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नवरात्र विशेष : धार में दुल्हन की तरह सजा गढ़ कालिका माता मंदिर, दर्शन करने श्रद्धालुओं का तांता लगना हुआ शुरू

शहर सहित जिलेभर में रविवार को शुभ मुहूर्त में घट स्थापना के साथ नवरात्र महापर्व की शुरूआत हो गई है।अगले दस दिनों तक पूरा नगर मां की भक्ति और डांडियों ...और पढ़ें

By PremVijay PatilEdited By: Ramnath Mutkule
Publish Date: Sun, 11 Oct 2026 09:13:45 AM (IST)Updated Date: Sun, 11 Oct 2026 09:13:45 AM (IST)
नवरात्र विशेष : धार में दुल्हन की तरह सजा गढ़ कालिका माता मंदिर, दर्शन करने श्रद्धालुओं का तांता लगना हुआ शुरू
धार शहर की सबसे ऊंची पहाड़ी की चोटी पर विराजमान मां गढ़ कालिका का मंदिर का सुंदर दृश्य और मंदिर के चारों ओर हरियाली छाई हुई है। -रॉकी मक्कड़

HighLights

  1. अगले दस दिनों तक पूरा नगर मां की भक्ति और डांडियों की गूंज में डूबा रहेगा
  2. हर जुबां पर जय माता दी....जय माता दी...का उद्घोष सुनाई देगा
  3. प्राचीन मां गढ़ कालिका मंदिर को दुल्हन की तरह सजाया गया है

नईदुनिया प्रतिनिधि, धार : शहर सहित जिलेभर में रविवार को शुभ मुहूर्त में घट स्थापना के साथ नवरात्र महापर्व की शुरूआत हो गई है। अगले दस दिनों तक पूरा नगर मां की भक्ति और डांडियों की गूंज में डूबा रहेगा। हर जुबां पर जय माता दी....जय माता दी...का उद्घोष सुनाई देगा।

प्राचीन मां गढ़ कालिका मंदिर को दुल्हन की तरह सजाया गया है। मंदिर के आंगन से लेकर शिखर तक रंग-बिरंगी आकर्षक लाइटें झिलमिला रही हैं। यहां प्रतिदिन अल सुबह काकड़ आरती में हजारों श्रद्धालु शामिल होकर पुण्य लाभ लेंगे।

मां गढ़ कालिका मंदिर का इतिहास

गढ़ कालिका का प्राचीन मंदिर धार शहर की सबसे ऊंची पहाड़ी व देवी सागर तालाब के पास स्थित है। ये मंदिर धार के पंवार राजवंश द्वारा स्थापित किया गया था और ये प्राचीन भारतीय मंदिर वास्तुकला का एक अनूठा उदाहरण है। वर्ष 1770 में स्वर्गीय यशवंत राव पंवार प्रथम (वर्ष 1736 से 1761) की पत्नी सकवार बाई ने अपने पति की मृत्यु के बाद इस मंदिर का निर्माण कराया था।


देवी कालिका की प्रेरक प्रतिमा वास्तव में महाराष्ट्र के कोठे गांव से लाई गई थी। मंदिर का शिखर परमार स्थापत्य शैली का बताया जाता है। मंदिर के सामने सुंदर काले पत्थर की दीपों की श्रृंखल है। आनंद राव पंवार (वर्ष 1782 से 1807) की पत्नी मैना देवी ने भी गढ़ कालिका मंदिर के कुछ प्रमुख विकास कार्यों में योगदान दिया।

उल्लेखनीय लोगों में गढ़ कालिका मंदिर परिसर के अंदर सभा मंडप, भोजन कक्ष शामिल हैं। जाहिर तौर पर गढ़ कालिका को पंवार वंश की कुलदेवी माना जाता है। कुलदेवी की पूजा पूरे कुल द्वारा की जाती है और देश भर के भक्त गढ़ कालिका देवी के भी दर्शन और पूजन करते हैं।

देवीजी परिसर में मेला लगा

देवीजी मंदिर परिसर में मेले का भी शुभारंभ होगा। यहां छोटे-बड़े झुले लग चुके है जो बच्चों के लिए मनोरंजन का केंद्र रहेगा। साथ ही यहां पर सामग्री खरीदारी के लिए दुकानें भी लगाई गई है।

पुलिस प्रशासन रहेगा तैनात, सीसीटीवी कैमरों से होगी निगरानी

श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने चाक-चौबंद सुरक्षा इंतजाम किए हैं। मंदिर परिसर और गर्भगृह तक पुलिस बल तैनात रहेगा। साथ ही मेले में सीसीटीवी कैमरों से निगरानी होगी और खोया-पाया केंद्र भी स्थापित किया गया है।

सप्तमी से पूरी रात होंगे गरबे के आयोजन

धार में नवरात्र की धूम अलग ही रंग बिखेरती है। सप्तमी से शहर की रातें पूरी तरह डांडियों की ताल और भक्तिरस में सराबोर हो जाएगी। साथ ही चुनरी यात्रा भी भव्य रुप से निकाली जाएगी। शहर में इस बार 40 से अधिक स्थानों पर सार्वजनिक गरबा पंडाल सजाए गए हैं। शुरुआती छह दिन पंडालों में रात 12 बजे तक गरबे की धुन बजेगी, जबकि सप्तमी से पूर्णिमा तक पूरी रात डांडियों की गूंज रहेगी।

पूरे नौ दिनों तक मां के लिए जागरण करती है मां गढ़ कालिका

मां गढ़ कालिका की शयन आरती तो होती है, लेकिन पालना नहीं लगाया जाता है। पूरी नवरात्रि माता भक्तों के लिए जागरण करती है।

नंगे पांव रात तीन बजे मंदिर के लिए निकल पड़ते है भक्त

शारदीय नवरात्र के अवसर पर भक्तों की अपनी मां के प्रति इतनी सच्ची भक्ति रहती है कि वह तीन बजे ही स्नान करके तड़के तीन बजे से ही नंगे पांव ही मां की काकड़ आरती में शामिल होने जाते है श्रद्धालु।

ये छह आरती होती है

  • काकड़ा आरती: सुबह 4 बजे होगी-मिश्री का भोग लगता है।
  • सीरे की आरती: सुबह 9 बजे सीरे (हलवा) का भोग लगाया जाएगा
  • श्रंगार आरती : सुबह 10:30 बजे पंच खाद्य का भोग लगता है।
  • मध्याह्न आरती : सुबह 11:30 -भोजन की थाली लगाई जाती है।
  • संध्या आरती : सूर्यास्त के बाद-खीर पूरी का नैवेद्य लगता है
  • शयन आरती : रात सवा 9 बजे दूध का नैवेद्य लगता है।

ये भी है खास

  • मां के दर्शन करने 157 सीढ़ियां को पार करना पड़ता है।
  • 110 ऊंची पहाड़ी पर विराजित है मां गढ़ कालिका का मंदिर।
  • अलसुबह चार बजे होती है काकड़ आरती

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