हिरण्यवन कोठी विवाद: प्रतिमा हटाने के लिए 'काटे घोड़े के पैर', आंग्रे परिवार का आरोप- जयविलास पैलेस ले गए शिवाजी की मूर्ति
चित्रलेखा आंग्रे और तुलाजी आंग्रे ने ज्योतिरादित्य सिंधिया सहित अन्य के खिलाफ चल रहे मामले में यह आवेदन दिया है।
Publish Date: Mon, 26 Oct 2026 09:31:50 AM (IST)Updated Date: Mon, 26 Oct 2026 11:32:18 AM (IST)
सोशल मीडिया।HighLights
- शिवाजी महाराज की प्रतिमा हटाने पर विवाद
- आंग्रे परिवार ने की मूल स्थिति बहाल करने की मांग
- चार दशकों से जारी है कानूनी लड़ाई, आज फिर सुनवाई
डिजिटल टीम, ग्वालियर। सिंधिया-आंग्रे परिवार के बीच दशकों से चला आ रहा संपत्ति विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है। 9 एकड़ में फैली हिरण्यवन कोठी को लेकर चल रहे विवाद में अब छत्रपति शिवाजी महाराज की करीब 106 साल पुरानी प्रतिमा का मामला भी जुड़ गया है।
आंग्रे परिवार ने हाई कोर्ट में आवेदन प्रस्तुत कर आरोप लगाया है कि प्रतिमा को हटाने के दौरान घोड़े के पैर तक काट दिए गए और प्रतिमा को जयविलास पैलेस ले जाया गया। परिवार ने प्रतिमा को उसके मूल स्थान पर स्थापित करने और कोठी की पूर्व स्थिति बहाल करने की मांग की है। इस मामले में सोमवार को हाई कोर्ट मे ं सुनवाई होना है।
चित्रलेखा आंग्रे और तुलाजी आंग्रे ने दिया है आवेदन
चित्रलेखा आंग्रे और तुलाजी आंग्रे ने ज्योतिरादित्य सिंधिया सहित अन्य के खिलाफ चल रहे मामले में यह आवेदन दिया है। आवेदन में प्रतिमा को हटाए जाने की परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए उसकी मूल स्थान पर पुनर्स्थापना की मांग की गई है।
अलीबाग से ग्वालियर लाई गई थी प्रतिमा
आवेदन के अनुसार, छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा का निर्माण प्रसिद्ध मूर्तिकार विनायक पी. करमरकर ने किया था। संभाजी राव आंग्रे इसे महाराष्ट्र के अलीबाग से ग्वालियर लेकर आए थे।
इसके बाद बसंत विहार और चेतकपुरी के बीच स्थित हिरण्यवन कोठी परिसर में पत्थर के चबूतरे पर प्रतिमा स्थापित कराई गई थी।
आंग्रे परिवार का आरोप है कि प्रतिमा को हटाने के दौरान उसके घोड़े के पैर काटे गए और उसे जयविलास पैलेस ले जाया गया।
43 साल से चल रहा है विवाद
- हिरण्यवन कोठी को लेकर आंग्रे परिवार और सिंधिया पक्ष के बीच कानूनी विवाद करीब चार दशक से अधिक समय से चल रहा है।
- 13 अगस्त 1983: आंग्रे परिवार ने कोठी से जबरन बेदखल किए जाने का आरोप लगाया।
- 19 जुलाई 1985: जिला न्यायालय ने कोठी के लिए रिसीवर नियुक्त किया।
- 10 फरवरी 2005: जिला न्यायालय ने आंग्रे पक्ष के मुकदमे में राहत दी।
- वर्ष 2005: ज्योतिरादित्य सिंधिया और अन्य ने जिला न्यायालय के फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी।
- 24 अगस्त 2026: आंग्रे परिवार ने प्रतिमा और कोठी की पूर्व स्थिति बहाल कराने के लिए हाई कोर्ट में आवेदन प्रस्तुत किया