देवगढ़ किले से हटाई गईं तोपों को वापस स्थापित करने की मांग, सेना के मुरार स्टेशन हेडक्वार्टर को भेजा पत्र
श्री क्षत्रधारी आश्रम, सिद्ध रतनगढ़ धाम की ओर से इस संबंध में स्टेशन हेड क्वार्टर मुरार, जिला ग्वालियर के प्रशासनिक कमांडेंट को पत्र सौंपा गया है।
Publish Date: Thu, 22 Oct 2026 08:32:05 PM (IST)Updated Date: Thu, 22 Oct 2026 08:32:33 PM (IST)
देवगढ़ किले की तोप। सोशल मीडियाHighLights
- तोपों की वापसी के लिए पत्राचार
- धार्मिक परंपराओं के निर्वहन में असुविधा
- वर्ष 2013 में हटाई गई थीं तोपें
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। डबरा तहसील क्षेत्र स्थित ऐतिहासिक पथरीगढ़ (देवगढ़) किले से हटाई गईं दो तोपों को वापस उनके मूल स्थान पर रखने की मांग फिर सामने आई है। श्री क्षत्रधारी आश्रम, सिद्ध रतनगढ़ धाम की ओर से इस संबंध में स्टेशन हेड क्वार्टर मुरार, जिला ग्वालियर के प्रशासनिक कमांडेंट को पत्र सौंपा गया है। पत्र में विजयदशमी और दीपावली के अवसर पर परंपरागत रूप से तोपों की पूजा-अर्चना करने के लिए अनुमति देने और दोनों तोपों को वापस किले पर स्थापित करने का आग्रह किया गया है।
तोपों को हटाया गया था साल 2013 में
आश्रम की ओर से भेजे गए पत्र में उल्लेख किया गया है कि वर्ष 2013 में पथरीगढ़ (देवगढ़) किले से दोनों तोपों को हटाया गया था। पत्र के अनुसार तोपों को हटाए जाने के बाद से आश्रम और राजवंशीय परिवार की धार्मिक परंपराओं के निर्वहन में परेशानी आ रही है। आश्रम पक्ष का कहना है कि विजयादशमी और दीपावली के अवसर पर इन तोपों की पूजा-अर्चना की जाती रही है और यह परंपरा उनके लिए विशेष धार्मिक एवं ऐतिहासिक महत्व रखती है।
इस मामले में पहले भी लिखें गए पत्र
पत्र में बताया गया है कि दोनों तोपों को हटाए जाने के बाद उन्हें वापस रखने के लिए कई बार पत्राचार किया गया। आश्रम की ओर से पूर्व में भेजे गए पत्रों का हवाला देते हुए बताया गया कि इस मामले में वर्ष 2020, 2021, 2023, 2024 और 2025 में भी संबंधित अधिकारियों को पत्र लिखे गए थे। तोपों का संबंध केवल ऐतिहासिक धरोहर से नहीं, बल्कि राजवंशीय परंपरा और धार्मिक आस्था से भी है। दीपावली पर को तोपों की पूजा-अर्चना करना आवश्यक है।
धार्मिक आयोजन में होती है असुविधा
ऐसे में दोनों तोपों को समय रहते किले पर वापस रखने की मांग की गई है, ताकि परंपरागत पूजा-विधान संपन्न किया जा सके। ऐतिहासिक किले से तोपों को हटाने के बाद आश्रम पक्ष को पूजा के लिए बार-बार सेना के हेड क्वार्टर जाना पड़ता है। इससे धार्मिक आयोजन में असुविधा होती है। आश्रम ने संबंधित अधिकारियों से मामले पर गंभीरता से विचार करने और उचित कार्रवाई करने की अपील की है।
प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग
आवेदन में पूर्व में जिला कलेक्टर ग्वालियर को लिखे गए पत्र का भी उल्लेख किया गया है। आश्रम पक्ष का कहना है कि मामले के समाधान के लिए पहले भी प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया गया, लेकिन उसकी मांग पूरी नहीं हुई। अब एक बार फिर स्टेशन हेड क्वार्टर मुरार के प्रशासनिक कमांडेंट से दोनों तोपों को उनके पुराने स्थान पर रखने की अनुमति देने का अनुरोध किया गया है।