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जायद में मूंगफली और तिल की खेती की संभावनाएं तलाशेगा कृषि विश्वविद्यालय ग्वालियर, किसानों की बढ़ेगी अतिरिक्त आय

कृषि विश्वविद्यालय का उद्देश्य ऐसी फसल प्रणाली विकसित करना है, जिससे कम समय में फसल तैयार हो और किसानों को एक अतिरिक्त फसल से आय प्राप्त हो सके।

By Anoop BhargavEdited By: Rajdil Shivhare
Publish Date: Sun, 20 Sep 2026 08:03:08 PM (IST)Updated Date: Sun, 20 Sep 2026 08:03:40 PM (IST)
जायद में मूंगफली और तिल की खेती की संभावनाएं तलाशेगा कृषि विश्वविद्यालय ग्वालियर, किसानों की बढ़ेगी अतिरिक्त आय

HighLights

  1. खाली खेत और कम पानी का बेहतर उपयोग
  2. तिलहन उत्पादन और मिट्टी की उर्वरता में सुधार
  3. कम अवधि वाली किस्मों पर होगा शोध

अनूप भार्गव, नईदुनिया, ग्वालियर। खरीफ की फसल कटने के बाद कई क्षेत्रों में खेतों की खाली अवधि को किसानों की अतिरिक्त आय का स्रोत बनाने के लिए राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय ग्वालियर जायद सीजन में मूंगफली और तिल की खेती की संभावनाओं पर शोध करेगा।

विश्वविद्यालय का उद्देश्य ऐसी फसल प्रणाली विकसित करना है, जिससे कम समय में फसल तैयार हो और किसानों को एक अतिरिक्त फसल से आय प्राप्त हो सके।

कृषि वैज्ञानिक जायद मौसम में मूंगफली और तिल की विभिन्न किस्मों एवं उनकी उत्पादन क्षमता का परीक्षण करेंगे। साथ ही मिट्टी, तापमान, सिंचाई की उपलब्धता और फसल अवधि जैसे कारकों का अध्ययन किया जाएगा। इसमें यह भी देखा जाएगा कि खरीफ के बाद खेत की उपलब्ध नमी और संसाधनों का उपयोग करते हुए इन फसलों की खेती किस प्रकार की जा सकती है।


कम पानी में बेहतर विकल्प

अनुसंधान निदेशक डॉ. आरए कौशिक ने बताया कि जायद में मूंगफली और तिल की खेती पर शोध का मुख्य उद्देश्य खरीफ और रबी के बीच उपलब्ध खाली अवधि का बेहतर उपयोग करना है। यदि कम अवधि, सीमित पानी और स्थानीय परिस्थितियों में इन फसलों से संतोषजनक उत्पादन मिलता है, तो किसानों को अतिरिक्त फसल लेने का विकल्प मिल सकता है। इससे फसल चक्र में विविधता के साथ किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी।

तिलहन उत्पादन को मिलेगा बढ़ावा

मूंगफली और तिल जैसी तिलहनी फसलों को जायद में शामिल करने से खाद्य तेलों के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा। विश्वविद्यालय शोध के आधार पर उपयुक्त फसल संयोजन और कृषि तकनीक की सिफारिश किसानों के लिए करेगा। मूंगफली दलहनी फसल होने के कारण मिट्टी में नाइट्रोजन स्थिरीकरण में भी योगदान देती है, जिससे अगली फसल के लिए मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

खरीफ के बीच खाली अवधि का बेहतर उपयोग कर किसानों को अतिरिक्त फसल और आय का विकल्प देने की दिशा में यह शोध महत्वपूर्ण है। जायद में मूंगफली और तिल की खेती की संभावनाओं का विज्ञानी परीक्षण किया जाएगा। - डॉ. अरविंद कुमार शुक्ला, कुलपति, आरवीएसकेवीवी, ग्वालियर