
नईदुनिया प्रतिनिधि, धार। कहीं पटरियों के किनारे धूल के गुबार उठ रहे थे तो कहीं तेज रफ्तार से गुजरते इलेक्ट्रिक इंजन की आवाज दूर तक सुनाई दे रही थी। धार की धरती पर सोमवार को पहली बार इलेक्ट्रिक इंजन दौड़ा तो रेल कनेक्टिविटी का बरसों पुराना इंतजार एक कदम और आगे बढ़ गया।
धार की पटरियों पर सोमवार को रफ्तार का नया इतिहास लिखा गया। पहली बार इलेक्ट्रिक इंजन ने टीही से धार तक का सफर तय किया। दोपहर 1:35 बजे टीही से निकला इंजन पीथमपुर, सागौर और गुणावद होते हुए धार पहुंचा।
पहला स्पीड ट्रायल 30 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से हुआ, जिसमें टीही से धार पहुंचने में 79 मिनट लगे। दूसरा ट्रायल 75 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से हुआ, जिसमें धार से टीही पहुंचने में 46 मिनट लगे। तीसरा ट्रायल 110 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से हुआ, जिसमें टीही से धार पहुंचने में 36 मिनट लगे। वहीं चौथा और अंतिम स्पीड ट्रायल 130 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से हुआ, जिसमें धार से टीही पहुंचने में 31 मिनट लगे।
दो फेरों में हुई इस कवायद ने इंदौर-दाहोद रेल परियोजना के धार-टीही रेलखंड को यात्री ट्रेन संचालन की मंजिल के और करीब पहुंचा दिया। अब अगली परीक्षा रेलवे सुरक्षा आयुक्त (सीआरएस) के सामने होगी। उनकी हरी झंडी मिली तो धार से यात्री ट्रेन चलने की उम्मीद को पंख लग सकते हैं। हालांकि यह निरीक्षण सुबह आठ बजे से शुरू होना था, लेकिन बिजली संबंधी कार्य के चलते दोपहर एक बजे बाद परीक्षण शुरू हुआ।
इलेक्ट्रिक इंजन ने दोपहर 1:35 बजे टीही से पहला फेरा शुरू किया। यह पीथमपुर, सागौर और गुणावद होते हुए दोपहर 3:12 बजे 30 किमी प्रति घंटे की गति से धार पहुंचा। इसके बाद धार से टीही की ओर 75 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से रवाना हुआ। दूसरे फेरे में टीही से धार तक इंजन 110 किमी प्रति घंटे की गति से पहुंचा।
वापसी में धार से टीही की ओर इसकी गति 135 किमी प्रति घंटे तक पहुंची। इस तरह रेलवे ने रेल पटरी की मजबूती, पुल-पुलियाओं और अन्य निर्माण कार्यों की गुणवत्ता परखी। ट्रायल सफल रहा, हालांकि कुछ स्थानों पर कमियां सामने आई हैं, जिन्हें तीन नवंबर को दूर किया जाएगा।
अब रेलवे सुरक्षा आयुक्त ई. श्रीनिवासन पांच नवंबर को टीही से गुणावद और छह नवंबर को गुणावद से धार तक रेलखंड का निरीक्षण करेंगे। इस दौरान ट्रैक, पुल-पुलियाओं और सुरक्षा से जुड़े इंतजामों की जांच होगी। सीआरएस की अनुमति मिलने पर धार और इंदौर के बीच यात्री ट्रेन संचालन का रास्ता साफ हो सकेगा।