
प्रेमविजय पाटिल, नईदुनिया, धार : राजा भोज के समय धार में मूर्ति बनाने वाले एक शिल्पकार और अभिलेख उकेरने वाले कारीगर के नाम करीब 1000 साल पुराने अभिलेख से सामने आए हैं। इससे भोजकालीन धार, वाग्देवी और भोजशाला से जुड़े इतिहास की एक महत्वपूर्ण कड़ी सामने आती है।
लंदन के ब्रिटिश म्यूजियम में रखी धार की अंबिका की मूर्ति के पाये पर उत्कीर्ण अभिलेख के नए अध्ययन में मणथला और शिवदेव के नाम मिले हैं। अभिलेख के अनुसार मणथला ने अंबिका की मूर्ति बनाई थी, जबकि शिवदेव ने उस पर अभिलेख उकेरा था।

लंदन स्थित संग्रहालय। - फाइल
यह अभिलेख विक्रम संवत 1091 यानी 1034-35 ईस्वी का है। शोधकर्ता के अनुसार यह राजा भोज के शासनकाल के मध्य का समय था। अभिलेख में केवल अंबिका की मूर्ति की जानकारी ही नहीं है, बल्कि इसमें वाग्देवी की पहले स्थापना और उसके बाद तीन जैन प्रतिमाओं की स्थापना का भी उल्लेख मिलता है। इसके बाद अंबिका की मूर्ति बनाए जाने की बात कही गई है। इस तरह एक ही अभिलेख भोजकालीन धार में वाग्देवी और जैन परंपरा से जुड़ी प्रतिमाओं की स्थापना तथा अंबिका की मूर्ति बनाए जाने का महत्वपूर्ण प्रमाण देता है।
यह जानकारी ब्रिटेन की कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी प्रेस की शोध पत्रिका जर्नल आफ द रायल एशियाटिक सोसायटी में प्रकाशित माइकल विलिस के शोधपत्र से सामने आई है। शोधपत्र का शीर्षक ‘धार, भोज एंड सरस्वती : एन ओल्ड प्राब्लम रीविजिटेड’ है और यह हाल ही में आनलाइन प्रकाशित हुआ। शोधपत्र में ब्रिटिश म्यूजियम की इस मूर्ति के पाये (आधार) पर उत्कीर्ण अभिलेख का नए सिरे से अध्ययन किया गया है।
शोधकर्ता के अनुसार, इस अभिलेख का एक पाठ पहले 2012 में प्रकाशित हो चुका था, लेकिन पत्थर की सतह घिस जाने और उस पर पड़ी तिरछी दरारों के कारण इसे पढ़ने में कठिनाई थी। नए अध्ययन में ‘इंडोस्क्रिप्ट’ जैसे डिजिटल उपकरण और विशेष रूप से तैयार की गई तस्वीर की मदद से अभिलेख का दोबारा अध्ययन किया गया। इसके बाद इसके पाठ की नई व्याख्या की गई।
नए अध्ययन की शुरुआत मूर्ति के आधार के एक हिस्से पर बनी घुटने के बल बैठी छोटी महिला आकृति से हुई। शोधकर्ता ने मध्यकालीन भारतीय परंपरा के आधार पर इसे मूर्ति की दाता यानी वह महिला जिसने इस प्रतिमा की स्थापना कराई थी, माना। इसी आकृति के आधार पर अभिलेख को फिर से पढ़ा गया और दाता का नाम सोसा सामने आया। शोधकर्ता के अनुसार सोसा जैन धर्म की विद्याधरी शाखा से जुड़ी महिला अनुयायी थीं। अभिलेख के अंतिम हिस्से में बताया गया है कि अंबिका की यह प्रतिमा सहिरा के पुत्र मणथला ने बनाई, जबकि शिवदेव ने उस पर अभिलेख उकेरा।
इंडोस्क्रिप्ट एक डिजिटल शोध उपकरण है, जिसकी मदद से प्राचीन अभिलेखों की लिपि और अक्षरों को पहचानने तथा पुराने या अस्पष्ट लेख को पढ़ने में सहायता मिलती है।