डिंडौरी। बैगाओं को हेबीटेट राइट्स देने के मामले में डिंडौरी देश का पहला जिला बन गया है। अब तक देश में कहीं भी विशेष संरक्षित जनजाति को यह अधिकार नहीं मिल सका है। बैगा चक क्षेत्र के सात गांव में हेबीटेट राइट्स का अधिकार पत्र प्रभारी मंत्री शरद जैन द्वारा वितरित किया गया।

मंगलवार की देर शाम समनापुर जनपद के गौराकन्हारी गांव में आयोजित कार्यक्रम में वन समितियों को हेबीटेट राइट्स का अधिकार पत्र सौंपा गया। अब इन सात गांव की 23 हजार एकड़ भूमि पर बिना बैगाओं की सहमति से शासन प्रशासन कोई हस्ताक्षेप नहीं कर सकेंगे। 'हेबीटेट' याने रिहायाशी अधिकार प्रदेश व देश के किसी भी जिले में अब तक नहीं मिल सका है।

इन गांवों को किया गया शामिल

बैगा चक क्षेत्र के ग्राम ढावा, जिलंग, रजनी, सरई, धुरकुटा, लमौटा, सिलपिडी को हेबीटेट राइट्स में शामिल किया गया है। अब तक लोगों को वनाधिकार अधिनियम 2006 के तहत केवल वन भूमि का पट्टा ही दिया जाता रहा है। हेबीटेट राइट्स देश की विशेष संरक्षित 72 जातियों को देने का प्रावधान है। इ

नमें से जिले के बैगाओं को ही यह अधिकार मिला है। यहां बैगा जल, जंगल, जमीन का प्रयोग नियम के मुताबिक आसानी से कर सकेंगे। शासन-प्रशासन का हस्ताक्षेप भी इस क्षेत्र में अब बहुत कम ही रहेगा। इन गांव की भूमि पर हस्ताक्षेप करने के लिए बैगाओं की स्वीकृति लेना अनिवार्य होगा। निर्माण कार्य कराने में भी बैगाओं की अनुमति लेनी होगी।

बिना मर्जी के नहीं हो सकेगा विस्थापन

हेबीटेट राइट्स का अधिकार पत्र मिल जाने के बाद अब बैगाओं का विस्थापन भी बिना इनकी मर्जी नहीं हो सकेगा। शासन प्रशासन को कोई भी कार्य इन गांवों में कराने के लिए बैगाओं से सहमति लेनी पड़ेगी। गौरतलब है कि आए दिन विस्थापन के नाम पर कई गांव खाली कराए जाते हैं।

विलुप्त होती प्रजाति में शामिल बैगाओं की संस्कृति व उनके संरक्षण के लिए यह विशेष पहल मानी जा रही है। बताया गया कि 1890 के गजेटियर में भी बैगाओं के संरक्षित क्षेत्र का उल्लेख है। उन दस्तावेजों को भी आधार मानकर सात गांव बैगा चक के चिन्हित करते हुए हेबीटेट राइट्स में शामिल किए गए हैं।

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प्रदेश के साथ देश में पहली बार बैगाओं को हेबीटेट राइट्स देने की पहल की गई है। 23 हजार एकड़ के क्षेत्रफल के सात गांव इसमें शामिल किए गए हैं। वन समितियों को अधिकार पत्र सौंप दिए गए हैं। अब इस क्षेत्र में कोई भी कार्य करने के लिए शासन प्रशासन को बैगाओं से ही अनुमति लेनी होगी। इनका विस्थापन भी बिना इनकी स्वीकृत के नहीं हो सकेगा।

छवि भारद्वाज, कलेक्टर, डिंडौरी

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