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Gwalior: नगर निगम की मदद से 54 लाख का विज्ञापन घोटाला, एजेंसी संचालक सहित आठ पर FIR

नगर निगम के भ्रष्ट तंत्र की मदद से दीपक एडवरटाइजर के संचालक दीपक जेठवानी ने 54 लाख रुपये का घोटाला किया। विज्ञापन की निविदा होने के बाद अनुबंध में फर्...और पढ़ें

By amit mishraEdited By: Akash Pandey
Publish Date: Sat, 08 Nov 2025 02:04:00 AM (IST)Updated Date: Sat, 08 Nov 2025 02:04:00 AM (IST)
Gwalior: नगर निगम की मदद से 54 लाख का विज्ञापन घोटाला, एजेंसी संचालक सहित आठ पर FIR
नगर निगम की मदद से 54 लाख का विज्ञापन घोटाला

नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। नगर निगम के भ्रष्ट तंत्र की मदद से दीपक एडवरटाइजर के संचालक दीपक जेठवानी ने 54 लाख रुपये का घोटाला किया। विज्ञापन की निविदा होने के बाद अनुबंध में फर्जीवाड़ा कर दो शर्तें खुद को लाभ पहुंचाने के लिए जोड़ी गईं। विज्ञापन का ठेका शौचालय के लिए मिला, लेकिन इसमें फर्जीवाड़ा करते हुए मूत्रालयों को भी शामिल कर लिया गया।

54 लाख रुपये गबन

फर्जीवाड़ा कर 54 लाख रुपये का गबन किया गया। जब इसकी शिकायत ईओडब्ल्यू के पास पहुंची तो जांच की गई। जांच में गबन की पुष्टि होने के बाद इस मामले में नगर निगम के अधिकारियों, विज्ञापन एजेंसी संचालक सहित आठ लोगों पर धोखाधड़ी, कूटरचित दस्तावेज तैयार करने सहित अन्य धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई है।


2017 में 38 शौचालयों पर विज्ञापन लगाने के लिए निविदा निकाली गई थी। 10 नवंबर 2017 को यह निविदा दीपक एडवरटाइजर के संचालक दीपक जेठवानी को मिली। उस समय नगर निगम में सीसीओ के पद पर प्रदीप चतुर्वेदी थे, जिनका कुछ समय पहले निधन हो चुका है। सीसीओ को नगर निगम की ओर से निविदा प्राप्तकर्ता से अनुबंध करना था। यहां से फर्जीवाड़े की शुरुआत की गई।

इसमें दो सेवा शर्तें इन लोगों ने खुद को लाभ पहुंचाने के लिए जोड़ लीं। इसमें शौचालय की संख्या 48 कर ली गई, जबकि 38 के लिए ठेका हुआ था। अनुबंध की शर्त क्रमांक-10 भी जोड़ी गई। इसमें आर्थिक लाभ प्राप्त करने के लिए टेंडर अवधि समाप्त होने के बाद निविदाकार को पांच प्रतिशत राशि बढ़ाकर आगामी वर्ष के लिए ठेका देने की शर्त लिखी गई। जबकि ऐसी कोई शर्त विभाग द्वारा तय नहीं की गई थी।

जांच के बाद एफआईआर

2020 में यह ठेका पूरा हो गया। इसके बाद भी इन शौचालयों से दीपक जेठवानी द्वारा विज्ञापन नहीं हटाए गए। इन शौचालयों पर लगे होर्डिंग के जरिये दीपक जेठवानी द्वारा 72 लाख 57 हजार 600 रुपये किराया वसूला गया, लेकिन निगम में जमा नहीं किया गया। उसके द्वारा निगम को 54 लाख रुपये की चपत लगाई गई। इतना पैसा निगम में जमा होना था, लेकिन वह नगर निगम के अधिकारियों की मदद से हड़प लिया गया। इसके बाद शिकायत ईओडब्ल्यू में की गई। जांच के बाद एफआईआर की गई।

इन लोगों पर हुई एफआईआर

दीपक एडवरटाइजर के संचालक दीपक जेठवानी, तत्कालीन नोडल अधिकारी शशिकांत शुक्ला, सहायक लिपिक मदन पालिया, आउटसोर्स कर्मचारी धर्मेंद्र शर्मा, अपर आयुक्त राजेश श्रीवास्तव, अपर आयुक्त वित्त देवेंद्र पालिया, अधीक्षण यंत्री जेपी पारा और उपायुक्त विज्ञापन सुनील सिंह चौहान पर एफआईआर दर्ज हुई है।

कई अधिकारियों का तबादला

जिन अधिकारियों पर एफआईआर हुई है, उनमें से अधिकांश का तबादला दूसरे विभाग और अन्य जगह हो गया है।

गिरफ्तारी होगी

ईओडब्ल्यू के एसपी दिलीप सिंह तोमर का कहना है कि नगर निगम के अधिकारी, विज्ञापन एजेंसी संचालक द्वारा नगर निगम में 54 लाख रुपये का विज्ञापन घोटाला किया गया है। इस मामले में जांच के बाद आठ लोगों पर एफआईआर हुई है। इन्हें गिरफ्तार भी किया जाएगा।

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