
प्रेमविजय पाटिल, नईदुनिया प्रतिनिधि, धार। विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी मांडू के समीप स्थित आदिवासी क्षेत्र के होम स्टे अब केवल ग्रामीण जीवन और प्राकृतिक सौंदर्य का अनुभव ही नहीं कराएंगे, बल्कि पर्यटकों को रात्रिकालीन आकाश के रहस्यों तथा जनजातीय समुदाय की पारंपरिक खगोलीय समझ से भी रूबरू कराएंगे। ज्ञानपुरा सहित आसपास के क्षेत्रों में विकसित किए गए होम स्टे में जल्द ही खगोलीय पर्यटन (एस्ट्रो टूरिज्म) और आकाश दर्शन गतिविधियों की शुरुआत होने जा रही है।
इस अभिनव पहल के तहत होम स्टे संचालकों तथा क्षेत्र के आदिवासी युवाओं को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। गुजरात की संस्था ‘स्टार गेजिंग इंडिया’ के माध्यम से चयनित युवाओं और बच्चों को खगोल अवलोकन, नक्षत्र पहचान, ग्रह एवं उपग्रह अवलोकन तथा टेलिस्कोप संचालन का प्रारंभिक प्रशिक्षण दिया जा चुका है। आगामी तीन माह तक उन्हें उन्नत प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिससे वे पर्यटकों को रात्रि आकाश में दिखाई देने वाले ग्रहों, तारामंडलों, चंद्रमा की सतह, प्रमुख नक्षत्रों और अन्य खगोलीय घटनाओं की जानकारी दे सकें।
प्रशिक्षण कार्यक्रम से जुड़े धनंजय रावल के अनुसार मांडू और उसके आसपास का क्षेत्र अपेक्षाकृत कम प्रकाश प्रदूषण वाला है। स्वच्छ और खुला आकाश होने के कारण यह क्षेत्र डीप-स्काई ऑब्जर्वेशन तथा स्टार गेजिंग के लिए अत्यंत उपयुक्त माना जाता है। इसी विशेषता को देखते हुए यहां खगोलीय पर्यटन को विकसित करने की योजना पर तेजी से काम किया जा रहा है।
परियोजना के अंतर्गत होमस्टे में आने वाले पर्यटकों को अत्याधुनिक टेलिस्कोप की सहायता से रात्रि आकाश का अवलोकन कराया जाएगा। साथ ही उन्हें खगोल विज्ञान से जुड़े रोचक तथ्यों, अंतरिक्षीय घटनाओं तथा भारतीय खगोलीय परंपराओं की जानकारी भी दी जाएगी। इससे पर्यटकों को सामान्य पर्यटन से अलग एक नया, रोमांचक और ज्ञानवर्धक अनुभव प्राप्त होगा।
इस पहल की विशेषता यह होगी कि इसमें आदिवासी समुदाय की पारंपरिक खगोलीय समझ को भी जोड़ा जाएगा। सदियों से जनजातीय समाज तारों, नक्षत्रों और आकाशीय घटनाओं का उपयोग मौसम, खेती, वर्षा, वन संसाधनों तथा दैनिक जीवन से जुड़े निर्णयों के लिए करता आया है। विभिन्न जनजातीय समुदाय तारों और नक्षत्रों को अपने स्थानीय नामों से पहचानते हैं तथा उनसे जुड़ी लोककथाएं और मान्यताएं पीढ़ी-दर-पीढ़ी संजोकर रखते आए हैं।
पर्यटकों को आधुनिक खगोल विज्ञान के साथ-साथ इन लोककथाओं, पारंपरिक मान्यताओं और जनजातीय खगोलीय ज्ञान की कहानियां भी सुनाई जाएंगी। इससे उन्हें यह समझने का अवसर मिलेगा कि प्रकृति के साथ गहरे जुड़ाव के कारण आदिवासी समाज ने अपने अनुभवों के आधार पर आकाश को किस प्रकार पढ़ना और समझना सीखा।
इस पहल का सबसे बड़ा लाभ स्थानीय आदिवासी समुदाय को मिलेगा। खगोलीय पर्यटन से जुड़े कौशल विकसित होने पर युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। होमस्टे की लोकप्रियता बढ़ेगी, पर्यटकों का ठहराव समय बढ़ेगा तथा स्थानीय परिवारों की आय में वृद्धि होगी। इससे क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों को भी नया आधार मिलेगा।धनंजय रावल ने बताया कि आगामी शीत पर्यटन सत्र से यह व्यवस्था शुरू किए जाने की तैयारी है। मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड के सहयोग से संचालित इस पहल में ‘स्टार गेजिंग इंडिया’ संस्था तकनीकी और प्रशिक्षण संबंधी सहयोग प्रदान कर रही है।