
शैलेंद्र लड्डा, नईदुनिया, सुसारी। धार जिले में नर्मदा नदी के जल से चार तहसीलों के 247 गांवों की करीब 75 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचित करने वाली दो हजार 717 करोड़ रुपये लागत की कुक्षी माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजना पर अब तेजी से काम प्रारंभ हो गया है।
यह धार जिले की सबसे बड़ी सिंचाई परियोजनाओं में से एक है, जो सबसे अधिक कृषि क्षेत्र को नर्मदा के जल से सिंचित करेगी।
कुक्षी माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजना को नर्मदा घाटी विकास विभाग द्वारा 14 जनवरी 2020 को स्वीकृति दी गई थी। उस समय योजना में कुक्षी और डही तहसील के 175 गांव शामिल थे। इसके बाद वर्ष 2022 में परियोजना का विस्तार करते हुए मनावर और गंधवानी तहसील के कुछ गांवों को भी इसमें शामिल किया गया।
इससे लाभान्वित गांवों की संख्या बढ़कर 247 हो गई। वहीं परियोजना की स्वीकृत लागत भी 2,117 करोड़ से बढ़कर 2,717 करोड़ रुपये हो गई।
संपवेल निर्माण का कार्य प्रारंभ कुक्षी माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजना के तहत नर्मदा किनारे डूब क्षेत्र के गांव चिखल्दा की खेड़ा बस्ती के समीप संपवेल और पंप हाउस के निर्माण का कार्य निर्माण एजेंसी ने प्रारंभ कर दिया है। नर्मदा नदी से संपवेल तक पानी लाने के लिए करीब 800 मीटर लंबी नहर का निर्माण किया जाना है।
इसके लिए बड़ी मशीनों से गहरी खोदाई के साथ चट्टानी क्षेत्र में ब्लास्टिंग का कार्य भी किया जा रहा है। जमीन की सतह से करीब 35 से 50 मीटर तक गहराई में खोदाई की जा रही है।
नर्मदा नदी से संपवेल तक पानी पहुंचाने के लिए बनाई जा रही नहर को इस तरह तैयार किया जा रहा है कि नर्मदा का जलस्तर 111 मीटर तक होने पर भी नदी से संपवेल तक पानी पहुंचाया जा सके। वर्तमान में नर्मदा का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है और तय समय से पहले ही बैकवाटर भरने लगा है।
ऐसे में जिस स्थान पर संपवेल और नहर का निर्माण कार्य चल रहा है, वहां नर्मदा का बैकवाटर 136 मीटर के जलस्तर के बाद पहुंचने लगता है। इससे निर्माण कार्य प्रभावित होने की आशंका है।
बैकवाटर को निर्माण स्थल तक पहुंचने से रोकने के लिए निर्माण एजेंसी ने कार्यस्थल के आसपास करीब डेढ़ किलोमीटर लंबी और 15 से 20 फीट ऊंची मिट्टी की दीवार बनाई है, ताकि बढ़ते बैकवाटर से निर्माण कार्य प्रभावित न हो।
कुक्षी माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजना से धार जिले की कुक्षी, डही, मनावर और गंधवानी तहसीलों के 247 गांवों की करीब 75 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराया जाएगा। परियोजना के तहत प्रत्येक दो हेक्टेयर कृषि भूमि के लिए एक वाल्व लगाया जाएगा, जिसे माइक्रो सिंचाई पद्धति से जोड़ा जाएगा।
साथ ही जिन गांवों से परियोजना की पेयजल पाइपलाइन गुजरेगी और वहां जलसंकट की स्थिति होगी, उन गांवों को रा वाटर कनेक्शन उपलब्ध कराया जाएगा।
इसके अलावा पाइपलाइन के मार्ग में आने वाले छोटे-बड़े करीब 50 तालाबों को भी परियोजना के माध्यम से भरा जाएगा। इस तरह परियोजना से क्षेत्र को सिंचाई, पेयजल और तालाबों में पानी भरने के रूप में तीन प्रमुख लाभ मिलेंगे।
परियोजना की स्वीकृति: 14 जनवरी 2020
निविदा आमंत्रण: 18 अगस्त 2022
परियोजना का भूमिपूजन: 16 जून 2023
पर्यावरणीय स्वीकृति: फरवरी 2025
निर्माण कार्य प्रारंभ: वर्ष 2025
परियोजना पूर्ण करने की निर्धारित अवधि: वर्ष 2031
नर्मदा से प्रस्तावित जल उद्वहन: 29.55 क्यूसेक
मुख्य पाइपलाइन की लंबाई: करीब 90 किलोमीटर
लाभान्वित गांव: 247
सिंचाई क्षेत्र: करीब 75 हजार हेक्टेयर
स्वीकृत लागत: 2,717 करोड़ रुपये
कार्य तेजी से किया जा रहा है परियोजना को पर्यावरण स्वीकृति मिलने में देरी हुई थी। अब बाद तेजी से कार्य किया जा रहा है। पाइपलाइन के अलावा संपवेल निर्माण का बेस बनाया जा रहा है।
-प्रदीप मुझाल्दा, कार्यपालन यंत्री, नर्मदा घाटी विकास विभाग