ग्वालियर के दारूल कुरआन मदरसे की जांच के लिए 6 सदस्यीय समिति गठित, बच्चों से क्रूरता का है मामला
समिति जांच के बाद अपनी रिपोर्ट कलेक्टर को सौंपेगी, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।
Publish Date: Sat, 31 Oct 2026 10:58:42 AM (IST)Updated Date: Sat, 31 Oct 2026 10:59:01 AM (IST)
एजी ऑफिस के पास स्थित मदरसे पर कार्रवाई करने पहुंची टीम। फाइल फोटोHighLights
- जिपं सीईओ की अध्यक्षता में छह सदस्यीय समिति
- बाल आयोग की रिपोर्ट में मारपीट का खुलासा
- सभी 26 बच्चों को माता-पिता को सौंपा गया
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। मदरसा दारूल कुरआन मामले की विस्तृत जांच के लिए जिला पंचायत सीईओ सोजान सिंह रावत की अध्यक्षता में छह सदस्यीय समिति गठित की गई है। कलेक्टर के निर्देश पर बनी समिति में एसडीएम, सीएसपी, जिला कार्यक्रम अधिकारी, जिला शिक्षा अधिकारी और श्रम अधिकारी भी शामिल हैं। समिति जांच के बाद अपनी रिपोर्ट कलेक्टर को सौंपेगी, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।
आयोग की रिपोर्ट में मारपीट करने वालों के नाम भी
मामले में मदरसे से रेस्क्यू किए गए सभी 26 बच्चों को सत्यापन के बाद उनके माता-पिता के सुपुर्द किया जा चुका है। मारपीट और प्रताड़ना के आरोपों के साथ मदरसे की मान्यता और दस्तावेजों की जांच भी समिति के दायरे में है। मप्र राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की रिपोर्ट में मारपीट करने वालों के नाम भी सामने आए हैं।
आयोग की कार्रवाई के बाद रेस्क्यू किए गए बच्चों को गृहों में रखा गया था। बाल कल्याण समिति ने अपनी जांच रिपोर्ट जिला कलेक्टर और महिला एवं बाल विकास विभाग को सौंप दी है। रिपोर्ट में बालक-बालिकाओं के साथ मारपीट, उन्हें अवैध ढंग से रखने और भूखा रखने सहित कई बिंदुओं का उल्लेख है। इसमें बाजी नजमा, साबिर और अनस के साथ पढ़ाने वाले जावेद और मोहम्मद शाकिर के नाम शामिल हैं। जिला प्रशासन के निर्देश पर मामले में वैधानिक कार्रवाई के तहत एफआईआर की जाएगी। मदरसे की मान्यता और दस्तावेजों की जांच के आधार पर संचालकों पर भी कार्रवाई हो सकती है।
आयोग ने भी रिपोर्ट में क्रूरता का किया उल्लेख
मप्र राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की मंगलवार को जारी रिपोर्ट के अनुसार, मदरसे में बच्चियों के साथ क्रूरता होती थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि बाजी और उसके बेटे-बेटी मारपीट करते थे तथा बच्चियों को पढ़ाई से दूर रखा जाता था। बच्चियां जमीन पर सोती थीं और बालकों के शौचालय में दरवाजे नहीं थे। बच्चों को एक-एक कमरे में रखा जाता था।
आयोग की अध्यक्ष निवेदिता शर्मा ने ग्वालियर जिले के सभी मदरसों और उन स्थानों की जांच के आदेश दिए हैं, जहां बालक-बालिकाएं रहते हैं। दारूल कुरआन में बच्चों के साथ अमानवीय व्यवहार करने वालों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। आयोग ने सात दिन में निर्देशों पर कार्रवाई की रिपोर्ट भी मांगी है।