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मध्य प्रदेश में नर्मदा से बदलेगी 247 गांवों की तस्वीर, 75 हजार हेक्टेयर खेतों तक पहुंचेगा पानी

धार जिले में नर्मदा नदी के जल से चार तहसीलों के 247 गांवों की करीब 75 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचित करने वाली दो हजार 717 करोड़ रुपये लागत की कुक्...और पढ़ें

By shailendra ladhdhaEdited By: manoj dubey
Publish Date: Tue, 11 Aug 2026 05:58:27 PM (IST)Updated Date: Tue, 11 Aug 2026 06:01:53 PM (IST)
मध्य प्रदेश में नर्मदा से बदलेगी 247 गांवों की तस्वीर, 75 हजार हेक्टेयर खेतों तक पहुंचेगा पानी

HighLights

  1. 2,717 करोड़ की कुक्षी माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजना ने पकड़ी रफ्तार
  2. धार जिले में 75 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि होगी सिंचित इससे
  3. 14 जनवरी 2020 को स्वीकृति दी गई थी इस परियोजना को

शैलेंद्र लड्डा, नईदुनिया, सुसारी। धार जिले में नर्मदा नदी के जल से चार तहसीलों के 247 गांवों की करीब 75 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचित करने वाली दो हजार 717 करोड़ रुपये लागत की कुक्षी माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजना पर अब तेजी से काम प्रारंभ हो गया है।

यह धार जिले की सबसे बड़ी सिंचाई परियोजनाओं में से एक है, जो सबसे अधिक कृषि क्षेत्र को नर्मदा के जल से सिंचित करेगी।

14 जनवरी 2020 को स्वीकृति दी गई थी

कुक्षी माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजना को नर्मदा घाटी विकास विभाग द्वारा 14 जनवरी 2020 को स्वीकृति दी गई थी। उस समय योजना में कुक्षी और डही तहसील के 175 गांव शामिल थे। इसके बाद वर्ष 2022 में परियोजना का विस्तार करते हुए मनावर और गंधवानी तहसील के कुछ गांवों को भी इसमें शामिल किया गया।


इससे लाभान्वित गांवों की संख्या बढ़कर 247 हो गई। वहीं परियोजना की स्वीकृत लागत भी 2,117 करोड़ से बढ़कर 2,717 करोड़ रुपये हो गई।

800 मीटर लंबी नहर का निर्माण किया जाना है

संपवेल निर्माण का कार्य प्रारंभ कुक्षी माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजना के तहत नर्मदा किनारे डूब क्षेत्र के गांव चिखल्दा की खेड़ा बस्ती के समीप संपवेल और पंप हाउस के निर्माण का कार्य निर्माण एजेंसी ने प्रारंभ कर दिया है। नर्मदा नदी से संपवेल तक पानी लाने के लिए करीब 800 मीटर लंबी नहर का निर्माण किया जाना है।

इसके लिए बड़ी मशीनों से गहरी खोदाई के साथ चट्टानी क्षेत्र में ब्लास्टिंग का कार्य भी किया जा रहा है। जमीन की सतह से करीब 35 से 50 मीटर तक गहराई में खोदाई की जा रही है।

बैकवाटर रोकने के लिए बनाई मिट्टी की दीवार

नर्मदा नदी से संपवेल तक पानी पहुंचाने के लिए बनाई जा रही नहर को इस तरह तैयार किया जा रहा है कि नर्मदा का जलस्तर 111 मीटर तक होने पर भी नदी से संपवेल तक पानी पहुंचाया जा सके। वर्तमान में नर्मदा का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है और तय समय से पहले ही बैकवाटर भरने लगा है।

ऐसे में जिस स्थान पर संपवेल और नहर का निर्माण कार्य चल रहा है, वहां नर्मदा का बैकवाटर 136 मीटर के जलस्तर के बाद पहुंचने लगता है। इससे निर्माण कार्य प्रभावित होने की आशंका है।

बैकवाटर को निर्माण स्थल तक पहुंचने से रोकने के लिए निर्माण एजेंसी ने कार्यस्थल के आसपास करीब डेढ़ किलोमीटर लंबी और 15 से 20 फीट ऊंची मिट्टी की दीवार बनाई है, ताकि बढ़ते बैकवाटर से निर्माण कार्य प्रभावित न हो।

चार तहसीलों के किसानों और आमजन को तीन तरह का लाभ

कुक्षी माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजना से धार जिले की कुक्षी, डही, मनावर और गंधवानी तहसीलों के 247 गांवों की करीब 75 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराया जाएगा। परियोजना के तहत प्रत्येक दो हेक्टेयर कृषि भूमि के लिए एक वाल्व लगाया जाएगा, जिसे माइक्रो सिंचाई पद्धति से जोड़ा जाएगा।

साथ ही जिन गांवों से परियोजना की पेयजल पाइपलाइन गुजरेगी और वहां जलसंकट की स्थिति होगी, उन गांवों को रा वाटर कनेक्शन उपलब्ध कराया जाएगा।

50 तालाबों को भी परियोजना के माध्यम से भरा जाएगा

इसके अलावा पाइपलाइन के मार्ग में आने वाले छोटे-बड़े करीब 50 तालाबों को भी परियोजना के माध्यम से भरा जाएगा। इस तरह परियोजना से क्षेत्र को सिंचाई, पेयजल और तालाबों में पानी भरने के रूप में तीन प्रमुख लाभ मिलेंगे।

एक नजर कुक्षी माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजना पर

परियोजना की स्वीकृति: 14 जनवरी 2020

निविदा आमंत्रण: 18 अगस्त 2022

परियोजना का भूमिपूजन: 16 जून 2023

पर्यावरणीय स्वीकृति: फरवरी 2025

निर्माण कार्य प्रारंभ: वर्ष 2025

परियोजना पूर्ण करने की निर्धारित अवधि: वर्ष 2031

नर्मदा से प्रस्तावित जल उद्वहन: 29.55 क्यूसेक

मुख्य पाइपलाइन की लंबाई: करीब 90 किलोमीटर

लाभान्वित गांव: 247

सिंचाई क्षेत्र: करीब 75 हजार हेक्टेयर

स्वीकृत लागत: 2,717 करोड़ रुपये

कार्य तेजी से किया जा रहा है परियोजना को पर्यावरण स्वीकृति मिलने में देरी हुई थी। अब बाद तेजी से कार्य किया जा रहा है। पाइपलाइन के अलावा संपवेल निर्माण का बेस बनाया जा रहा है।

-प्रदीप मुझाल्दा, कार्यपालन यंत्री, नर्मदा घाटी विकास विभाग