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कृषि विश्वविद्यालय ने जारी कीं उड़द व मूंग की तीन उन्नत किस्में, बंपर पैदावार से किसानों की बढ़ेगी आय

कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि इन नई किस्मों के प्रयोग से न केवल प्रति हेक्टेयर पैदावार में उल्लेखनीय वृद्धि होगी, बल्कि फसलें गंभीर रोगों एवं प्रतिकूल मौसम से भी सुरक्षित रहेंगी

By Anil TomarEdited By: Rajdil Shivhare
Publish Date: Tue, 03 Nov 2026 02:46:50 PM (IST)Updated Date: Tue, 03 Nov 2026 02:47:16 PM (IST)
कृषि विश्वविद्यालय ने जारी कीं उड़द व मूंग की तीन उन्नत किस्में, बंपर पैदावार से किसानों की बढ़ेगी आय

HighLights

  1. मूंग की उन्नत किस्में
  2. उड़द की नई किस्म
  3. रोग प्रतिरोधक क्षमता

नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय ने अंचल और देश के किसानों की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ करने तथा दलहन उत्पादन को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए मूंग और उड़द की नई उन्नत किस्मों को विकसित किया है।

भारत सरकार द्वारा अधिसूचित इन किस्मों में मूंग की आरवीआइएम 750 व आरवीएसएम एक तथा उड़द की आरवीएसयू एक शामिल हैं। कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि इन नई किस्मों के प्रयोग से न केवल प्रति हेक्टेयर पैदावार में उल्लेखनीय वृद्धि होगी, बल्कि फसलें गंभीर रोगों एवं प्रतिकूल मौसम से भी सुरक्षित रहेंगी


मूंग किस्म आरवीआईएम 750 : औसत उत्पादन 1009 किग्रा प्रति हेक्टेयर

मूंग की आरवीआईएम 750 किस्म उत्तर पूर्वी मैदानी क्षेत्रों के लिए विशेष रूप से अनुकूल पाई गई है, जिसकी औसत पैदावार 1009 किग्रा प्रति हेक्टेयर है और यह परीक्षणों में अधिकतम 1217 किग्रा प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन देने में सक्षम रही है।

  • विशेषताएं: यह किस्म मात्र 68.3 दिनों में पककर तैयार हो जाती है। इसके दाने बड़े और आकर्षक होते हैं यानि 100 बीजों का वजन 3.87 ग्राम।
  • रोग प्रतिरोधकता: यह किस्म पत्ती मरोड़ा वायरस, लीफ रिंकल वायरस, वेब ब्लाइट, सर्कोस्पोरा लीफ स्पाट, एन्थ्रेक्नोज और जीवाणु जनित पत्ती धब्बा रोग के प्रति अत्यधिक प्रतिरोधी है। इसके साथ ही पोड बोरर और फली चूसक कीटों का इस पर न्यूनतम प्रभाव पड़ता है।

मूंग किस्म आरवीएसएम एक: 63 से 70 दिनों में पकने वाली शीघ्र किस्म

मूंग कीआरवीएसएम एक किस्म की औसत पैदावार 765 किग्रा प्रति हेक्टेयर है, जिसकी उत्पादन क्षमता 585 से 1331 किग्रा प्रति हेक्टेयर तक है।

  • विशेषताएं: यह 63 से 70 दिनों यानि औसत 67.5 दिन में पकने वाली शीघ्र किस्म है। इसके 100 बीजों का औसत वजन 3.45 ग्राम होता है।
  • मौसम व रोग प्रतिरोधकता: यह खरीफ तथा गर्मी, दोनों मौसमों के लिए उपयुक्त है। इसमें फसल गिरने और फलियों के फटने की समस्या नहीं होती है। यह पीला मोजेक वायरस और एन्थ्रेक्नोज के प्रति प्रतिरोधी है।

उड़द आवीएसयू एक : प्रति हेक्टेयर 10 क्विंटल तक पैदावार

उड़द की आरवीएसयू एक किस्म काले दाने वाली एक उच्च उपज देने वाली किस्म है, जिसकी औसत पैदावार 10 क्विंटल यानि 1000 किग्रा प्रति हेक्टेयर है। इसके 100 बीजों का वजन 4.1 ग्राम।

  • विशेषताएं: यह किस्म 73 दिनों में पककर तैयार होती है। जुलाई के द्वितीय से चौथे सप्ताह के बीच बोने पर यह भारी बारिश के प्रभाव से बचने में सक्षम है।
  • रोग प्रतिरोधकता: यह खरीफ सीजन के लिए अत्यंत उपयुक्त है और मूंगबीन पीला मोजेक वायरस, पाउडरी फफूंदी, एन्थ्रेक्नोज तथा रूट राट रोगों के प्रति मध्यम प्रतिरोधी है।

कृषि विश्वविद्यालय ने मूंग की दो व उड़द की एक किस्म के उन्नत बीजों का तैयार किया है। दोनों ही फसलों को पूरे मध्यप्रदेश के मौसम के हिसाब से विकसित किया गया है। जिससे इनसे अधिक पैदावार मिलती है और रोग प्रतिरोधी होने से किसानों को नुकसान भी नहीं होता। साथ ही शासन की सब्सिडी वाली योजनाओं में इसका लाभ मिलता है। - डॉ. आरए कौशिक, डायरेक्टर रिसर्च, राजमाता विजयाराजे कृषि विश्वविद्यालय

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