इंदौर-दाहोद रेल परियोजना करीब 204.76 किमी लंबी है। परियोजना को वित्तीय वर्ष 2007-08 में मंजूरी मिली थी। इंदौर-राऊ और राऊ-टीही का करीब 21 किमी हिस्सा पहले ही चालू हो चुका है। अब पीथमपुर से धार तक रेल संपर्क तैयार होने से धार को इंदौर के रेल नेटवर्क से सीधा जुड़ाव मिलेगा। आगे ये रेल लाइन सरदारपुर, झाबुआ होते हुए गुजरात के दाहोद तक जाएगी। परियोजना की शुरुआती विस्तृत स्वीकृत लागत 1640.04 करोड़ रुपये थी। बाद में लागत बढ़ी और हाल की रिपोर्टों में यह करीब 1873 करोड़ रुपये बताई गई है।
सोमवार के निरीक्षण के बाद अब सबकी नजर सीआरएस प्रक्रिया पर है। यदि सुरक्षा जांच में सभी मानक पूरे पाए जाते हैं और आवश्यक स्वीकृति मिलती है, तो धार से इंदौर के बीच यात्री रेल सेवा शुरु करने की राह और साफ होगी। धार के लोगों के लिए अब इंतजार का अगला पड़ाव 29 और 30 अक्टूबर है।
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