
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। शीतला माता मंदिर पर हुए भीषण हादसे के बाद मेले की रौनक पूरी तरह खत्म हो गई है। 16 लोगों की मौत के बाद यहां लगा करीब 50 लाख रुपये का कारोबार ठप पड़ गया है। ग्वालियर के शीतला माता मेले से लौटे व्यापारी बेहद परेशान हैं। उनका कहना है कि कोरोना काल के बाद भी ऐसे हालात नहीं देखे थे।
हर साल अष्टमी और नवमी पर शीतला माता मंदिर में एक से डेढ़ लाख श्रद्धालु पहुंचते हैं। इसी उम्मीद में छोटे-बड़े व्यापारी 9 दिन तक दुकानें लगाते हैं, लेकिन इस बार हादसे के बाद भीड़ काफी कम रही। सामान्य तौर पर आखिरी तीन दिन सप्तमी, अष्टमी और नवमी पर सबसे ज्यादा भीड़ होती है। पैदल आने वाले श्रद्धालु इन्हीं दिनों में सबसे ज्यादा पहुंचते हैं। इस बार सप्तमी की रात हादसे के समय मंदिर परिसर में करीब एक लाख लोग मौजूद थे, लेकिन हादसे के बाद दहशत फैल गई।
हादसे के बाद बचाव कार्य के चलते प्रवेश रोक दिया गया और लोग लौटने लगे। रविवार को अष्टमी पर भी मंदिर में सन्नाटा रहा। सोमवार को नवमी पर तो मेला पूरी तरह खाली हो गया।
नुकसान से परेशान कई दुकानदारों ने नवमी की रात तक रुकने के बजाय पहले ही लौटने का फैसला किया। आधी से ज्यादा दुकानें खाली हो गईं। दुकानदार सामान समेटकर चले गए। रेहड़ी-पटरी वाले भी मेला छोड़ गए। अब मंदिर के आसपास की स्थायी दुकानें ही बची हैं।
दुकानदारों का कहना है कि पहली बार ऐसा देखा है। पहले नवमी को देर रात तक भीड़ रहती थी, मेला खत्म होने के बाद भी श्रद्धालु आते थे, लेकिन इस बार सामान्य सोमवार जितनी भीड़ भी नहीं रही।
श्रद्धालुओं की संख्या कम होने से अब गाड़ियां मंदिर के अंदर तक पहुंच रही हैं। नवरात्र में सामान्यत: वाहनों का प्रवेश बंद रहता है, लेकिन भीड़ न होने के कारण अब गाड़ियां बेरोकटोक आ-जा रही हैं।