अमृतसर से 800 किमी तय कर ग्वालियर किला पहुंची शबद चौकी यात्रा, गुरुद्वारा दाता बंदी छोड़ में अखंड पाठ शुरू
अमृतसर से करीब 800 किलोमीटर का सड़क मार्ग तय कर बुधवार को जलालपुर पहुंची शबद चौकी कीर्तन यात्रा गुरुवार सुबह जलालपुर से फूलबाग गुरुद्वारा पहुंची। यहां...और पढ़ें
Publish Date: Thu, 08 Oct 2026 08:45:04 PM (IST)Updated Date: Thu, 08 Oct 2026 08:45:34 PM (IST)
रोशनी से जगमगाता किला स्थित गुरुद्वारा। नईदुनियाHighLights
- शताब्दी पुरानी परंपरा के तहत होगी दुर्ग की परिक्रमा
- फूलबाग गुरुद्वारा में पुष्प वर्षा के साथ स्वागत
- दीपावली से पहले अमृतसर लौटेगी कीर्तन यात्रा
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। ऐतिहासिक ग्वालियर दुर्ग पर स्थित गुरुद्वारा दाता बंदी छोड़ में तीन दिवसीय उत्सव का शुभारंभ गुरुवार को अखंड पाठ के साथ हुआ। गुरुद्वारे का परिसर शबद-कीर्तन की स्वर लहरियों से गूंजता रहा। सचखंड साहिब अमृतसर के हजूरी रागी पंथ कीर्तनी जत्थे और कथा वाचकों ने गुरुमत विचारों के माध्यम से संगत को निहाल किया। रात में विशेष कीर्तन दरबार सजा, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।
उधर, अमृतसर से करीब 800 किलोमीटर का सड़क मार्ग तय कर बुधवार को जलालपुर पहुंची शबद चौकी कीर्तन यात्रा गुरुवार सुबह जलालपुर से फूलबाग गुरुद्वारा पहुंची। यहां पहले से मौजूद सिख संगत ने पुष्प वर्षा और सत्कार के साथ यात्रा का स्वागत किया। ढोल-नगाड़ों और शबद-कीर्तन के बीच वातावरण भक्तिमय हो उठा।
जलपान के बाद यात्रा फूलबाग से गुरुद्वारा दाता बंदी छोड़ के लिए रवाना हुई। रास्ते में संगत और श्रद्धालुओं ने श्रद्धा के साथ यात्रा का अभिवादन किया। तीन दिवसीय उत्सव के दूसरे दिन अखंड पाठ के साथ कीर्तन और बड़ा दीवान सजेगा।
ग्वालियर किला स्थित गुरुद्वारे में होता शबद कीर्तन और पाठ। नईदुनिया
पहले परकोटे की परिक्रमा, फिर नगर कीर्तन के साथ किले की परिक्रमा
शुक्रवार को शबद चौकी कीर्तन यात्रा शताब्दी पुरानी परंपरा का निर्वहन करेगी। सुबह सबसे पहले यात्रा ग्वालियर दुर्ग के परकोटे की परिक्रमा करेगी। इसके बाद दुर्ग से नीचे उतरकर उरवाई गेट से किले की बाहरी परिक्रमा नगर कीर्तन के रूप में शुरू होगी। यात्रा कोटेश्वर, घासमंडी, किलागेट, सेवानगर, खेड़ापति कालोनी, मरीमाता और फूलबाग चौराहे से होते हुए फूलबाग गुरुद्वारा पहुंचेगी। यहां कुछ समय विश्राम और जलपान के बाद यात्रा महल गेट, शिंदे की छावनी और रामदास घाटी होते हुए शब्द प्रताप आश्रम के रास्ते वापस दुर्ग पहुंचेगी।
सुबह करीब सात बजे फूलबाग गुरुद्वारा से यात्रा दुर्ग के लिए रवाना होगी। मार्ग में कई स्थानों पर सिख समाज के साथ अन्य वर्गों के लोग भी पुष्प वर्षा कर शबद चौकी यात्रा का स्वागत करेंगे। यात्रा के दौरान शबद-कीर्तन से शहर का वातावरण भक्तिमय नजर आएगा।
गुरुद्वारे में माथा टेककर प्रार्थना करते लोग। नईदुनिया
सर्वपितृ अमावस्या पर भी होगी परिक्रमा
शनिवार को सर्वपितृ अमावस्या के अवसर पर भी शबद चौकी यात्रा किले की परिक्रमा करेगी। इसके बाद रविवार को यात्रा पैदल ही अमृतसर के लिए रवाना होगी। आयोजकों के अनुसार यात्रा दीपावली से एक दिन पहले अमृतसर पहुंचेगी और अगले दिन दीप जलाकर दीपोत्सव मनाया जाएगा। इधर, ग्वालियर अंचल से नगर कीर्तनों के आने का सिलसिला भी जारी है। गुरुवार को पदमपुर-खेरिया से नगर कीर्तन दाता बंदी छोड़ गुरुद्वारा पहुंचा। गुरुद्वारे को आकर्षक ढंग से सजाया गया है।