• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • बढ़ता यूपी
  • समृद्ध उत्तराखंड
  • Mutual Funds मास्टरी
  • होम
  • मध्य प्रदेश
  • धार

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, विश्व हिंदू परिषद और हिंदू जागरण मंच ने भोजशाला मुद्दे को ऐसे बनाया जनआंदोलन

भोजशाला हिंदुओं को सौंपने की मांग को लेकर चला आंदोलन धार्मिक कार्यक्रमों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह मालवा अंचल के सबसे संगठित जनआंदोलनों में शामिल हो...और पढ़ें

By PremVijay PatilEdited By: Ramnath Mutkule
Publish Date: Sat, 16 May 2026 10:09:28 AM (IST)Updated Date: Sat, 16 May 2026 10:21:50 AM (IST)
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, विश्व हिंदू परिषद और हिंदू जागरण मंच ने भोजशाला मुद्दे को ऐसे बनाया जनआंदोलन
भोजशाला में सत्याग्रह में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए थे। (नईदुनिया प्रतिनिधि)

HighLights

  1. सरस्वती वंदना से शुरू हुआ अभियान धीरे-धीरे जनआंदोलन में बदला, गांव-गांव बनीं धर्मरक्षा समितियां
  2. 13 हजार धर्मरक्षकों का नेटवर्क और महिलाओं की बड़ी भागीदारी आंदोलन की सबसे बड़ी ताकत बनी
  3. भोजशाला परिसर में मां सरस्वती वंदना और हनुमान चालीसा का पाठ प्रारंभ किया

नईदुनिया प्रतिनिधि, धार। भोजशाला हिंदुओं को सौंपने की मांग को लेकर चला आंदोलन केवल धार्मिक कार्यक्रमों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह मध्य प्रदेश के मालवा अंचल के सबसे संगठित जनआंदोलनों में शामिल हो गया।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, विश्व हिंदू परिषद (विहिप), बजरंग दल और हिंदू जागरण मंच जैसे संगठनों ने वर्षों तक लगातार अभियान चलाकर इस मुद्दे को गांव-गांव तक पहुंचाया। आंदोलन के दौरान सत्याग्रह, जनजागरण, मातृशक्ति संगम, धर्मरक्षक समितियां और बड़े जुटान प्रमुख पहचान बने।

वर्ष 1994 में धार के सामाजिक कार्यकर्ताओं और संघ कार्यकर्ताओं ने भोजशाला परिसर में मां सरस्वती वंदना और हनुमान चालीसा का पाठ प्रारंभ किया। इसी वर्ष विहिप और बजरंग दल ने भोजशाला मुक्ति आंदोलन को संगठित रूप दिया। आंदोलन का उद्देश्य भोजशाला को मां सरस्वती मंदिर बताते हुए वहां पूजा-अर्चना और धार्मिक अधिकारों की बहाली की मांग करना था।


छह दिसंबर,1996 को बजरंग दल के आह्वान पर प्रदेश स्तरीय शौर्य दिवस कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्रशासन ने इसे रोकने के लिए दमनात्मक कार्रवाई की, जिसके बाद आंदोलन और तेज हो गया। वर्ष 1997 में विहिप ने भोजशाला मुक्ति आंदोलन को केंद्रीय सूची में शामिल किया। प्रदेश की तत्कालीन कांग्रेस सरकार द्वारा शुक्रवार नमाज की अनुमति और हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध के फैसले ने आंदोलन को बड़ा मुद्दा बना दिया।

-इस निर्णय के विरोध में आरएसएस की प्रेरणा से विभिन्न सामाजिक और धार्मिक संगठनों ने संयुक्त आंदोलन शुरू किया। वर्ष 2000 में हिंदू जागरण मंच का गठन हुआ। इसने गांव-गांव धर्मरक्षा समितियां बनाकर जनसंपर्क अभियान चलाया। धार जिले में 1,334 धर्मरक्षा समितियां सक्रिय रहीं और करीब 13 हजार धर्मरक्षकों ने आंदोलन में प्रत्यक्ष भूमिका निभाई। आंदोलन का सबसे बड़ा दृश्य तब सामने आया जब एक लाख से अधिक धर्मरक्षकों ने भोजशाला मुक्ति का संकल्प लिया। महिलाओं की भागीदारी भी आंदोलन की प्रमुख ताकत बनी।

-सात फरवरी, 2000 को आयोजित मातृशक्ति संगम में लगभग 10 हजार महिलाओं ने भोजशाला पहुंचकर उसकी मुक्ति का संकल्प लिया। आयोजन के लिए 35 हजार परिवारों से आठ लाख रोटियां जुटाई गईं। आंदोलन के दौरान प्रशासनिक सख्ती भी देखने को मिली। सरकारी दस्तावेज में उल्लेख है कि 39 धर्मरक्षक गंभीर रूप से घायल हुए और दो लोगों की मौत हुई। पूरे धार जिले में धारा 144 लागू की गई और 10 थाना क्षेत्रों में अनिश्चितकालीन कर्फ्यू लगाया गया। कई कार्यकर्ताओं पर गंभीर धाराओं में मुकदमे दर्ज किए गए और कुछ पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) तक लगाया गया। लगातार जनदबाव और आंदोलन के बाद आठ अप्रैल, 2003 को सरकार ने नई व्यवस्था लागू की। इसके तहत भोजशाला में प्रतिदिन दर्शन और प्रत्येक मंगलवार पूजा-अर्चना की अनुमति दी गई। लगभग 698 वर्षों बाद मिली इस अनुमति के बाद पूरे जिले में विजय उत्सव और महाआरती आयोजित की गई।

भोजशाला मुक्ति की गाथा: 39 घायल, 2 शहादत और दशकों का इंतजार; 1997 के प्रतिबंध से 2003 के विजय उत्सव तक की पूरी कहानी