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ग्वालियर लोक अदालत: कलेक्टर से मिली 3500 रु. की मदद लेकर पहुंचा दिव्यांग, बिजली बिल में राहत न मिलने पर खाली हाथ लौटा

फालका बाजार निवासी 42 वर्षीय घनश्याम बैसाखियों के सहारे लोक अदालत पहुंचे थे। उनका कहना है कि वे कोई काम करने में सक्षम नहीं हैं और परिवार का खर्च पत्न...और पढ़ें

By Vikram Singh TomarEdited By: Rajdil Shivhare
Publish Date: Sat, 12 Sep 2026 10:17:44 PM (IST)Updated Date: Sat, 12 Sep 2026 10:18:11 PM (IST)
ग्वालियर लोक अदालत: कलेक्टर से मिली 3500 रु. की मदद लेकर पहुंचा दिव्यांग, बिजली बिल में राहत न मिलने पर खाली हाथ लौटा

HighLights

  1. छूट न मिलने पर खाली हाथ लौटा दिव्यांग
  2. 20 हजार प्रकरणों में 46 करोड़ का निपटारा
  3. घर खड़ी कार का कटा टोल, हुई राशि वापस

नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। लोक अदालत में शनिवार को हजारों लोगों के विवाद निपटे, करोड़ों रुपये के अवार्ड हुए और बकाया राशि की वसूली भी हुई, लेकिन इसी बीच एक दिव्यांग की उम्मीद बिजली के 4423 रुपये के बिल पर अटक गई। दोनों पैरों से 100 प्रतिशत दिव्यांग घनश्याम मेहर कलेक्टर से मिली 3500 रुपये की सहायता राशि लेकर लोक अदालत पहुंचे थे। उम्मीद थी कि किसी तरह बिजली बिल का निपटारा हो जाएगा, लेकिन पूरी राशि जमा करने की बात कहे जाने पर उन्हें बिना बिल जमा किए ही लौटना पड़ा।

बैसाखियों के सहारे लोक अदालत पहुंचे थे 42 वर्षीय घनश्याम

फालका बाजार निवासी 42 वर्षीय घनश्याम बैसाखियों के सहारे लोक अदालत पहुंचे थे। उनका कहना है कि वे कोई काम करने में सक्षम नहीं हैं और परिवार का खर्च पत्नी दूसरे घरों में काम करके चलाती हैं। कुछ दिन पहले 4423 रुपये का बिजली बिल आने के बाद उन्होंने कलेक्टर रुचिका चौहान से मदद मांगी थी। उनकी आर्थिक स्थिति देखते हुए कलेक्टर ने 10 सितंबर को रेडक्रॉस/स्वेच्छानुदान मद से 3500 रुपये की सहायता मंजूर की थी।


घनश्याम शनिवार को यही राशि लेकर बिजली विभाग के काउंटर पर पहुंचे। उनका कहना है कि कर्मचारियों ने 4423 रुपये की पूरी राशि जमा करने को कहा। सहायता राशि कम होने के कारण बिल जमा नहीं हो सका और उन्हें वापस लौटना पड़ा। घनश्याम ने बताया कि उनकी 600 रुपये की दिव्यांग पेंशन भी लंबे समय से बंद है।

उनका आरोप है कि बिल को लेकर विभाग के कर्मचारियों ने पुलिस केस और जेल भेजने की धमकी भी दी थी। उनका कहना है कि लोक अदालत से भी राहत नहीं मिली, इसलिए वे अब दोबारा कलेक्टर के पास अपनी समस्या लेकर जाएंगे।

एक तरफ 46 करोड़ से ज्यादा का निपटारा

इसी लोक अदालत में जिला न्यायालय, नगर निगम, हाईकोर्ट और उपभोक्ता फोरम में मिलाकर 20 हजार से अधिक प्रकरणों का निराकरण हुआ। जिला न्यायालय में 11,175 प्रकरणों में 35.94 करोड़ रुपये से अधिक के अवार्ड पारित हुए। नगर निगम ने संपत्तिकर और जलकर के 8536 प्रकरणों से 9.25 करोड़ रुपये से अधिक की वसूली की।

उपभोक्ता फोरम में 44 प्रकरणों का निराकरण करते हुए 1.25 करोड़ रुपये से अधिक की राशि का निपटारा कराया गया। वहीं हाईकोर्ट की तीन पीठों ने 352 प्रकरणों का निराकरण कर मोटर दुर्घटना मामलों में 5.48 करोड़ रुपये से अधिक का अतिरिक्त क्षतिधन दिलाया।

घर पर खड़ी कार का टोल कटा तो लौटाई राशि

लोक अदालत में पिंटू पार्क निवासी शुभम का मामला भी निपटा। उसकी कार घर पर खड़ी थी, इसके बावजूद फास्टैग से भिंड के बरई टोल प्लाजा पर टोल राशि कट गई। शुभम ने उपभोक्ता फोरम में शिकायत की। लोक अदालत में दोनों पक्षों की सहमति से गलत तरीके से काटी गई टोल राशि वापस करा दी गई।

हाईकोर्ट की तीन पीठों ने 352 मामले निपटाए

हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ में न्यायमूर्ति आशीष श्रोती और अधिवक्ता गौरव समाधिया, न्यायमूर्ति अमित सेठ और अधिवक्ता अभिषेक सिंह भदौरिया तथा न्यायमूर्ति पुष्पेंद्र यादव और अधिवक्ता अंजना सिंह तोमर की तीन पीठों ने मामलों का निराकरण किया। इनमें 246 मोटर दुर्घटना दावा प्रकरण शामिल थे। एक मामले में सड़क हादसे में मृत व्यक्ति के वारिसों को 4.75 लाख रुपये अतिरिक्त क्षतिधन दिलाया गया।