
नईदुनिया प्रतिनिधि, धार-टांडा : जिस पटरी पर ट्रेन दौड़ाकर आदिवासी अंचल के लोगों को नई रेल सुविधा मिली है, उसी पटरी पर अब बच्चों की उत्सुकता और कुछ लोगों की लापरवाही रेलवे के लिए नई चुनौती बन गई है।
धार-छोटा उदयपुर रेल परियोजना के टांडा रोड से डेकाकुंड के बीच कई स्थानों पर पटरी पर लोहे का सामान रखे जाने और ट्रैक के नीचे से गिट्टी निकालकर उसी पटरी पर जमा करने की घटनाएं सामने आई हैं। कुछ स्थानों पर तो पटरी के दोनों ओर से निकाली गई गिट्टी करीब 10 मीटर तक ट्रैक पर बढ़ा दी गई है।
इससे ट्रेन के पहियों और वैगन को नुकसान पहुंचने के साथ रेल संचालन की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। ये समस्या खंडाला, टांडा से डेकाकुंड के बीच में आई है। यहां पर कम गति से ट्रेन चला रहे है। वहीं नई मेमो कोच (डिब्बे) की व्हील में समस्या आई है तो उसका सुधार कार्य के लिए भेजा गया है।
जिसके स्थान पर पुरानी ट्रेन नई मेमो कोच (डिब्बे) टांडा क्षेत्र में संचालन हो रहा है। रेलवे सूत्रों के अनुसार पटरी पर गिट्टी और अन्य सामग्री मिलने की घटनाओं को गंभीरता से लिया जा रहा है। कुछ स्थानों पर ट्रैक भी प्रभावित हुआ है। सुरक्षा की दृष्टि से जरूरत पड़ने पर ऐसे हिस्सों में ट्रेन की गति 120 किमी प्रति घंटे से घटाकर करीब 30 किमी प्रति घंटे तक करनी पड़ सकती है।
रेलवे की नई सुविधा को लेकर क्षेत्र के बच्चों में उत्सुकता भी दिखाई दे रही है। कई बच्चे पटरी के आसपास खेलते हैं। इसी दौरान कुछ बच्चे यह देखने के लिए पटरी पर लोहे का सामान रख देते हैं कि ट्रेन के गुजरने पर उसका क्या होगा। वहीं पटरी के नीचे से गिट्टी निकालकर ऊपर जमा करने की घटनाएं भी सामने आ रही हैं। उत्सुकता में की गई ये हरकत किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।
रेल सुविधा के उद्घाटन के समय लाए गए आधुनिक रेल वैगन को भी मेंटेनेंस और सुधार कार्य के लिए भेजा गया है। रेलवे के अनुसार वैगन को मेंटेनेंस के लिए भेजना नियमित प्रक्रिया का हिस्सा है। हालांकि इस दौरान किसी तरह का नुकसान हुआ है या नहीं, इसकी वास्तविक स्थिति जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगी।
स्थिति को देखते हुए रेलवे ने टांडा रोड से देखा कुंड के बीच आने वाले गांवों, ग्राम पंचायतों और स्कूलों में जागरूकता अभियान शुरू किया है। रेलवे कर्मचारी बच्चों और ग्रामीणों को समझा रहे हैं कि पटरी पर कोई वस्तु रखना या ट्रैक के नीचे से गिट्टी निकालना गंभीर खतरा पैदा कर सकता है।
रेलवे सूत्रों का कहना है कि नई रेल परियोजनाओं में शुरुआत में इस तरह की घटनाएं उत्सुकता के कारण सामने आती हैं, लेकिन यदि पटरी और रेल वैगन को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियां जारी रहीं तो इसका असर रेल सुविधा पर पड़ सकता है। आवश्यकता पड़ने पर ट्रेन की गति सीमित करने के साथ संचालन में भी बदलाव करना पड़ सकता है।
प्रतिदिन चलने वाली सुविधा को सप्ताह में कुछ दिन चलाने जैसी स्थिति बनी तो इसका सीधा असर यात्रियों पर पड़ेगा। वर्तमान में टांडा रोड से वडोदरा तक रेल सुविधा आदिवासी क्षेत्र के लोगों के लिए काफी उपयोगी साबित हो रही है। करीब 45 रुपये में टांडा रोड से वडोदरा तक यात्रा की सुविधा मिलने से मजदूरों और ग्रामीण यात्रियों को विशेष लाभ मिल रहा है। ऐसे में रेलवे की इस सुविधा को सुरक्षित और नियमित बनाए रखना स्थानीय लोगों की भी जिम्मेदारी है।