ग्वालियर की तर्ज पर शिवपुरी-गुना में बनेगा 34 किमी लंबा ईस्टर्न बायपास, जाम से मिलेगी राहत और आसान होगा सफर
Gwalior Shivpuri Guna Traffic Solution: डीपीआर तैयार करने वाली कंसल्टेंसी को अलग-अलग संभावित रास्तों का सर्वे कर तकनीकी और आर्थिक आधार पर उनकी तुलना क...और पढ़ें
Publish Date: Sat, 22 Aug 2026 03:01:13 PM (IST)Updated Date: Sat, 22 Aug 2026 03:01:40 PM (IST)
HighLights
- NHAI ने DPR के लिए शुरू की प्रक्रिया
- पहले सर्वे से तय होगा अलाइनमेंट
- अगले 30 वर्षों की ट्रैफिक मांग का होगा आकलन
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। ग्वालियर में वेस्टर्न बायपास का काम शुरू हो चुका है, ताकि शहर से गुजरने वाले भारी ट्रैफिक को बाहर से ही शिवपुरी-गुना की तरफ डायवर्ट किया जा सके। अब इसी तर्ज पर शिवपुरी और गुना में भी ट्रैफिक को शहर के बाहर से संचालित करने के लिए 34 किमी लंबे ईस्टर्न बायपास का निर्माण किया जाएगा। शिवपुरी में 13 किमी और गुना में 21 किमी लंबाई में ईस्टर्न बायपास तैयार कराए जाएंगे। इन बायपास को ग्रीनफील्ड यानी नए अलाइनमेंट के साथ तैयार कराया जाएगा और इनकी चौड़ाई फोरलेन होगी। इन बायपास के निर्माण की जिम्मेदारी नेशनल हाइवे अथारिटी आफ इंडिया (एनएचएआइ) को दी गई है।
एनएचएआई ने इन दोनों प्रोजेक्टों को साथ मिलाकर इनकी डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) बनाने की तैयारी भी शुरू कर दी है। इसके लिए एजेंसी के चयन की प्रक्रिया की जा रही है। ये फोरलेन ईस्टर्न बायपास तैयार होने से इन दोनों शहरों में लगने वाले ट्रैफिक जाम से मुक्ति मिलेगी, साथ ही वाहन चालकों के लिए गुना से आगे का सफर भी आसान हो जाएगा। फिलहाल बायपास का अलाइनमेंट तय नहीं किया गया है।
डीपीआर तैयार करने वाली कंसल्टेंसी को अलग-अलग संभावित रास्तों का सर्वे कर तकनीकी और आर्थिक आधार पर उनकी तुलना करनी होगी। इसके बाद सबसे उपयुक्त अलाइनमेंट की सिफारिश की जाएगी। इसके लिए मौजूदा सड़क, पुल, ड्रेनेज और अन्य संरचनाओं का सर्वे करने के साथ ट्रैफिक सर्वे और एक्सल लोड सर्वे भी होगा। अगले 30 वर्षों की ट्रैफिक मांग का आकलन भी डीपीआर का हिस्सा रहेगा।
जमीन अधिग्रहण से लेकर पुल तक का बनेगा प्लान
बायपास की डीपीआर केवल सड़क की डिजाइन तक सीमित नहीं रहेगी। इसमें पेवमेंट, पुल, कलवर्ट, ड्रेनेज, सर्विस रोड, सड़क सुरक्षा आदि की विस्तृत डिजाइन तैयार की जाएगी। साथ ही प्रोजेक्ट की लागत और आर्थिक-व्यावसायिक व्यवहार्यता का आकलन किया जाएगा। डीपीआर तैयार करने वाली एजेंसी को भूमि अधिग्रहण के लिए जमीन चिह्नित करने, राजस्व रिकार्ड का मिलान, संयुक्त माप, जमीन से जुड़े मकान, पेड़ और फसलों जैसी परिसंपत्तियों का आकलन तथा अधिग्रहण प्रक्रिया के लिए आवश्यक दस्तावेज तैयार करने होंगे।
अलाइनमेंट ऐसा कि बायपास के दोनों तरफ न हो एक किसान की जमीन
एजेंसी चयन की शर्तों में एनएचएआइ ने उल्लेख किया है कि अलाइनमेंट तय करते समय यथासंभव ऐसा रास्ता चुना जाए, जिससे किसानों को अपनी जमीन के एक हिस्से से दूसरे हिस्से में जाने के लिए बार-बार बायपास पार न करना पड़े। संभव होने पर सड़क को दो राजस्व क्षेत्रों की सीमा के साथ रखने पर विचार किया जाएगा।
स्कूल और स्वास्थ्य सुविधाओं तक स्थानीय लोगों की पहुंच भी बनाए रखने के निर्देश हैं। जंगल और वन्यजीव क्षेत्रों से अलाइनमेंट को यथासंभव दूर रखने के लिए भी कहा गया है। एजेंसी को सर्वे का काम सात महीने में पूरा करना होगा।