इन अधिकारियों को बनाया गया आरोपी...
1. आर.के. मेहरा, तत्कालीन सीएमएचओ डिंडौरी
2. रमेश सिंह मरावी, तत्कालीन सीएमएचओ डिंडौरी
3. बलदेव सिंह भलावी, तत्कालीन डीपीएमओ डिंडौरी
4. भरत सिंह टेकाम, तत्कालीन डीपीएमओ डिंडौरी
5. गुलाब साहू, सहायक ग्रेड-3, डिंडौरी
6. प्रकाश परस्ते, सुपरवाइजर, डिंडौरी
क्या है पूरा मामला
एफआईआर के अनुसार, घटना अवधि 01 अप्रैल 2016 से 31 दिसंबर 2025 के बीच की है। आरोप है कि मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय में क्रिएटर, वेरिफायर और अप्रूवर के रूप में कार्यरत आरोपियों ने बिना किसी कार्ययोजना और बिना किसी दस्तावेज के जिला कोषालय के माध्यम से फर्जी तरीके से भुगतान स्वीकृत करवाया।
जांच में सामने आया भ्रष्टाचार
कलेक्टर द्वारा गठित जांच टीम में भारती मेरावी संयुक्त कलेक्टर और तत्कालीन पेंशन अधिकारी डिंडौरी की जांच रिपोर्ट में यह पाया गया कि आरोपियों ने वेंडर को 3710 रुपये का दोहरा भुगतान और 4560 रुपये का गलत भुगतान किया।
इसके अलावा बिना वैधानिक आदेश के मटेरियल, परिवहन, फर्नीचर, भाड़ा, बिजली और व्यवस्थापक दक्षता अवरुद्ध छुट्टियों की राशि 5,89,209 रुपये का अनियमित और अवैध भुगतान किया गया।
बिना किसी कार्यालीन अभिलेख और गणना पत्रकों में जानबूझकर गलत प्रविष्टि कर एरियर की राशि 49,89,680 रुपये का भुगतान और गुलाब साहू द्वारा सहायक ग्रेड-3 को बिना किसी वैधानिक आदेश के 4,78,431 रुपये का एरियर अवैध भुगतान किया जाना प्रमाणित हुआ। कुल मिलाकर 60,65,590 रुपये का अधिक भुगतान कर शासकीय निधि को नुकसान पहुंचाया गया।
अपराध प्रकोष्ठ ने शुरू की जांच
इस मामले में ईओडब्ल्यू ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 7, 13(1)(a), 13(2) और भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 316(5), 61(2) के तहत मामला दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है।