
नईदुनिया प्रतिनिधि, धार : वराह जयंती पर रविवार को लाट मस्जिद (विजय मंदिर) परिसर स्थित पाषाण स्तंभ पर बनी भगवान वराह की मूर्ति चर्चा में रही। प्रशासन ने परिसर के आसपास बैरिकेडिंग कर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी थी। लोगों ने स्तंभ पर बनी मूर्ति को देखा और वापस लौट गए। परिसर में किसी तरह का धार्मिक आयोजन या सामूहिक कार्यक्रम नहीं हुआ। वराह जयंती के कारण इस मूर्ति को लेकर लोगों में उत्सुकता रही। सुरक्षा व्यवस्था के बीच लोग निर्धारित तरीके से परिसर में पहुंचे।
लाट मस्जिद को लेकर लंबे समय से अलग-अलग दावे और विवाद चर्चा में रहे हैं। सनातन प्रहरी समिति का दावा है कि वर्तमान लाट मस्जिद परिसर का संबंध परमारकालीन विजय मंदिर से रहा है। परिसर के पाषाण स्तंभ पर बनी वराह मूर्ति को भी इसी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि से जोड़कर देखा जाता है।
हिंदू परंपरा में वराह भगवान विष्णु के दशावतार में तीसरा प्रमुख अवतार माने जाते हैं। पौराणिक मान्यता के अनुसार हिरण्याक्ष पृथ्वी को रसातल में ले गया था। भगवान विष्णु ने वराह रूप धारण कर उसका वध किया और पृथ्वी को बाहर निकालकर पुनः स्थापित किया। धार में मौजूद वराह प्रतिमा को लेकर उसके स्वरूप, निर्माणकाल और ऐतिहासिक संदर्भ को लेकर आगे भी चर्चा बनी हुई है।
भोजशाला के बाद अब लाट मस्जिद को लेकर गतिविधियां बढ़ी हैं। सनातन प्रहरी समिति ने 15 सितंबर को वराह मार्च के तहत वाहन रैली का आह्वान किया है। हालांकि प्रशासन की ओर से रैली की अनुमति नहीं दिए जाने और अनुमति निरस्त किए जाने की बात सामने आई है। प्रशासन ने संकेत दिया है कि अनुमति के बिना रैली निकाली जाती है तो प्रतिबंधात्मक आदेश के उल्लंघन के तहत कार्रवाई की जा सकती है। ऐसे में अब 15 सितंबर को प्रस्तावित आयोजन को लेकर प्रशासन और समिति के अगले कदम पर नजर रहेगी।
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